भारत सरकार के नीति आयोग ने हाल ही में AI for Inclusive Societal Development नाम की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य नई तकनीकों की मदद से देश के लगभग 49 करोड़ असंगठित कामगारों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में जोड़ा जा सकता है।
रिपोर्ट का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जब भारत 2047 में विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनने की दिशा में आगे बढ़े, तब समाज का कोई भी वर्ग पीछे न रह जाए। इस रिपोर्ट में नीति आयोग ने एक नई राष्ट्रीय योजना मिशन डिजिटल श्रमसेतु की घोषणा का सुझाव दिया है।
असंगठित क्षेत्र: भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की लगभग 90 प्रतिशत श्रम शक्ति असंगठित क्षेत्र में काम करती है। इनमें किसान, बढ़ई, बुनकर, ड्राइवर, घरेलू कामगार, स्वास्थ्य सहायक और छोटे कारोबारी शामिल हैं। इन कामगारों का योगदान देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का करीब 45 प्रतिशत है। फिर भी उन्हें न तो स्थायी नौकरी का भरोसा है, न सामाजिक सुरक्षा का कवच। नीति आयोग की यह रिपोर्ट इन्हीं लोगों को तकनीक से सशक्त भारत के केंद्र में रखने की बात करती है।
मिशन डिजिटल श्रमसेतु: भरोसे और अवसरों की नई कड़ी
नीति आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि एक बड़ा राष्ट्रीय मिशन डिजिटल श्रमसेतु शुरू किया जाए, जो असंगठित कामगारों के लिए तकनीक से जुड़ा पुल बने।
इस मिशन के ज़रिए हर कामगार को एक डिजिटल पहचान और कौशल प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जिसे वह अपने मोबाइल या डिजिटल वॉलेट में रख सकेगा। इससे उसका कार्य इतिहास, योग्यता और अनुभव औपचारिक रूप से दर्ज होगा।
जब कोई व्यक्ति नौकरी के लिए आवेदन करेगा या ऋण लेना चाहेगा, तो उसका यह डिजिटल रिकॉर्ड भरोसे का प्रमाण बनेगा। इससे मजदूरों को सही भुगतान मिलेगा, विवाद घटेंगे और उन्हें औपचारिक सेवाओं तक सीधी पहुंच होगी।
एआई से हटेगी भाषा और साक्षरता की बाधा
रिपोर्ट में बताया गया है कि बहुत से कामगार सरकारी पोर्टलों या ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाते क्योंकि वे अंग्रेज़ी या जटिल हिंदी समझ नहीं पाते।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस समस्या को दूर कर सकता है। नीति आयोग के अनुसार, आने वाले वर्षों में स्थानीय भाषाओं में बोलने वाले एआई असिस्टेंट तैयार किए जाएंगे, जो मजदूरों को उनकी भाषा में योजनाओं, ऋण और सरकारी सुविधाओं की जानकारी देंगे।
उदाहरण के लिए, कोई बढ़ई या इलेक्ट्रीशियन अपनी स्थानीय बोली में सवाल पूछेगा और एआई उसे आवाज़ में जवाब देगा- जैसे किस बैंक से सस्ता लोन मिलेगा या किस ट्रेनिंग से उसकी आमदनी बढ़ सकती है।
किसानों और कारीगरों के लिए नई तकनीकें
रिपोर्ट में किसानों और कारीगरों के लिए भी कई तकनीकी समाधान सुझाए गए हैं। जैसे, IoT सेंसर से खेतों की मिट्टी और मौसम की स्थिति का विश्लेषण कर पानी और खाद का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे फसल की पैदावार बढ़ेगी और लागत घटेगी।
कारीगरों के लिए एआई नॉलेज सिस्टम बनाया जाएगा, जो उन्हें उनके काम से जुड़े सवालों का समाधान तुरंत देगा। कोई बुनकर अगर पूछे कि धागा बार-बार क्यों टूटता है? तो सिस्टम उसे वीडियो और आवाज़ में समाधान बताएगा।
इस तरह की तकनीकें न सिर्फ उत्पादन बढ़ाएंगी बल्कि परंपरागत कला और हस्तशिल्प को भी आधुनिक रूप में बचाए रखेंगी।
महिलाओं और कमजोर वर्गों को मिलेगा नया सहारा
नीति आयोग की रिपोर्ट में महिला श्रम भागीदारी बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है। वर्तमान में भारत में महिलाओं की कार्य भागीदारी लगभग 37 प्रतिशत है, जबकि लक्ष्य है इसे 2047 तक 70 प्रतिशत तक पहुंचाना।
इसके लिए महिलाओं को घर से ही काम करने के डिजिटल अवसर, ऑनलाइन ट्रेनिंग और सुरक्षित भुगतान प्रणाली दी जाएगी। साथ ही, मिशन डिजिटल श्रमसेतु के तहत सामाजिक सुरक्षा, बीमा, स्वास्थ्य लाभ और पेंशन को एकीकृत किया जाएगा ताकि हर कामगार को बुनियादी सुरक्षा मिले।
रिपोर्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह महिला हो, ग्रामीण मजदूर हो या दिव्यांग तकनीकी क्रांति से वंचित न रहे।
अभी नहीं तो कभी नहीं: समय पर कदम उठाना जरूरी
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर भारत ने अभी कदम नहीं उठाया, तो करोड़ों कामगार डिजिटल अर्थव्यवस्था से बाहर रह जाएंगे।वर्तमान दर से अगर भारत की GDP 6.3% सालाना बढ़ती रही, तो 2047 तक यह 15 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचेगी। लेकिन अगर तकनीकी हस्तक्षेप से यह दर 10% तक बढ़ाई जाए, तो भारत आसानी से 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बन सकता है।
