Ahmedabad plane crash: एयर इंडिया विमान दुर्घटना की जांच में एक बड़ी सफलता मिली है। सरकार ने गुरुवार को कहा कि विमान के ब्लैक बॉक्स से डेटा सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लिया गया है और उसका विश्लेषण किया जा रहा है। लंदन गैटविक जा रहा बोइंग 787-8 विमान 12 जून को अहमदाबाद से उड़ान भरने के तुरंत बाद एक मेडिकल हॉस्टल परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 270 से अधिक लोग मारे गए थे। इनमें विमान में सवार 241 लोग भी शामिल थे।
विमान दुर्घटना की जांच कर रही विशेष टीम
सरकार ने आज कहा कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) के प्रमुख की अध्यक्षता में एक टीम अहमदाबाद विमान दुर्घटना की जांच कर रही है और विमान के ब्लैक बॉक्स से डेटा निकाला जा रहा है। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 से जुड़ी दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के बाद AAIB ने तुरंत जांच शुरू की और निर्धारित मानदंडों के अनुरूप 13 जून 2025 को एक टीम का गठन किया था।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार गठित इस टीम का नेतृत्व AAIB के महानिदेशक कर रहे हैं और इसमें एक विमानन चिकित्सा विशेषज्ञ, एक ATC अधिकारी और राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह विनिर्माण और डिजाइन के राज्य (USA) की सरकारी जांच एजेंसी है, जो ऐसी जांच के लिए आवश्यक है।
क्रैश प्रोटेक्शन मॉड्यूल सुरक्षित रूप से निकाला गया
मंत्रालय ने यह भी कहा कि 24 जून की शाम को AAIB के महानिदेशक GVG युगंधर के नेतृत्व वाली टीम ने AAIB और NTSB के तकनीकी सदस्यों के साथ डेटा निष्कर्षण प्रक्रिया शुरू की। फ्रंट ब्लैक बॉक्स से क्रैश प्रोटेक्शन मॉड्यूल (CPM) को सुरक्षित रूप से निकाल लिया गया और 25 जून, 2025 को मेमोरी मॉड्यूल को सफलतापूर्वक एक्सेस किया गया और इसका डेटा AAIB लैब में डाउनलोड किया गया।
ब्लैक बॉक्स से डेटा की रिकवरी और जांच पर स्थिति रिपोर्ट
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा, फ्रंट ब्लैक बॉक्स से क्रैश प्रोटेक्शन मॉड्यूल (CPM) को 24 जून को सुरक्षित रूप से निकाला गया और 25 जून को मेमोरी मॉड्यूल को सफलतापूर्वक एक्सेस किया गया। इसका डेटा AAIB लैब में डाउनलोड किया गया। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) डेटा का विश्लेषण चल रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य दुर्घटना की ओर ले जाने वाली घटनाओं के अनुक्रम को फिर से बनाना, विमानन सुरक्षा को बढ़ाने और भविष्य की घटनाओं को रोकने के लिए योगदान देने वाले कारकों की पहचान करना है।
