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'आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं', नालंदा विवि परिसर का उद्घाटन करने के बाद PM मोदी बोले

New campus of Nalanda University : पीएम मोदी ने कहा, 'यह मेरा सौभाग्य मुझे नालंदा आने का अवसर मिला है। यह भारत के विकास यात्रा के एक शुभ संकेत के रूप में देखता हूं। नालंदा केवल एक नाम नहीं है। नालंदा एक पहचान और सम्मान है। नीतीश कुमार ने कहा कि पीएम यहां आए हैं, इसे देखकर वह काफी खुश हैं।

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नालंदा में लोगों को संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी।

New campus of Nalanda University : नए परिसर का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नालंदना भारत की परंपरा एवं पहचान का केंद्र था। आग की लपटें ज्ञान नहीं मिटा सकतीं। नालंदा से विश्व की विरासत जुड़ी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नालंदा आने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। नीतीश ने कहा कि पीएम यहां आए हैं, इसे देखकर वह काफी खुश हैं।

नालंदा एक पहचान और सम्मान है-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, 'यह मेरा सौभाग्य मुझे नालंदा आने का अवसर मिला है। यह भारत के विकास यात्रा के एक शुभ संकेत के रूप में देखता हूं। नालंदा केवल एक नाम नहीं है। नालंदा एक पहचान और सम्मान है। नालंदा एक मूल्य, मंत्र, गौरव और गाथा है। नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं।'

भारत के सामर्थ्य का परिचय कराएगा परिसर

इसकी पुनर्स्थापना भारत के स्वर्णिम युग की शुरुआत करने जा रहा है। अपने प्राचीन अवशेषों के समीप नालंदा का नवजागरण, यह नया कैंपस विश्व को भारत के सामर्थ्य का परिचय देगा। नालंदा बताएगा जो राष्ट्र मजबूत मानवीय मूल्यों पर खड़े होते हैं वे राष्ट्र इतिहास को पुनर्जीवित करके बेहतर भविष्य की नींव रखना जानते हैं।

पीएम ने नालंदा के खंडहरों का निरीक्षण किया

नालंदा पहुंचने पर पीएम ने नालंदा के खंडहरों का निरीक्षण किया। प्राचीन नालंदा के खंडहरों में मठ और शिक्षण संस्थान के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। इसमें स्तूप, मंदिर, विहार (आवासीय और शैक्षणिक भवन) तथा प्लास्टर, पत्थर और धातु से बनी महत्वपूर्ण कलाकृतियां शामिल हैं। नालंदा भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। इससे पहले पीएम ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ‘यह हमारे शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत खास दिन है। आज राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया जाएगा। नालंदा का हमारे गौरवशाली अतीत से गहरा नाता है। यह विश्वविद्यालय निश्चित रूप से युवाओं की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत मददगार साबित होगा।’

पांचवीं शताब्दी में हुई थी नालंदा विवि की स्थापना

विश्वविद्यालय का नया परिसर नालंदा के प्राचीन खंडहरों के स्थल के करीब है। इस परिसर की स्थापना नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 के माध्यम से की गई थी। इस अधिनियम में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 2007 में फिलीपीन में आयोजित दूसरे पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में लिए गए एक निर्णय को लागू करने का प्रावधान किया गया था। नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना पांचवीं शताब्दी में हुई थी जिसने दुनिया भर से छात्रों को आकर्षित किया था।

800 वर्षों तक नालंदा में होती रही पढ़ाई

विशेषज्ञों के अनुसार, 12वीं शताब्दी में आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किए जाने से पहले यह प्राचीन विश्वविद्यालय 800 वर्षों तक फलता-फूलता रहा। नए विश्वविद्यालय ने 2014 में 14 छात्रों के साथ एक अस्थायी स्थान पर काम करना शुरू किया। विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य 2017 में शुरू हुआ। इस विश्वविद्यालय में भारत के अलावा 17 अन्य देशों.. ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्रुनेई, दारुस्सलाम, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लाओस, मॉरीशस, म्यांमा, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, वियतनाम और थाईलैंड की भागीदारी है। इन देशों ने विश्वविद्यालय के समर्थन में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 137 छात्रवृत्तियां प्रदान करता है।

अंतरराष्ट्रीय छात्र करेंगे पीएचडी

शैक्षणिक वर्ष 2022-24, 2023-25 के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और 2023-27 के पीएचडी पाठ्यक्रम के लिए नामांकित अंतरराष्ट्रीय छात्रों में अर्जेंटीना, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, घाना, इंडोनेशिया, केन्या, लाओस, लाइबेरिया, म्यांमा, मोजाम्बिक, नेपाल, नाइजीरिया, कांगो गणराज्य, दक्षिण सूडान, श्रीलंका, सर्बिया, सिएरा लियोन, थाईलैंड, तुर्किये, युगांडा, अमेरिका, वियतनाम और जिम्बाब्वे के विद्यार्थी शामिल हैं। विश्वविद्यालय में छह अध्ययन केंद्र हैं जिनमें बौद्ध अध्ययन, दर्शन और तुलनात्मक धर्म स्कूल; ऐतिहासिक अध्ययन स्कूल; पारिस्थितिकी और पर्यावरण अध्ययन स्कूल; और सतत विकास और प्रबंधन स्कूल शामिल हैं।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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