Aditya L1: भारत का सूर्य मिशन अपने सबसे कठिन दौर में एंट्री करने वाला है। भारत का आदित्य एल1 जल्द ही उस प्वाइंट पर पहुंच जाएगा, जहां उसे स्थिर रहकर सूर्य पर नजर रखना है, सूरज का अध्ययन करना है। आदित्य एल1 का यह चरण काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
हेलो कक्षा में एंट्री करने को तैयार
आदित्य एल1 स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण संतुलन के बिंदु, लैग्रेंज प्वाइंट 1 (L1) के आसपास हेलो कक्षा में एंट्री करने को तैयार है। अंतरिक्ष यान अपनी यात्रा के अंतिम चरण में है। मिली जानकारी के अनुसार आदित्य एल 1 का हालो ऑरबिट में एंट्री के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका है।
महत्वपूर्ण चरण
एल1 में प्रवेश मिशन का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसके लिए सटीक नेविगेशन और नियंत्रण की आवश्यकता होती है। एल1 की ओर स्थानांतरण कक्षा में स्थापित होने से पहले आदित्य एल1 को पृथ्वी से जुड़ी चार कक्षीय गतिविधियों की एक श्रृंखला से गुजरना पड़ा।
इसरो की योजना
हेलो ऑर्बिट में प्रवेश करने के लिए आदित्य एल 1 को अपना प्रक्षेप पथ और स्पीड दोनों को बनाए रखना होगा, उसपर नियंत्रण रखना होगा। जब सूर्ययान एल1 बिंदु पर पहुंचेगा, तो इसरो, इंजन को एक बार फिर से चालू करेगा, ताकि यह आगे न बढ़ सके। यह निर्धारित बिंदु तक जाएगा और एक बार जब यह उस बिंदु पर पहुंच जाएगा तो यह इसके चारों ओर घूमने लगेगा और एल1 पर फंस जाएगा।
5 साल तक करेगा काम
जब आदित्य एल1 अपने गंतव्य पर पहुंच जाएगा, तो यह अगले पांच वर्षों तक सूर्य पर होने वाली विभिन्न घटनाओं का पता लगाने में मदद करेगा। जिससे इसरो को सूर्य का अध्ययन करने में बड़ी मदद मिलेगी। इसके डाटा से सूर्य के रहस्यों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
