कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नीट (यूजी) री-एग्जाम से पहले मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह कदम समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने इसकी तुलना गड्ढों वाली सड़क की मरम्मत करने के बजाय पूरी सड़क बंद कर देने से की।
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के अपने गांव संतुक पिंपरी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिपके ने कहा कि टेलीग्राम को बंद करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा प्रणाली में खामियां हैं तो उन्हें दूर किया जाना चाहिए, न कि किसी ऐप पर प्रतिबंध लगाकर समस्या को छिपाने की कोशिश की जाए। उन्होंने कहा कि यह वैसा ही है जैसे सड़क पर गड्ढे होने की शिकायत मिलने पर उसकी मरम्मत करने के बजाय पूरी सड़क ही बंद कर दी जाए। टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने का कोई मतलब नहीं है।
दिपके का प्रधानमंत्री को पत्र
वहीं, इससे पहले अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने परीक्षा संबंधी विवादों के बीच कथित रूप से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। इसमें दिपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की अपनी मांग भी दोहराई और जवाबदेही तय किए जाने पर जोर दिया।
दिपके ने पत्र में कहा कि मैं भारी मन से यह पत्र लिख रहा हूं ताकि आपका ध्यान एक ऐसे गंभीर संकट की ओर आकर्षित कर सकूं, जो हमारे देश के भविष्य तथा युवाओं के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हाल के सप्ताहों में 11 छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें से पांच मामलों की सूचना पिछले 48 घंटे में मिली है। उन्होंने कहा कि संभावित पुनर्परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता के कारण छात्रों की चिंताएं बढ़ रही हैं।
शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग पर अड़े
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री से शिक्षा मंत्री को पद से हटाने का आग्रह करते हुए कहा कि मंत्री प्रधानमंत्री के विश्वास के कारण पद पर बने हुए हैं और अंतिम जवाबदेही प्रधानमंत्री की है।
कल से जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन
बता दें कि जंतर-मंतर पर 20 जून को होने वाला प्रदर्शन इस महीने सीजेपी का दूसरा बड़ा प्रदर्शन होगा। इससे पहले छह जून को दीपके के आह्वान पर सैकड़ों छात्रों और युवा पेशेवरों ने दिल्ली में प्रदर्शन कर विभिन्न परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी। उस प्रदर्शन के बाद संगठन ने परीक्षा विवादों और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर कई शहरों में अपना अभियान शुरू किया, जिसमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा प्रमुख मांग बना हुआ है।
