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अध्यादेश विवाद पर AAP को मिल सकता है कांग्रेस का साथ, विपक्ष की बैठक से पहले पार्टी ने दिए संकेत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 16, 2023, 07:35 AM IST

Delhi Services Ordinance: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा राज्यों में निर्वाचित सरकारों के संघीय ढांचे पर किसी भी हमले का विरोध किया है और वह ऐसा करना जारी रखेगी। पार्टी की ओर से यह बयान बेंगलुरू में प्रस्तावित विपक्षी एकता की बैठक से पहले आया है।

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अध्यादेश विवाद पर आप का साथ दे सकती है कांग्रेस

Photo : PTI

Delhi Services Ordinance: दिल्ली में शक्तियों के बंटवारे से संबंधित केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी को कांग्रेस का साथ मिल सकता है। विपक्षी एकता की दूसरी बैठक से पहले पार्टी की ओर से इसको लेकर बड़ा फैसला किया गया है। बिना नाम लिए कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह अध्यादेश के मुद्दे पर सदन के अंदर व बाहर दिल्ली सरकार के साथ खड़ी हो सकता है। पार्टी ने कहा है कि वह केंद्र सरकार द्वारा राज्यपालों के माध्यम से संघीय ढांचे पर हो रहे हमले को मुद्दे को संसद में उठाएगी।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा राज्यों में निर्वाचित सरकारों के संघीय ढांचे पर किसी भी हमले का विरोध किया है और वह ऐसा करना जारी रखेगी। खास बात यह है कि पार्टी की ओर से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब 17 व 18 जुलाई को बेंगलुरू में विपक्षी एकता की बैठक प्रस्तावित है और 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है।

आम आदमी पार्टी की ओर से दी जा चुकी है धमकी

बता दें, आम आदमी पार्टी वाली दिल्ली सरकार लगातार कांग्रेस से अध्यादेश मुद्दे पर स्पष्टता का अनुरोध कर रही है। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पटना में हुई बैठक में यहां तक कहा था कि अगर अध्यादेश विवाद पर कांग्रेस उसका समर्थन नहीं करती है तो वह अगली बैठक से दूरी बना लेगी। ऐसे में कांग्रेस ने समर्थन देने का संकेत दिया है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरू में प्रस्तावित बैठक में कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना फैसला सुना सकती है।

मानसून सत्र में इन मुद्दों को उठाएगी पार्टी

बता दें, शनिवार को कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक हुई। इसमें आगामी मानसून सत्र को लेकर चर्चा हुई। पार्टी की ओर से कहा गया है कि राज्यपालों के माध्यम से देश के संघीय ढांचे पर किए जा रहे हमले को संसद में उठाया जाएगा। इसके अलावा पार्टी मणिपुर हिंसा, बालासोर ट्रेन हादसा, जीएसटी, मुद्रास्फीति जैसे मुद्दों पर सरकार का घेराव करेगी।

क्या है अध्यादेश विवाद

केंद्र सरकार की ओर से 19 मई को एक अध्यादेश लाया गया था। इसके माध्यम से दिल्ली की चुनी हुई सरकार की शक्तियों को कम कर दिया गया। जबकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से संबंधित सेवाओं को छोड़कर, दिल्ली में सेवाओं का नियंत्रण निर्वाचित सरकार के पास रहेगा। केंद्र सरकार के इस कदम के बाद अरविंद केजरीवाल देशव्यापी दौरे पर गए और दिल्ली अध्यादेश के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए गैर-भाजपा दलों से मुलाकात की।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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