पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर उपचुनाव से पहले राज्य में सियासी संग्राम तेज हो गया है। इस बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेताओं को नजरबंद रखा गया है। सेरामपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की रैली से पहले पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं को रैली में शामिल होने से रोका जा रहा है। ममता ने दावा किया कि उन्हें भी रैली स्थल तक जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
इस दौरान ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख बनर्जी ने पुलिस और भाजपा सरकार पर टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। पूर्व सीएम ने रैली स्थल पर जाने से पहले उन्होंने पुलिस प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा, “हमें नजरबंद रखा गया है। मुझे रैली स्थल पर जाने की अनुमति नहीं है। लेकिन मैं जाकर रैली को संबोधित करूंगी। रोक सको तो रोक लो।”
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह रैली अदालत की अनुमति से आयोजित की जा रही है। इसका सुचारू संचालन सुनिश्चित करना पुलिस और प्रशासन का कर्तव्य है। लेकिन पुलिस ने इस पर आंखें मूंद ली हैं। बनर्जी ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं अत्याचार के समान हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन ऐसी स्थिति को क्यों पनपने दे रहा है। इस तरह के अत्याचार अफ्रीकी देशों में देखने को मिलते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में भी इस तरह के अत्याचार नहीं हो रहे हैं, जहां भाजपा की सरकार है। तो फिर सत्ताधारी भाजपा ने सड़कों पर इतना आतंक क्यों फैलाया है?
TMC का 150 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का दावा
उनका ये बयान तब आया है जब एक दिन पहले टीएमसी ने दावा किया था कि हुगली जिले में उसके 150 से अधिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। जिसके बाद पार्टी के सेरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से नकार दिया है।
कुणाल घोष की कार को घेरने का दावा
इसी बीच TMC विधायक कुणाल घोष की कार को कथित तौर पर उत्तरपाड़ा इलाके में घेरने का मामला भी सामने आया। पार्टी के अनुसार, सेरामपुर रैली में शामिल होने जा रहे घोष की गाड़ी को काले झंडे लिए लोगों के एक समूह ने घेर लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और उनकी कार पर अंडे और पत्थर भी फेंके। इस घटना में कार की पिछली खिड़की को नुकसान पहुंचा।
अदालत से जुड़ा है रैली का मामला
सेरामपुर में TMC की प्रस्तावित रैली को लेकर पहले भी कानूनी विवाद सामने आया था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने रैली को कुछ शर्तों के साथ अनुमति देने का आदेश दिया था। अदालत ने कार्यक्रम के स्थान और समय को लेकर शर्तें भी तय की थीं। एक आदेश में रैली को निर्धारित मैदान तक सीमित रखने और GT Road पर सभा नहीं करने की बात कही गई थी। बाद में राज्य सरकार ने इस अनुमति को चुनौती दी थी और हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने मामले में संबंधित एकल पीठ से आदेश पर पुनर्विचार कराने को कहा था।
