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'10 साल में 10 कोठियां बन जातीं, आज मेरे पास दिल्ली में रहने को घर भी नहीं...' जनता की अदालत में बोले अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal News: जंतर-मंतर पर जनता की अदालत में अरविंद केजरीवाल ने कहा, इन नेताओं को फर्क नहीं पड़ता, इनकी चमड़ी मोटी है। इनपर कितने भी आरोप लग जाएं फर्क नहीं पड़ता। मैं नेता नहीं हूं, मेरी मोटी चमड़ी नहीं है, मुझे ये लोग चोर कहते हैं, मुझे फर्क पड़ता है।

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अरविंद केजरीवाल।

Photo : Twitter

Arvind Kejriwal News: मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आज जंतर-मंतर पर जनता की अदालत लगाई। इस दौरान केजरीवाल ने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर कड़ा प्रहार किया। केजरीवाल ने कहा, दिल्ली के अंदर हम लोग ईमानदारी से सरकार चला रहे थे। हमने जनता को ऐसी-ऐसी सुविधाएं दी, जिनकी कल्पना नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा, हमारी सरकार ने बिजली-पानी, महिलाओं के लिए बसों का किराया फ्री कर दिया। मोहल्ला क्लीनिक बना दिए, शानदार स्कूल बना दिए। 10 साल ईमानदारी से काम किया। मोदी जी को लगा कि अगर इससे जीतना है कि ईमानदारी पर चोट करो। उन्होंने षड्यंत्र रचा कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया को बेईमान साबित करो और षड्यंत्र रच कर सभी को जेल में डाल दिया।

'मेरी चमड़ी मोटी नहीं, मुझे फर्क पड़ता है'

अरविंद केजरीवाल ने कहा, अब हम जेल से बाहर आ गए और जेल से बाहर आकर मैंने इस्तीफा दे दिया। मैंने इस्तीफा इसलिए दिया, क्योंकि मैं गंध करने और भ्रष्टाचार करने के लिए नहीं आया था। मुझे पैसे कमाने होते तो इनकम टैक्स की नौकरी करता था, कमा लेता। हम देश के लिए राजनीति में आए थे। उन्होंने कहा, इन नेताओं को फर्क नहीं पड़ता, इनकी चमड़ी मोटी है। इनपर कितने भी आरोप लग जाएं फर्क नहीं पड़ता। मैं नेता नहीं हूं, मेरी मोटी चमड़ी नहीं है, मुझे ये लोग चोर कहते हैं, मुझे फर्क पड़ता है। आज मैं दुखी हूं, मेरी आत्मा पीड़ित है। इसीलिए मैंने इस्तीफा दिया।

'आज दिल्ली में मेरे पास घर भी नहीं'

आप संयोजक ने कहा, मैंने केवल इज्जत कमाई है, ईमानदारी कमाई है। मेरे बैंक में कोई पैसे नहीं हैं। मैं कुछ दिन में सीएम का बंगला छोड़ दूंगा, आज मेरे पास दिल्ली में रहने को घर भी नहीं है। लोग कहते हैं कि 10 साल सीएम रहे,10 बंगले बन जाते। केजरीवाल ने कहा, श्राद्ध चल रहे हैं, जैसे ही नवरात्रि शुरू होंगे, मैं सीएम आवास छोड़ दूंगा और आप लोगों में से किसी के घर आकर आप सभी के साथ रहने लगूंगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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