Punjab Chunav: कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को खत्म करने और संगठन को चुनावी मुकाबले के लिए तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को सौंपी है। दो दशक से अधिक लंबे राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देख चुके पायलट अब कांग्रेस नेतृत्व के भरोसेमंद 'तुरुप के पत्ते' के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि उनकी सांगठनिक क्षमता और सभी धड़ों को साथ लेकर चलने की शैली पंजाब में कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को मजबूत कर सकती है।
हाईकमान ने पायलट पर लगाया दांव
कांग्रेस में पायलट का बढ़ता कद इस बात से समझा जा सकता है कि पार्टी ने उन्हें पंजाब में अंदरूनी कलह दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी है। विधानसभा चुनाव करीब हैं और कांग्रेस की प्रदेश इकाई में कई गुट अपना दबदबा कायम करने की कोशिश में आमने-सामने हैं।
कांग्रेस ने शनिवार को संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि अब तक पायलट छत्तीसगढ़ के प्रभारी थे। वहीं, भूपेश बघेल को जितेंद्र सिंह की जगह असम का प्रभारी बनाया गया है।
अंदरूनी खींचतान से जूझ रही कांग्रेस
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है। ऐसे में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की प्रदेश इकाई में चल रही गुटबाजी को खत्म करना होगी। जहां आम आदमी पार्टी, भाजपा और शिअद ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस लंबे समय से अपनी अंदरूनी खींचतान से जूझती रही है।
Sachin Pilot Rahul Gandhi
पार्टी में यह टकराव उस समय और खुलकर सामने आया, जब कांग्रेस नेतृत्व ने एक जुलाई को अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के पद पर बनाए रखने और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनावी प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला किया।
चन्नी समर्थकों के एक खेमे ने वडिंग को प्रदेशाध्यक्ष बनाए रखने का विरोध किया और उन्हें पद से हटाने की मांग की। इस खेमे की यह भी मांग रही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए।
बघेल के हालिया पंजाब दौरों के बावजूद दोनों खेमों के बीच कोई सुलह नहीं हो सकी और पार्टी के कार्यक्रमों में गुटबाजी लगातार खुलकर सामने आती रही।
पायलट के सामने चुनावी रणनीति बनाने की चुनौती
पायलट सोमवार को 49 वर्ष के हो जाएंगे। उनके सामने न केवल परस्पर विरोधी खेमों को एक मंच पर लाने की चुनौती है, बल्कि उन्हें सत्तारूढ़ AAP, भाजपा और शिअद का मुकाबला करने के लिए चुनावी रणनीति भी तैयार करनी होगी। पायलट को यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने को कई लोग चुनावी रणनीति बनाने की उनकी क्षमता और सबको साथ लेकर चलने की उनकी शैली पर पार्टी नेतृत्व के बढ़ते भरोसे के रूप में देख रहे हैं।
कांग्रेस पंजाब में वापसी की कोशिश कर रही है और उसने इसके लिए ऐसे नेता पर उम्मीदें टिकाई हैं, जिनके लिए वापसी करना कोई नयी बात नहीं है।
वर्ष 2020 में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत का नेतृत्व करने के बाद पायलट एक समय पार्टी में अलग-थलग पड़ गए थे। उन्हें उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था और उन पर भाजपा से नजदीकियां बढ़ाने के आरोप भी लगे थे।
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बगावती तेवर अपना चुके हैं पायलट
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा की अहम भूमिका से दोनों पक्षों के बीच सुलह होने के बाद पायलट ने बगावत खत्म कर दी और पार्टी के वफादार नेता के रूप में वापस लौट आए। इसके बावजूद कुछ समय तक उन्हें संदेह की नजर से देखा जाता रहा और उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली। बाद में उन्हें 2023 में कांग्रेस महासचिव और छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया।
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उन्हें केरलम विधानसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक भी बनाया गया था, जहां कांग्रेस ने 10 साल बाद बड़ा जनादेश हासिल किया। विधानसभा चुनाव में पायलट के प्रचार अभियान और उनकी भूमिका की काफी सराहना हुई।
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समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपे जाने को राजस्थान के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि कई लोग उन्हें 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का सबसे मजबूत नेता मानते हैं। गोविंद सिंह डोटासरा की जगह उन्हें कांग्रेस की राजस्थान इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें भी लगती रही हैं। फिलहाल उन्हें यह पद नहीं मिला है, लेकिन पंजाब की चुनावी जंग जीतने पर यह उनके लिए अगला बड़ा इनाम हो सकता है।
पायलट की पहचान सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता की है और उनकी नियुक्ति पर आई शुरुआती प्रतिक्रियाओं में भी इसकी झलक दिखाई देती है। वडिंग, चन्नी, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत पंजाब में कांग्रेस के कई नेताओं ने पायलट को राज्य का प्रभारी महासचिव बनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी ऊर्जा से विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में नया उत्साह आएगा। राहुल गांधी की नई टीम आकार ले रही है और ऐसे में पायलट एक बार फिर उनके पसंदीदा नेताओं में शुमार होते दिखाई दे रहे हैं।
