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दुनिया के इन 92 देशों को चाहिए PM मोदी जैसा नेता, सरकार पर से लोगों का उठने लगा है भरोसा

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 20, 2022, 12:06 PM IST

ऐसे 92 देशों में इस साल जनवरी से अब तक महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं। दुनिया के हर महाद्वीप में प्रदर्शन हुए हैं। एक बड़ी बात ये है कि इनमें से एक तिहाई देश ऐसे हैं जहां पिछले साल कोई प्रदर्शन नहीं हुआ था।

KEY HIGHLIGHTS
  • अलग-अलग महाद्वीपों में अपनी सरकार की नीतियों से लोग परेशान हैं
  • बढ़ती महंगाई की वजह से लोग सड़क पर हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं
  • इन 92 देशों की जनता को चाहिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा कद्दावर नेता

Narendra Modi : कुछ लोगों को भारत के हालात खराब लगते हैं। वो कभी महंगाई की बात करते हैं। वो कभी रुपये और डॉलर की बात करते हैं। कभी हंगर इंडेक्स की बात करते हैं। इन लोगों को जानना चाहिए कि दुनिया के मौजूदा हालात में भारत कितनी अच्छी स्थिति में है। क्योंकि दुनिया की हालत ये है कि 92 से ज्यादा देशों में लोगों के लिए जिंदगी मुश्किल हो गई है। लोगों का सरकार से भरोसा उठ रहा है। लोग सड़कों पर आ रहे हैं। कहीं कहीं तो मारकाट मची है। क्योंकि ये वो देश हैं जो महंगाई को संभाल नहीं पा रहे, जहां खाने पीने की चीजों से लेकर पेट्रोल, डीजल, गैस की कमी भी हो रही है और दाम भी भयानक तरीके से बढ़ चुके हैं।

92 देशों में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हुए

जनवरी से लेकर अब तक महंगाई के मुद्दे पर इन देशों में बड़े प्रदर्शन हुए हैं और ये प्रदर्शन रुके नहीं हैं। इनमें ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन , फिनलैंड, पोलैंड, रोमानिया, बुल्गारिया, ट्यूनीशिया, बोस्निया, लातविया, इटली, स्वीडन, नॉर्वे, स्कॉटलैंड, बेल्जियम, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, फिलीपींस, श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल, ईजिप्ट, दक्षिण अफ्रीका, वेनेजुएला, जिम्बाब्वे और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। ऐसे 92 देशों में इस साल जनवरी से अब तक महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं। दुनिया के हर महाद्वीप में प्रदर्शन हुए हैं। एक बड़ी बात ये है कि इनमें से एक तिहाई देश ऐसे हैं जहां पिछले साल कोई प्रदर्शन नहीं हुआ था। यानी एक साल में महंगाई के ग्लोबल अटैक के सामने कई देश पस्त हो चुके हैं।

देशों में हुए प्रदर्शनों की संख्या

  • इंडोनेशिया में 600 से ज्यादा प्रदर्शन हुए हैं
  • इटली में 200 से ज्यादा प्रोटेस्ट हुए हैं
  • इक्वाडोर में तो 1000 से ज्यादा प्रदर्शन हुए हैं
  • स्पेन में 335 से ज्यादा प्रदर्शन हो चुके हैं
  • स्वीडन में 150 से ज्यादा प्रोटेस्ट हुए हैं
  • जर्मनी में 50 से ज्यादा प्रोटेस्ट हुए हैं

फ्रांस में गैस और पेट्रोल की भारी किल्लत

हाल ये है कि महंगाई के खिलाफ दुनिया भर में हो रहे प्रदर्शनों में इस साल अब तक 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यूरोप के सबसे विकसित देशों में से एक फ्रांस में महंगाई के खिलाफ लोगों ने हल्लाबोल कर दिया है। ईंधन की इतनी कमी है कि फ्रांस में ट्रांसपोर्ट, स्कूल और अस्पतालों में काम करने वालों ने हड़ताल कर दी है। प्रदर्शनकारी डिमांड कर रहे हैं रूस के खिलाफ फ्रांस बैन हटाए जिस से गैस और ईंधन की सप्लाई फिर से शुरू हो सके और महंगाई काबू में आए। फ्रांस में गैस और पेट्रोल की इतनी कमी है कि घंटों इंतजार करने के बाद लोगों का नंबर आ रहा है। फ्रांस के लोग अब सवाल कर रहे हैं कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर प्रतिबंध लगाकर फ्रांस को क्या मिला। पाठशाला में मैंने आपको बताया था कि कैसे अब NATO देशों में लोग NATO से अलग होने की मांग कर रहे हैं।

जर्मनी के लोग NATO से अलग होना चाहते हैं

जर्मनी में तो और बुरा हाल है, जर्मन लोग अब सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। जर्मनी में लोगों का मानना है कि महंगाई और ईंधन की कमी नहीं होती अगर रूस यूक्रेन युद्ध में जर्मनी न्यूट्रल रहता। जर्मन लोग सड़कों पर उतर कर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। इनकी डिमांड है कि जर्मनी को NATO से अलग हो जाना चाहिए। जर्मनी में महंगाई ने 30 सालों की रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यहां Cost Of Living लगभग 4% तक बढ़ गई है।

ब्रिटेन का हाल अलग नहीं

ब्रिटेन में महंगाई दर पिछले 40 साल में सबसे ज्यादा है। इस से खाने पीने की चीजें महंगी हो गई हैं। लोगों के लिए अपने घरों के बिजली बिल तक देना संभव नहीं हो पा रहा है। महंगाई के कारण ब्रिटेन में लगभग 12% विदेशी छात्र सड़कों पर सोने को मजबूर हैं क्योंकि वो किराया नहीं दे पा रहे हैं। इसी के साथ ब्रिटेन अपने सबसे गहरे इलेक्ट्रिसिटी संकट से जूझ रहा है। ब्रिटेन में बिजली इतनी महंगी हो गई कि वहां एक महीने का बिजली बिल लगभग 2 लाख रुपये तक पहुंच गया है। जब विकसित देशों का ये हाल है तो गरीब देशों में क्या हो रहा है। ये अंदाजा लगाया जा सकता है। कैरेबियन आईलैंड में एक देश है हैती, यहां भी महंगाई और जरूरी चीजों की कमी है।

हैती में गृहयुद्ध जैसे हालात

हैती में इस समय गृहयुद्ध जैसे हालात बन चुके हैं। लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भारी पड़ रहा है। खाने के लिए भोजन नहीं है। पेट्रोल और फ्यूल नहीं है। जरूरी चीजों के लिए लोग मारामारी कर रहे हैं। आगजनी की जा रही है। हैती की सरकार प्रोटेस्ट को कुचलने के लिए सेना का सहारा ले रही है। हैती में कई अलगाववादी गिरोह काम कर रहे हैं और इन्ही में से एक गिरोह ने हैती की राजधानी में सबसे बड़े फ्यूल टर्मिनल को अपने कब्जे में ले लिया। जिसके बाद 1 करोड़ गैलन से ज्यादा ईंधन की सप्लाई बंद हो गई। इसका असर ये हुआ कि देश में महंगाई तेजी से बढ़ी। गैस और कैरोसीन के लिए लोग भटक रहे हैं लेकिन कहीं से मिल नहीं रहा है। पिछले एक महीने से हैती में ये हालात चल रहे हैं।

अमेरिकी देश कोलंबिया में महंगाई आसमान पर

दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में भी महंगाई आसमान पर है। खास तौर पर ईंधन की महंगाई से लोगों की कमर टूट रही है। कोलंबिया का हाल ये है कि वहां पिछले 2 महीने में महंगाई करीब 33% बढ़ी है। फ्यूल सप्लाई में दिक्कत के कारण आम लोगों को पेट्रोल और गैस नहीं मिल पा रही है। कोलंबिया में खाने पीने की चीजें भी महंगी हो रही हैं। दुनिया महंगाई के ग्लोबल अटैक से बीच भारत महंगाई को काबू में रखने में काफी हद तक सफल रहा है। दुनिया के बड़े देशों में महंगाई दर और भारत की महंगाई क्या है आपको बताते हैं।

  • भारत में महंगाई दर - 7.41% (सितंबर)
  • ब्रिटेन- 10.1%
  • अमेरिका- 8.5%
  • कनाडा- 8.1%
  • स्पेन- 10.8%
  • तुर्की - 79.6%
  • ईरान- 54%
  • ब्राजील- 10.1%
महंगाई को काबू में रखने के लिए पीएम मोदी ने कई अहम फैसले लिए। दुनिया में जहां पेट्रोल-डीजल और गैस की कमी हो रही है उसके दाम बढ़ रहे हैं। भारत में महंगाई को काबू में रखने के लिए मोदी सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं-
  • मई 2022 के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं
  • मई में सरकार ने पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर Excise ड्यूटी कम की थी
  • विदेश से आने वाले जरूरी सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी को कम किया
  • प्लास्टिक, स्टील प्रोडक्ट्स के Raw मैटेरियल पर कस्टम ड्यूटी को कम किया
पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर बाकी जरूरी चीजों पर पड़ता है। सबके दाम बढ़ते हैं लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल काबू में हैं। और इसी के साथ खाद्य महंगाई के मामले में भी भारत की स्थिति बेहतर है। यानी खाद्य पदार्थों की महंगाई बाकी देशों से भारत में कम है।
  • भारत में खाद्य महंगाई दर 8.60% है
  • जिम्बाब्वे में खाद्य महंगाई 353% है
  • वेनेजुएला में 198% है
  • तुर्की में 89% है
  • ईरान में 84% है
  • श्रीलंका में 83% है
  • अर्जेंटीना में 71% है
देश में लोगों को राशन की कमी ना हो इसके लिए भी मोदी सरकार ने कई कदम उठाए जैसे
  • मई में सरकार ने गेहूं निर्यात को बैन किया, जिस से गेहूं की कीमत नहीं बढ़ी
  • जून में चीनी के निर्यात पर भी बैन लगाया, जिस से चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई
  • खाद्य तेल की कमी ना हो इसके लिए 20 लाख टन सोया और सूरजमुखी तेल आयात किया
  • खाद की कमी दूर करने के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपये जारी किए
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण महंगाई पूरी दुनिया में बढ़ी है, लेकिन भारत पर महंगाई का वो असर नहीं हो पाया जो दुनिया के बाकी देशों में हो रहा है। मोदी सरकार ना सिर्फ महंगाई से लड़ रही है बल्कि देश के किसान, गरीब औऱ कमजोर वर्ग के लोगों का ध्यान भी रख रही है।
  • मोदी सरकार ने रबी की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP 9% बढ़ाया
  • गेहूं, सरसों, मसूर की खेती करने वाले किसानों को फायदा होगा
  • उज्जवला योजना के तहत गैस सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी का ऐलान किया
  • देश के लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन योजना को जारी रखा
  • अंत्योदय योजना के तहत गरीब परिवारों को 35 किलो राशन प्रति माह सस्ती दर पर मिलता है
  • रेहड़ी-पटरी वालों को बिना गारंटी 10 हजार तक का लोन दिया जा रहा है
  • मोदी सरकार की योजनाओं के कारण भारत में गरीबी कम हुई है
  • 2011 में भारत में 22.5% अत्यंत गरीब लोग थे, जबकि 2019 में ये घटकर 10.2% हो गए।
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