Indian Students Death : दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके में सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन छात्रों की मौत ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और उसकी व्यवस्था कठघरे में हैं। हादसे के बाद हर बार की तरह इस बार भी स्थानीय प्रशासन एक्शन में है। राजनीति भी चल रही है। राजनीतिक दल इस हादसे के लिए एक दूसरे को कसूरवार ठहरा रहे हैं। राजधानी दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए देश भर से बच्चे आते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा राम भरोसे है।
दिल्ली में मौत की दुकान बन रहे कोचिंग सेंटर
कुछ दिनों पहले दिल्ली में करंट लगने से एक छात्र की मौत हो गई तो पिछले साल एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से छात्रों को बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी। कुल मिलाकर दिल्ली में छात्रों को परीक्षा तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर उनसे मोटी रकम तो वसूलते हैं लेकिन उन्हें सुविधाएं और सुरक्षा नहीं देते।
इन देशों में भारतीय छात्रों की जान गई
देश हो या विदेश भारतीय छात्रों की जिंदगी हर जगह खतरे में है। विदेशों की अगर बात करें तो बीते सालों में अलग-अलग देशों में अलग-अलग कारणों से 633 छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। भारतीय छात्रों की सबसे ज्यादा मौत 172 कनाडा में हुई है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने गत शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि बीते पांच सालों में विदेशों में भारतीय छात्रों पर हमले हुए। इन हमलों में कनाडा में 19 छात्रों और अमेरिका में छह छात्रों की जान गई। इन 633 मौतों में 108 छात्रों की मौत अमेरिका में, ब्रिटेन में 58, ऑस्ट्रेलिया में 57 और रूस में 37 छात्रों की मौत हुई। जबकि यूक्रेन में 18 छात्रों, जर्मनी में 24, जॉर्जिया, किर्गिस्तान और साइप्रस में 1212 और चीन में आठ छात्रों की मौत हुई।
गाइडलाइन को नहीं मान रहे कोचिंग सेंटर्स
दिल्ली में कई सारे ऐसे शैक्षिक कोचिंग सेंटर हैं जो कि सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं। मई में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम और दिल्ली विकास प्राधिकरण को आदेश दिया था कि वे निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानदंडों के उल्लंघन में संचालित होने वाले किसी भी कोचिंग सेंटर को तुरंत बंद कर दें।
क्या कहता है एनसीआरबी का आंकड़ा
वर्ष 2011 से 2021 के बीच भारत में आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में कहा गया है कि 2021 (आत्महत्या पर इसकी नवीनतम रिपोर्ट का वर्ष) में 13,089 छात्रों की आत्महत्या से मौत हो गई। यह 2011 में दर्ज हुए छात्रों की आत्महत्या के 7,696 मामलों से 70 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। 2011 के बाद से भारत में छात्रों द्वारा आत्महत्याओं की संख्या आम तौर पर हर साल बढ़ी है। 2021 में 1,673 मामलों में परीक्षा में विफलता को आत्महत्या का कारण बताया गया। इसमें से 991 पीड़ित पुरुष और 682 महिलाएं थीं. 2021 में इस कारण से आत्महत्या करने वालों में एनसीआरबी ने किसी भी ट्रांसजेंडर को नहीं पाया।
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