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Pahalgam Terror Attack: टाइम्स नाउ ने पहलगाम आतंकी हमले से दो दिन पहले ही सुरक्षा चिंता को लेकर उठाए थे सवाल

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे और कई लोग घायल हो गए। हमले से दो दिन पहले टाइम्स नाउ ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा संबंधी चिंता व्यक्त की थी।

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पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की हुई मौत (फाइल फोटो)

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे और कई लोग घायल हो गए। हमले से दो दिन पहले टाइम्स नाउ ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा संबंधी चिंता व्यक्त की थी।

गर्मियां आते ही नियंत्रण रेखा (LoC) के पास के दर्रों की बर्फ पिघलने लगती है जिसके चलते रास्ते सुगम हो जाते हैं। पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर अभी भी मौजूद हैं। सुरक्षाबलों के लिए मुख्य चिंता कश्मीर घाटी नहीं, बल्कि पाकिस्तान के साथ इंटरनेशनल बॉर्डर पर सांबा-कठुआ क्षेत्र हैं वहां से घुसपैठ होती है पिछले साल घुसपैठ की कई कोशिशें हुईं जिनमें से कुछ सफल रहीं, लेकिन इस साल सुरक्षाबल भाग्यशाली रहे जिन्होंने घुसपैठ की कई कोशिशों को विफल किया। जिनमें सुरक्षाबलों ने नागरिकों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे दो घुसपैठियों को, जबकि तीन को बाद में किश्तवाड़ में मार गिराया था।

घुसपैठ के रास्तों का पता लगाना जरूरी

केंद्र को इस बात की जानकारी है। सुरक्षाबलों ने कुछ दिन पहले उच्च-पदस्थ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन अब घुसपैठ के रास्तों का पता लगाना जरूरी है। क्या कोई सुरंग है जिसका आतंकवादी इस्तेमाल कर रहे हैं? क्या कोई नाला है? आखिर वह कैसे घुसपैठ कर रहे हैं? और भविष्य में सुरक्षाकर्मी शायद उतने भाग्यशाली न हों। ऐसे में यह चिंता का विषय है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि आतंकवादियों के पास पर्याप्त सैन्य और रसद सहायता उपलब्ध है जिनमें कार, हथियार इत्यादि शामिल है।

घुसपैठ को कैसे किया जाए कम?

3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होने वाली है, जो 8 अगस्त तक चलने वाली है। ऐसे में यह पता लगाना बहुत जरूरी है कि यात्रा शुरू होने से पहले घुसपैठ की कोशिशों को कैसे कम से कम किया जाए।

सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF), अर्धसैनिक बल और पुलिस सहित तमाम सुरक्षाबल पहले से ही इस पर काम कर रहे हैं। इंटरनेशनल बॉर्डर से लगा हुआ वह हिस्सा जहां से घुसपैठ की कोशिशें ज्यादा होती हैं उसे खोजने पर सारा है। चाहे उसके लिए ज्यादा से ज्याद गश्त या निगरानी सहित इत्यादि रास्तों का इस्तेमाल किया जाए ताकि जितनी जल्दी हो सके आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

Srinjoy Chowdhury
Srinjoy Chowdhuryauthor

The writer is national affairs editor, Times Now

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