बिहार के सभी 12 दलों के अध्यक्षों को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने का आदेश, जानिए SIR पर आदेश की 10 बड़ी बातें
- Agency by: Agency
- Updated Aug 23, 2025, 12:53 PM IST
बिहार की मतदाता सूची को लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार बिहार के सभी राजनीतिक दलों को मतदाताओं के हित में SIR में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आदेश दिया है।
बिहार के सभी 12 दलों के अध्यक्षों को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने का आदेश, जानिए SIR पर आदेश की 10 बड़ी बातें
बिहार में चल रहे SIR से जुड़ी हुई सुनवाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश की कॉपी भी सामने आ गई है। आदेश में यह स्पष्ट लिखा है कि बिहार के सभी मान्यता प्राप्त 12 राजनीतिक दलों के अध्यक्ष या महासचिव को 8 सितंबर को होने वाली सुनवाई में पेश होना होगा। इस दौरान सभी दलों को स्टेटस रिपोर्ट फाइल करके यह भी बताना होगा कि अपने बूथ लेवल एजेंट के जरिए कितने मतदाताओं की मदद पहुंचाई। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में विस्तार से पढ़िए
1. बिहार के मान्यता प्राप्त 12 राजनीतिक दलों के पास 160000 बूथ लेवल एजेंट है। अगर हर एक एजेंट प्रतिदिन 10 नाम को वेरीफाई करें तो रोजाना का आंकड़ा 16 लाख हो जाता है। ऐसे में 65 लाख नाम की सूची का परीक्षण करने में 5 दिन ही लगेंगे। दावे और आपत्ति दाखिल करने में 9 दिन बाकी है। ऐसे में राजनीतिक दलों के सहयोग से योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकेंगे और अयोग्य मतदाताओं के नाम काटे जा सकेंगे।
2. चुनाव आयोग में जो जानकारी दी है उसके मुताबिक 84 हजार से ज्यादा लोगों ने ड्राफ्ट रोल में नाम जोड़े या काटे जाने को लेकर दावे और आपत्ति दाखिल किए हैं। वही 263000 नए मतदाताओं ने जिन्होंने 18 साल हाल में ही पूरे किए हैं अपना नाम मतदाता सूची में जोड़े जाने के लिए आवेदन दिया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि राजनीतिक दलों को भी योग्य और अयोग्य मतदाताओं के नाम 1 सितम्बर की कट ऑफ डेट के अंदर जोड़े-काटे जाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
3. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में हैरानी जताते हुए कहा है कि सारे राजनीतिक दल मिलकर अभी तक पूरे बिहार में सिर्फ दो ही दावे और आपत्ति दाखिल कर सके हैं।हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात का भी जिक्र किया है कि वह राजनीतिक दल जिन्होंने याचिका दाखिल की है उनके बूथ लेवल एजेंट को आपत्ति दाखिल करने से रोका जा रहा है।
4. कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को अपने बिहार के प्रदेश अध्यक्षों को ये निर्देश देने का आदेश दिया है कि पार्टी के सभी बूथ लेवल एजेंट हर गांव/ब्लॉक/पंचायत/विधानसभा क्षेत्र के साथ ही बाढ़ राहत शिविरों में जाकर लोगों की मदद करें। बूथ लेवल एजेंट न सिर्फ फॉर्म भरने में सहयोग करें बल्कि 11 दस्तावेजों या फिर आधार कार्ड जुटाने में भी मदद करें।
5. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई का दायरा बढ़ाते हुए और मतदाताओं के हित को ध्यान में रखते हुए बिहार की सभी 12 राजनीतिक दलों को इस मामले में पक्षकार बना दिया है। अभी तक बिहार के सिर्फ तीन राजनीतिक दल जिसमें कांग्रेस, सीपीआईएमएल और राष्ट्रीय जनता दल ही सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार हैं।
6. बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वो सभी 12 राजनीतिक दलों के अध्यक्ष या महासचिवों को नोटिस जारी करें। इन सभी दलों के मुखिया को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश भी जारी किया गया है।
7. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को दोहराया है की वह मतदाता जिनके नाम मतदाता सूची में जुड़ने से रह गए हैं वह व्यक्तिगत या फिर बूथ लेवल एजेंट की मदद से ऑनलाइन माध्यम से भी आपत्ति या दावा दाखिल कर सकते हैं। यह जरूरी नहीं है कि ऑफलाइन ही फॉर्म भरे जाएं।
8. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के सभी 160000 बूथ लेवल एजेंट को यह आदेश दिया है कि वह लोग जो उन 65 लाख लोगों की सूची में शामिल है जिनके नाम गलती से ड्राफ्ट रोल में छूट गए हैं वह उनकी हर संभव मदद करें। यह वो मतदाता है जो मृत भी नहीं है और बिहार छोड़कर कहीं नहीं गए।
9. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया है कि वह सभी दावे और आपत्तियों से जुड़ी हुई पावतियां वेबसाइट पर प्रकाशित कर सकते हैं। भले ही उनके साथ यह विवरण ना हो कि किन दस्तावेजों के साथ यह फॉर्म भरे गए हैं।
10. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बिहार के मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।
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