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भारत में हर साल तंबाकू से 13.5 लाख लोगों की मौत, 40% पुरुषों में कैंसर की बड़ी वजह, बना Oral Cancer की राजधानी

Every Year 13.5 Lakh People Die From Tobacco In India: दुनियाभर में कैंसर की वजह से हार साल लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। आपको बता दें कि तंबाकू का सेवन या प्रयोग कैंसर के सबसे प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि भारत में हर साल तंबाकू की वजह से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। सिर्फ इतना ही नहीं, इसकी वजह से भारत ओरल कैंसर की राजधानी बन गया है। इसलिए हर साल 31 मई को तंबाकू के प्रयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' मनाया जाता है।

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Every Year 13.5 Lakh People Die From Tobacco In India

Every Year 13.5 Lakh People Die From Tobacco In India: हर साल 31 मई को 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' ( World No Tobacco Day) मनाया जाता है, लेकिन ये दिन सिर्फ एक तारीख नहीं है। तंबाकू आपकी सोच से अधिक सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। तंबाकू लोगों के शरीर, आवाज और चेहरे के साथ क्या कर सकता है, एक आम आदमी सोच भी नहीं सकता है। इसलिए हर साल लोगों के बीच तंबाकू के सेहत पर खतरनाक दुष्प्रभाव और जोखिमों के बारे जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है।

तंबाकू से हर साल देश में 13.5 लाख लोगों की मौत

फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में हेड और नेक सर्जरी विभाग सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर शिखर साहनी बताते हैं, कि रोज ऑपरेशन टेबल पर ऐसे मरीज आते हैं जिनके गले में ट्यूमर होता है, जबड़ा सड़ चुका होता है, और कुछ की तो आवाज ही चली जाती है। ये कोई दूर की बीमारी नहीं रही, ये अब हमारे आस-पास हो रही है। भारत में हर साल करीब 13.5 लाख लोग तंबाकू की वजह से मर जाते हैं, और यही वजह है कि हमें अब इससे जुड़े खतरों को समझना और दूसरों को समझाना जरूरी हो गया है।

Smoking Cause Cancer

Smoking Cause Cancer

भारत बना ओरल कैंसर की राजधानी

आपको जानकर हैरानी होगी कि आज भारत ओरल कैंसर यानी मुंह के कैंसर का गढ़ बन चुका है। इसका सबसे बड़ा कारण है गुटखा, खैनी, बीड़ी, पान मसाला जैसी चीजों का बढ़ता इस्तेमाल है। ये चीजें लोगों को इतनी सामान्य लगने लगी हैं कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं। लेकिन सच ये है कि यही छोटी-छोटी आदतें लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही हैं।

फिर भी सब कुछ खुलेआम बिकता है

तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से भारत में हर साल लगभग 13.5 लाख लोग जान गंवा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ये प्रोडक्ट्स आसानी से मिलते हैं, TV पर दिखते हैं, और दुकानों में बच्चों की पहुंच में रहते हैं। ग्लैमरस ऐड और सस्ती कीमतें लोगों को ये सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि "थोड़ा बहुत चलता है।" लेकिन यहीं से खतरा शुरू होता है।

पुरुषों में 40% कैंसर तंबाकू से जुड़ा

डॉ. शिखर साहनी के मुताबिक, भारत में पुरुषों मे कैंसर के जो केस सामने आते हैं, उनमें से करीब 40% सीधे तंबाकू से जुड़े होते हैं। वहीं, महिलाओं में भी यह प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है। यानी अगर आपने तंबाकू से दूरी बना ली, तो आपके कैंसर का खतरा लगभग आधा हो सकता है। महिलाओं में भी अब इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो और भी चिंता की बात है।

Major Cause Of Cancer In Men

Major Cause Of Cancer In Men

ऑपरेशन टेबल पर पहुंचने तक हो जाती है देर

डॉ. साहनी कहते हैं, "जब मरीज हमारे पास आते हैं, तब तक बहुत कुछ खत्म हो चुका होता है, उनके चेहरे की बनावट, बोलने की ताकत, खाना खाने की क्षमता, सब कुछ बदल चुका होता है।" ये इलाज से ज्यादा एक जंग होती है, और कई बार ये जंग शरीर हार चुका होता है। इसलिए इलाज से बेहतर है समय पर चेतावनी।

तंबाकू छोड़ना मुश्किल नहीं

डॉ. साहनी की मानें तो तंबाकू छोड़ने के दौरान शरीर में बदलाव आते हैं, लेकिन सही डाइट बहुत मदद कर सकती है। जैसे - हरी सब्जियां, फल, ओट्स, नींबू पानी, ग्रीन टी जैसी चीजें शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती हैं और तंबाकू की तलब भी कम करती हैं। धीरे-धीरे आदत बदलती है, पर शुरुआत करना जरूरी है।

डॉक्टर की क्या है सलाह

तंबाकू कोई शौक नहीं, ये जहर है। इसे छोड़ना कोई बहादुरी नहीं, बल्कि समझदारी है। डॉ. साहनी साफ कहते हैं - “ये कोई स्ट्रेस दूर करने वाली चीज नहीं, ये वो जहर है जो आपको अंदर से खत्म कर रहा है। आप खुद इसका टारगेट भी हैं और कैरियर भी।”

तो आज से ही सोचिए क्या आप अपनी जिंदगी को बचाना चाहते हैं या तंबाकू को जीने देना चाहते हैं? क्योंकि ऑपरेशन टेबल पर दूसरा मौका नहीं मिलता।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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