Delhi H1N1 Cases: दिल्ली में H1N1 इन्फ्लुएंजा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस साल अब तक शहर में 1,777 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या केवल 229 थी। एक दिन में 159 नए संक्रमण दर्ज किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने और अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। मामलों में हुई इस तेज वृद्धि के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक भी बुलाई है।
केस बढ़ने के साथ लोगों की चिंता भी बढ़ी है। मामूली बुखार, गले में दर्द या खांसी होते ही सवाल उठता है कि कहीं यह स्वाइन फ्लू तो नहीं? क्या तुरंत H1N1 टेस्ट कराना चाहिए? डॉक्टरों के अनुसार हर सर्दी-बुखार में जांच जरूरी नहीं होती। मरीज के लक्षण, उम्र, पहले से मौजूद बीमारी और संक्रमण की गंभीरता देखकर टेस्ट का फैसला किया जाता है।
क्या हर सर्दी-बुखार H1N1 है
डॉ. सुमित जैन (डायरेक्टर- इंटरनल मेडिसिन, पारस हेल्थ) का कहना है कि हर सर्दी-बुखार फ्लू नहीं होता है। दरअसल, मौसम बदलने और नमी बढ़ने पर कई तरह के वायरस सक्रिय हो सकते हैं। सामान्य वायरल बुखार, कोविड, H1N1 और दूसरे respiratory infections के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। फिर मानसून में डेंगू का खतरा भी बना रहता है।
H1N1 के लक्षणों पर बात करते हुए डॉ. सुमित जैन कहना है कि इसमें अक्सर अचानक तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द, शरीर में तेज दर्द, ठंड लगना और बहुत अधिक थकान महसूस हो सकती है। केवल इन लक्षणों के आधार पर संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती।
हल्के लक्षण वाले हर व्यक्ति को अपने स्तर पर जांच कराने की जरूरत नहीं है। इसके लिए पहले डॉक्टर से बात करना बेहतर रहता है। डॉक्टर लक्षणों और आसपास फैल रहे संक्रमण को देखकर तय कर सकते हैं कि आपके लिए स्वाइन फ्लू का टेस्ट आवश्यक है या नहीं।
H1N1 टेस्ट की जरूरत कब पड़ सकती है
डॉ. संजय महाजन (सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन एवं इंटेंसिविस्ट, कैलाश अस्पताल) का कहना है कि डॉक्टर H1N1 या influenza test कराने की सलाह इन स्थितियों में दे सकते हैं:
- जब बुखार और खांसी लगातार बढ़ रही हो
- सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द हो
- ऑक्सीजन लेवल सामान्य से नीचे जा रहा हो
- मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़े
- लक्षण ठीक होने के बाद दोबारा बिगड़ने लगें
- मरीज हाई-रिस्क श्रेणी में आता हो
- घर, स्कूल या कार्यस्थल पर H1N1 की पुष्टि वाला संपर्क हो
- डॉक्टर को इलाज तय करने के लिए संक्रमण की पहचान जरूरी लगे
बता दें कि H1N1 की जांच आमतौर पर नाक या गले से लिए गए सैंपल के माध्यम से की जाती है। कौन-सा टेस्ट कराया जाए, इसका निर्णय डॉक्टर और जांच केंद्र को करने दें।
बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं कब डॉक्टर से संपर्क करें
डॉ. संजय महाजन के अनुसार- छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में फ्लू कभी-कभी तेजी से गंभीर हो सकता है। इन लोगों को लक्षण बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
बच्चे को तेज सांस, पसलियों का अंदर खिंचना, पानी न पी पाना, पेशाब कम होना, अत्यधिक सुस्ती या होंठ नीले पड़ने की शिकायत हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। बहुत छोटे शिशु में बुखार को भी हल्के में न लें।
वहीं गर्भवती महिला को बुखार, खांसी या शरीर दर्द होने पर जल्दी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसी तरह 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग और अस्थमा, डायबिटीज, हृदय रोग, मोटापा या कमजोर इम्युनिटी वाले मरीज शुरुआत में ही सलाह लें।
H1N1, डेंगू और वायरल बुखार में अंतर
डॉ. सुमित जैन का कहना है कि इन तीनों ही तरह के बुखार के शुरुआती लक्षणों में समानता हो सकती है। लेकिन फिर भी कुछ संकेत अंतर समझने में मदद कर सकते हैं:
| बीमारी | आम शुरुआती लक्षण |
|---|---|
| H1N1 फ्लू | अचानक बुखार, सूखी खांसी, गले में दर्द, शरीर दर्द, ठंड और थकान |
| डेंगू | तेज बुखार, सिर और आंखों के पीछे दर्द, बदन दर्द, मतली और कभी-कभी चकत्ते |
| सामान्य वायरल बुखार | हल्का या तेज बुखार, नाक बहना, गले में खराश, कमजोरी या खांसी |
यह तालिका केवल शुरुआती जानकारी देती है। डेंगू में भी खांसी हो सकती है और H1N1 में हर मरीज को तेज बुखार हो, यह जरूरी नहीं। सही पहचान जांच और डॉक्टर के आकलन से ही होती है।
क्या H1N1 टेस्ट के बिना antiviral शुरू हो सकती है
बेशक कुछ स्थितियों में डॉक्टर टेस्ट रिपोर्ट आने से पहले भी antiviral दवा शुरू करने का निर्णय ले सकते हैं। डॉ. संजय महाजन के अनुसार- खासकर जब मरीज अस्पताल में भर्ती हो, बीमारी गंभीर होती जा रही हो या वह हाई-रिस्क श्रेणी में आता हो, तो टेस्ट से पहले भी दवाइयां शुरू की जा सकती हैं। इन्फ्लुएंजा का इलाज शुरू करने के लिए हर बार लैब से पुष्टि जरूरी नहीं होती और गंभीर मरीज में रिपोर्ट की प्रतीक्षा से इलाज में देरी नहीं की जानी चाहिए।
हालांकि डॉ. संजय महाजन का यह भी कहना है कि इसका अर्थ यह नहीं कि बुखार होते ही आप खुद से कोई भी antiviral दवा ले लें। दवा की जरूरत, खुराक और अवधि - मरीज की उम्र, वजन, किडनी की स्थिति तथा बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है। एंटीबायोटिक भी H1N1 वायरस का इलाज नहीं करती। इसे केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
टेस्ट रिपोर्ट आने तक घर पर क्या करें
रिपोर्ट का इंतजार करते हुए मरीज को दूसरों से दूरी रखनी चाहिए। डॉ. सुमित जैन सलाह देते हैं कि इंफेक्शन होने पर बाहर जाना, ऑफिस या स्कूल जाना बंद करें। संभव हो तो अलग और हवादार कमरे में रहें। इसके अलावा, ये स्टेप भी फ्लू की रोकथाम में मदद करते हैं -
- खांसते या छींकते समय मुंह ढकें
- मरीज और देखभाल करने वाला व्यक्ति मास्क पहनें
- हाथ साबुन से नियमित धोएं
- तौलिया, बोतल और बर्तन साझा न करें
- दरवाजे के हैंडल और मोबाइल जैसी सतहें साफ रखें
- पर्याप्त पानी लें और आराम करें
- बुखार, सांस और ऑक्सीजन लेवल पर नजर रखें
घर में बुजुर्ग, गर्भवती महिला, छोटा बच्चा या गंभीर बीमारी वाला व्यक्ति हो तो मरीज से उसका संपर्क कम रखें।
इन संकेतों में जांच से पहले इलाज जरूरी
दोनों ही डॉक्टर्स इस बात पर जोर देते हैं कि बहुत तेज सांस, सीने में दर्द, भ्रम, बेहोशी, होंठ नीले पड़ना, लगातार गिरता ऑक्सीजन लेवल या बुखार ठीक होकर फिर लौटना - गंभीर इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में पहले अस्पताल पहुंचें। टेस्ट कहां और कब होगा, यह मेडिकल टीम तय कर लेगी।
दिल्ली में बढ़ते H1N1 मामलों के बीच सतर्क रहना जरूरी है, लेकिन हर बुखार को स्वाइन फ्लू मानकर घबराना नहीं। हल्के लक्षणों में डॉक्टर की सलाह लें। हाई-रिस्क मरीज या बिगड़ते लक्षणों में जांच और इलाज में देरी न करें।
