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स्पाइन एजिंग: 20-25 की उम्र में ही क्यों झुक रही है युवाओं की रीढ़ की हड्डी?

समय रहते Spine Ageing इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर स्लिप डिस्क, सर्वाइकल और क्रॉनिक बैक पेन जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है।

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20-30 साल के युवाओं में क्यों बढ़ रही है स्पाइन एजिंग की समस्याएं (Photo: iStock)

आंकड़े बताते हैं कि आजकल 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं में कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टर्स मानते हैं कि जो बीमारियां पहले 50 या 60 की उम्र में देखने को मिलती थीं, वे अब वर्क फ्रॉम होम, लंबे सिटिंग आवर्स और खराब जीवनशैली के कारण युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं।

चिकित्सा की भाषा में इसे 'स्पाइन एजिंग' या समय से पहले रीढ़ की हड्डी का बूढ़ा होना कहा जाता है। समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर स्लिप डिस्क, सर्वाइकल और क्रॉनिक बैक पेन जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है।

युवाओं में क्यों बढ़ रही है स्पाइन एजिंग?

खराब पोस्चर और टेक्स्ट नेक सिंड्रोम

स्मार्टफोन का लगातार इस्तेमाल करते समय गर्दन को नीचे झुकाकर रखने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे 'टेक्स्ट नेक' कहा जाता है, जो समय से पहले रीढ़ के कार्टिलेज को घिसने लगता है।

लगातार बैठकर काम करना

लैपटॉप या डेस्क पर बिना ब्रेक लिए घंटों एक ही पोजीशन में बैठे रहने से कमर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है। इससे रीढ़ की डिस्क में लचीलापन कम होने लगता है।

न्यूट्रिशन की कमी

विटामिन D3 और कैल्शियम की कमी युवाओं की हड्डियों को अंदर से कमजोर बना रही है। धूप की कमी और असंतुलित खान-पान से डिस्क की रीहाइड्रेशन क्षमता कम हो जाती है।

व्यायाम की कमी और मोटापा

शारीरिक गतिविधि न होने से कोर मसल्स (पेट और पीठ की मांसपेशियां) कमजोर हो जाती हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता।

स्पाइन एजिंग से बचाव के 5 आसान तरीके

20-20-20 का नियम अपनाएं: काम के दौरान हर 30 से 45 मिनट में ब्रेक लें और कम से कम 2 से 3 मिनट के लिए टहलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें।

सही पोस्चर का ध्यान रखें: लैपटॉप या स्क्रीन को हमेशा आंख के स्तर पर रखें। बैठते समय पीठ को सीधा रखें और सपोर्टिव चेयर का इस्तेमाल करें।

कोर स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज करें: प्लैंक, भुजंगासन और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें ताकि रीढ़ की हड्डी को मजबूती मिले।

डाइट में लाएं सुधार: विटामिन D और कैल्शियम से भरपूर आहार लें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं ताकि रीढ़ की डिस्क में नमी बनी रहे।

भारी सामान उठाते समय सावधानी: भारी चीजें उठाते समय कमर से झुकने के बजाय घुटनों को मोड़कर वजन उठाएं।

इन सबके इतर उम्र चाहे जो भी हो कमर दर्द को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव, नियमित वर्कआउट और सही पोस्चर अपनाकर आप अपनी रीढ़ की हड्डी को सालों-साल मजबूत और यंग बनाए रख सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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