कभी किसी से बात करते हुए अचानक ऐसा होता है कि शब्द पता है, लेकिन जुबान पर नहीं आ रहा। सामने वाले का चेहरा याद है, उससे पहली मुलाकात कहां हुई थी यह भी याद है और कई बार नाम का पहला अक्षर तक दिमाग में घूम रहा होता है। फिर भी पूरा नाम नहीं निकलता। कुछ मिनट बाद, जब आप उस बात को छोड़ चुके होते हैं, वही शब्द अचानक याद आ जाता है। कई लोगों को ऐसा होने पर लगने लगता है कि, उनको याददाश्त की दिक्कत हो रही है।
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लेकिन मेडिकल की भाषा में इस स्थिति को ‘टिप ऑफ द टंग’ (Tip of the Tongue) कहा जाता है। जो आमतौर पर याददाश्त मिटने की समस्या नहीं होती, बल्कि दिमाग को सही शब्द तक पहुंचने में हुई थोड़ी देर होती है। यहां पढ़ें टिप ऑफ द टंग क्या है और दिमाग पर इसका क्या असर पड़ता है।
दिमाग में ऐसा क्यों होता है?
जब हम कुछ बोलते हैं तो हमारा दिमाग एक साथ कई काम करता है। पहले वह समझता है कि हमें क्या कहना है, फिर उस बात के लिए सही शब्द ढूंढता है और आखिर में उसे बोलने का तरीका याद करता है। लेकिन कभी-कभी बात और उसका मतलब दिमाग में साफ होता है, बस सही शब्द तुरंत याद नहीं आता। ऐसा लगता है जैसे शब्द जुबान तक आकर रुक गया हो।
इस दौरान आपको उस शब्द से जुड़ी छोटी-छोटी बातें याद रह सकती हैं। जैसे नाम किस अक्षर से शुरू होता है, शब्द छोटा है या लंबा, या वह किसी दूसरे शब्द जैसा सुनाई देता है। यानी जानकारी दिमाग में मौजूद होती है, बस उसे पूरा शब्द बनाकर बोलने में थोड़ी देर लग रही होती है।
ये हो सकती हैं वजहें
फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की न्यूरोलॉजी - कंसल्टेंट डॉ. स्वरूपा बंसोडे, के अनुसार नींद की कमी, तनाव, ध्यान भटकना और एक साथ कई काम करना शब्द याद करने की गति को प्रभावित कर सकता है। कम इस्तेमाल होने वाले नाम, तकनीकी शब्द या किसी व्यक्ति का नाम याद करते समय यह ज्यादा महसूस हो सकता है। कभी-कभार किसी शब्द या नाम को याद करने में समय लगना अपने आप में मेमोरी लॉस का संकेत नहीं है। चिंता तब ज्यादा जरूरी है जब यह समस्या लगातार बढ़ने लगे।उम्र के साथ भी बढ़ सकती है परेशानी
उम्र बढ़ने पर शब्दों को तुरंत याद करने की प्रोसेस थोड़ी धीमी हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति का ज्ञान या शब्दावली कम हो गई है। कई बार जानकारी पूरी तरह मौजूद होती है, लेकिन उसे बोलने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है।
ऐसे में सझमना जरूरी है कि, अगर कभी-कभार कोई नाम या शब्द याद न आए और कुछ देर बाद याद हो जाए, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर शब्द खोजने में परेशानी बार-बार होने लगे, लगातार बढ़े या रोजमर्रा की बातचीत प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
