How to get rid of constipation, कब्ज के लिए घरेलू उपाय: कब्ज ऐसी परेशानी है जिसे लोग अक्सर छोटी बात समझकर टाल देते हैं, लेकिन जब कई दिनों तक पेट ठीक से साफ न हो, मल सख्त हो या शौच के दौरान जोर लगाना पड़े, तो रोजमर्रा की जिंदगी भी असहज लगने लगती है। अच्छी बात यह है कि खान-पान और दिनचर्या में कुछ आसान बदलाव इस समस्या से राहत पाने में मदद कर सकते हैं।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - जुबान पर आता है शब्द, फिर भी बोल नहीं पाते? जानें ये Memory Loss का संकेत है या कुछ और
द योगा इंस्टीट्युट की डॉ. हंसाजी योगेंद्र ने कब्ज से राहत के लिए लाइफस्टाइल से जुड़े छोटे-मोटे उपायों को अहम बताया है। अगर आपको भी कब्ज या पेट से जुड़ी कोई दिक्कत है, तो डॉ हंसाजी की टिप्स आपके बहुत काम आ सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में कब्ज का कारण अलग हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना भी जरूरी है।
कब्ज क्या होता है
कब्ज की स्थिति में मल सामान्य से ज्यादा सख्त या सूखा हो सकता है और उसे बाहर निकालने में परेशानी होती है। कुछ लोगों को कई दिनों तक पेट साफ न होने की शिकायत रहती है, जबकि कुछ को शौच के दौरान ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। कब्ज कभी-कभार हो तो खान-पान और दिनचर्या में बदलाव मददगार हो सकते हैं।
1. सुबह पानी से करें दिन की शुरुआत
डॉ. हंसाजी योगेंद्र के बताए तरीकों में पानी को खास जगह दी गई है। सुबह उठने के बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत बनाई जा सकती है। दिनभर भी शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।
वीडियो में नींबू, शहद, काली मिर्च और हल्दी मिलाकर पानी पीने का भी सुझाव दिया गया है। हालांकि, इसे कब्ज का इलाज मानने के बजाय एक घरेलू पेय की तरह लेना बेहतर है। हर व्यक्ति के लिए यह मिश्रण जरूरी या उपयुक्त हो, ऐसा नहीं है।
2. पेट को आराम नहीं, थोड़ी एक्टिविटी चाहिए
अगर दिन का ज्यादातर समय कुर्सी या बिस्तर पर बीतता है, तो शरीर को थोड़ा चलाने की जरूरत है। डॉ. हंसाजी के अनुसार पैदल चलना कब्ज की समस्या में मदद कर सकता है।
इसके लिए किसी कठिन व्यायाम की जरूरत नहीं। रोज थोड़ी देर आराम से चलना, सीढ़ियां लेना या लंबे समय तक बैठे रहने के बीच उठकर घूमना भी दिनचर्या को ज्यादा सक्रिय बना सकता है।
3. खाने में फाइबर बढ़ाएं
कब्ज से राहत के लिए भोजन में फाइबर शामिल करना एक अहम कदम है। गेहूं का चोकर, साबुत अनाज और कई सब्जियां अघुलनशील फाइबर देते हैं, जबकि जौ, दालें, बीन्स, मटर, बीज, नट्स और कई फल घुलनशील फाइबर के स्रोत हैं।
फाइबर आंतों में पानी को बनाए रखने और मल को नरम बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना और साथ में पर्याप्त पानी पीना बेहतर रहता है।
कब्ज से निपटने के लिए किसी एक जादुई उपाय पर निर्भर रहने के बजाय पूरी दिनचर्या पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। हालांकि अगर कब्ज बार-बार हो रही है या इसके साथ तेज दर्द, उल्टी, मल में खून, बुखार या बिना वजह वजन कम होने जैसे लक्षण हैं, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
