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रेटाट्रुटाइड क्या है, क्यों कहा जा रहा है इसे नेक्स्ट जेनरेशन वेट लॉस ड्रग, कैसे है ओज़ेम्पिक और माउनजारो से आगे

What is retatrutide weight loss drug: रेटाट्रुटाइड (Retatrutide) को मोटापे के इलाज में अगली बड़ी वैज्ञानिक क्रांति माना जा रहा है। ट्रिपल हार्मोन टेक्नोलॉजी पर आधारित यह दवा GLP-1, GIP और ग्लूकागॉन - तीनों पर एक साथ काम करती है। फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल में 20–24% तक वजन घटने के संकेत मिले हैं, जो दवाओं के जरिए हासिल परिणामों में बेहद अहम माने जा रहे हैं। यदि 2028 तक इसे मंजूरी मिलती है, तो यह Ozempic और Mounjaro के बाद वेट लॉस ट्रीटमेंट को नई दिशा दे सकती है। जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं और क्या यह सच में वेट लॉस 3.0 है।

रेटाट्रुटाइड नेक्स्ट जेनरेशन वेट लॉस ड्रग

रेटाट्रुटाइड नेक्स्ट जेनरेशन वेट लॉस ड्रग

What is retatrutide weight loss drug: पिछले कुछ सालों में वजन घटाने की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Ozempic और Mounjaro जैसे इंजेक्शनों ने मोटापे के इलाज को मेडिकल साइंस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब चर्चा है एक नई दवा - रेटाट्रुटाइड (Retatrutide) की। यह फिलहाल फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल में है, लेकिन शुरुआती नतीजों ने इसे 'वेट लॉस 3.0' का नाम दिला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आगे के ट्रायल सफल रहते हैं, तो 2028 तक यह मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।

क्या है ट्रिपल हार्मोन टेक्नोलॉजी?

अब तक की लोकप्रिय दवाएं अलग-अलग हार्मोन पर काम करती रही हैं। Ozempic और वेगोवी (Wegovy) GLP-1 हार्मोन को टार्गेट करती हैं, जबकि Mounjaro GLP-1 और GIP - दोनों पर असर डालती है। रेटाट्रुटाइड इससे एक कदम आगे बढ़ती है। यह तीन हार्मोन:

GLP-1

GIP

ग्लूकागॉन

एक साथ काम करते हैं। इसी वजह से इसे ‘ट्रिपल हार्मोन टेक्नोलॉजी’ कहा जा रहा है।

सरल भाषा में समझें तो यह दवा -

  • भूख कम करती है
  • जल्दी पेट भरने का संकेत देती है
  • शरीर की ऊर्जा खर्च करने की क्षमता बढ़ाती है
  • ब्लड शुगर और फैट मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाती है

यानी यह सिर्फ कैलोरी कम करने तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे मेटाबॉलिक सिस्टम को सक्रिय रूप से प्रभावित करती है।

फेज-2 ट्रायल में क्या मिले संकेत?

पब्लिक डोमेन में उपलब्ध फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों के अनुसार, कुछ प्रतिभागियों में लगभग 20–24% तक वजन घटने की रिपोर्ट सामने आई है। मोटापे के इलाज में दवाओं के जरिए इतना वजन कम होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फेज-3 ट्रायल भी सकारात्मक रहते हैं, तो यह दवा मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज़ मैनेजमेंट का तरीका बदल सकती है। हालांकि अंतिम मंजूरी संबंधित नियामक संस्थाओं के फैसले पर निर्भर करेगी।

भारत में बढ़ती मांग और मौजूदा इलाज

भारत में फिलहाल रेटाट्रुटाइड उपलब्ध नहीं है। लेकिन Ozempic और Mounjaro जैसे इंजेक्शनों की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर मुंबई और ठाणे जैसे महानगरों में।

कई क्लीनिक्स में रोज नए मरीज परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। वर्तमान में वेट लॉस इंजेक्शन ट्रीटमेंट की लागत लगभग 20,000 से 50,000 रुपये प्रति माह (चार इंजेक्शन) तक हो सकती है। यह इलाज पूरी तरह डॉक्टर की निगरानी में दिया जाता है और नियमित मॉनिटरिंग जरूरी होती है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

मुंबई के जाने-माने वेट लॉस विशेषज्ञ Dr. Amit Karkhanis के अनुसार, मोटापे को देखने का नजरिया अब बदल चुका है। उनका कहना है - 'मोटापा सिर्फ कॉस्मेटिक समस्या नहीं, बल्कि एक क्रॉनिक मेटाबॉलिक डिज़ीज़ है। GLP-1 और ड्यूल एगोनिस्ट इंजेक्शन से हमने कई मरीजों में 15–20% तक सुरक्षित वजन घटते देखा है। साथ ही शुगर लेवल, ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर में भी सुधार होता है।'

वे यह भी जोड़ते हैं कि रेटाट्रुटाइड जैसी ट्रिपल-हार्मोन थेरेपी भविष्य में गेम-चेंजर हो सकती है। लेकिन सही मरीज का चयन, नियमित जांच और लाइफस्टाइल बदलाव उतने ही जरूरी हैं जितनी खुद दवा।

क्या यह जादुई समाधान है?

विशेषज्ञ साफ कहते हैं - कोई भी इंजेक्शन या दवा मैजिक बुलेट नहीं है।

संतुलित आहार

नियमित व्यायाम

पर्याप्त नींद

लगातार मेडिकल फॉलो-अप

इनके बिना लंबे समय तक वजन नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है।

सोशल मीडिया पर इन इंजेक्शनों को लेकर कई भ्रांतियां भी फैलती रहती हैं। लेकिन सही मरीजों में, योग्य डॉक्टर की निगरानी में दिया गया इलाज प्रभावी और सुरक्षित साबित हो सकता है।

क्या 2028 तक बदलेगा खेल

रेटाट्रुटाइड को मोटापे के इलाज में अगली बड़ी वैज्ञानिक छलांग माना जा रहा है। यदि 2028 तक इसे नियामक मंजूरी मिलती है, तो यह Ozempic और Mounjaro के बाद हेल्थकेयर सेक्टर में नई क्रांति की शुरुआत कर सकती है।

फिलहाल मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता यही है - केवल मंजूरशुदा दवाओं का उपयोग करें और वह भी विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में। विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अभी भी शोध और रेगुलेटरी अप्रूवल पर टिका है। आने वाले साल वेट लॉस ट्रीटमेंट की दुनिया में बड़ी खबरें ला सकते हैं।

Rakesh Kamal Trivedi
Rakesh Kamal Trivedi author

20 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ टीवी पत्रकारिता में सक्रिय, वर्तमान में TIMES NOW नवभारत में न्यूज़ एडिटर। क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म में म... और देखें

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