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टर्म प्लान लेने के दूसरे ही दिन हो जाए अनहोनी तो क्या मिलेगा क्लेम?

टर्म इंश्योरेंस लेने के तुरंत बाद या दूसरे ही दिन अगर पॉलिसीधारक की मौत या मर्डर हो जाए, तो क्या नॉमिनी को बीमा की पूरी रकम मिलेगी? आइए जानते हैं...

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टर्म प्लान लेने के दूसरे ही दिन हो जाए अनहोनी तो क्या मिलेगा क्लेम?

टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) लेते समय अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि पॉलिसी शुरू होने के तुरंत बाद जैसे दूसरे या तीसरे ही दिन पॉलिसीधारक के साथ कोई अनहोनी हो जाए या उसकी मौत हो जाए, तो क्या इंश्योरेंस कंपनी नॉमिनी को क्लेम की रकम देगी? बीमा नियमों के अनुसार, इसका सीधा जवाब है हां, नॉमिनी को क्लेम की पूरी रकम मिलती है, लेकिन इसके लिए कुछ खास शर्तें और स्थितियां लागू होती हैं।

बीमा नियमों के तहत, जैसे ही आपकी पॉलिसी मंजूर (Underwritten and Issued) हो जाती है और पहली प्रीमियम की रसीद कट जाती है, बीमा कवर उसी समय से लागू माना जाता है। अगर पॉलिसी एक्टिव होने के दूसरे ही दिन प्राकृतिक कारणों से, एक्सीडेंट में या अचानक बीमारी के कारण पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तो इंश्योरेंस कंपनी को पूरा 'सम एश्योर्ड' (Sum Assured) नॉमिनी को देना होता है। बीमा में कोई वेटिंग पीरियड (Waiting Period) प्राकृतिक या आकस्मिक मौतों पर लागू नहीं होता।

कब नहीं मिलता है टर्म प्लान का पैसा?

हालांकि, मर्डर (हत्या) या संदिग्ध स्थिति में हुई मौत के मामले में प्रक्रिया थोड़ी अलग होती है। यदि पॉलिसीधारक का मर्डर हो जाता है, तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम पास करने से पहले पुलिस जांच और एफआईआर (FIR) की रिपोर्ट का इंतजार करती है। अगर पुलिस जांच में यह साबित हो जाता है कि मर्डर में नॉमिनी का ही हाथ था, तो बीमा कंपनी क्लेम की राशि रोक देती है या खारिज कर देती है। लेकिन, अगर मर्डर में नॉमिनी का कोई हाथ नहीं है और वह केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, तो जांच पूरी होने के बाद नॉमिनी को क्लेम की पूरी रकम दी जाती है।

यहां एक सबसे महत्वपूर्ण नियम आत्महत्या (Suicide) से जुड़ा है। यदि पॉलिसीधारक पॉलिसी लेने के तुरंत बाद या एक साल (12 महीने) के भीतर आत्महत्या करता है, तो बीमा कंपनी कोई डेथ क्लेम नहीं देती। हालांकि, कुछ कंपनियां पहले साल में आत्महत्या के मामले में जमा किए गए प्रीमियम का 80% तक हिस्सा वापस कर देती हैं। एक साल की अवधि पूरी होने के बाद ही सुसाइड कवर लागू होता है।

क्या है अर्ली क्लेम?

पॉलिसी लेने के तुरंत बाद (शुरुआती 2-3 वर्षों में) हुए किसी भी क्लेम को इंश्योरेंस की भाषा में 'अर्ली क्लेम' (Early Claim) कहा जाता है। अर्ली क्लेम के मामलों में बीमा कंपनियां काफी सख्ती से जांच करती हैं। वे यह सुनिश्चित करती हैं कि पॉलिसी लेते समय ग्राहक ने अपनी किसी पुरानी गंभीर बीमारी, मेडिकल हिस्ट्री या व्यक्तिगत जानकारी को छुपाया तो नहीं था। यदि पॉलिसी लेते समय कोई गलत जानकारी नहीं दी गई है और सभी दस्तावेज सही हैं, तो कंपनी को कानूनन क्लेम का भुगतान करना ही पड़ता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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