Gut Health Tips: कई बार पेट से जुड़ी परेशानी सिर्फ खाने-पीने की वजह से नहीं होती। पेट में गैस, एसिडिटी, पेट फूलना या बार-बार होने वाली बेचैनी के पीछे तनाव और मानसिक दबाव भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पलानीअप्पन मणिकम (Dr. Palaniappan Manickam) जो यूट्यूब पर Dr. Pal के नाम से फेमस हैं ने अपने यूट्यूब वीडियो में इस मुद्दे पर खुलकर बातचीत की है।
Dr Pal ने अपने वीडियो में बताया कि रोजमर्रा की जिंदगी में आभार यानी अपनी जिंदगी की अच्छी चीजों और लोगों के प्रति कृतज्ञता महसूस करना भी तनाव को संभालने में मदद कर सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ कुछ सकारात्मक बातें सोच लेने से पेट की हर समस्या ठीक हो जाएगी। असल बात यह है कि जब शरीर और दिमाग को सुरक्षा और सुकून का एहसास होता है, तो तनाव से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं।
दिमाग और पेट का क्या है कनेक्शन?
हम अक्सर पेट की समस्या को सिर्फ खान-पान से जोड़कर देखते हैं, लेकिन दिमाग का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो शरीर लगातार सतर्क रहने की स्थिति में पहुंच सकता है। इसका असर पाचन पर भी पड़ सकता है।
Dr Pal बताते हैं कि तनाव के दौरान कुछ लोगों में एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। आंतों की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं और पेट से जुड़ी शिकायतें ज्यादा महसूस हो सकती हैं। यही वजह है कि कई बार जांच सामान्य आने के बावजूद व्यक्ति को पेट से जुड़ी वास्तविक परेशानी महसूस होती रहती है।
तनाव में क्यों बिगड़ सकता है पाचन?
जब दिमाग को लगातार खतरे या दबाव का एहसास होता है, तो शरीर अपनी ऊर्जा जरूरी कामों की तरफ लगाने लगता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर पाचन, आराम और शरीर की सामान्य संतुलन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसीलिए तनाव कम करना केवल मानसिक सुकून के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि यह पूरी सेहत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, किसी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली पेट की समस्या में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
आभार महसूस करना कैसे मदद कर सकता है?
Dr Pal के अनुसार, आभार का मतलब केवल रात में बैठकर पांच चीजें लिखना नहीं है, जिनके लिए आप खुद को भाग्यशाली मानते हैं। ज्यादा जरूरी यह है कि आप किसी ऐसे अनुभव को याद करें, जिसमें आपको किसी व्यक्ति से सच्ची मदद, प्यार या सहयोग मिला हो।
मसलन, मुश्किल समय में किसी दोस्त ने आपका साथ दिया हो, परिवार के किसी सदस्य ने आपकी मदद की हो या किसी अनजान व्यक्ति ने आपके लिए कुछ अच्छा किया हो। ऐसे अनुभव को कुछ देर शांति से याद करने से मन को सकारात्मक और सुरक्षित एहसास मिल सकता है।
जबरदस्ती सकारात्मक सोचने की जरूरत नहीं
यहां एक बात समझना जरूरी है कि आभार का मतलब अपनी परेशानियों को नजरअंदाज करना नहीं है। अगर आप तनाव में हैं, तो खुद से जबरदस्ती यह कहना कि सब कुछ बहुत अच्छा है, हमेशा मददगार नहीं होता।
Dr Pal इस बात पर जोर देते हैं कि आभार तभी ज्यादा मायने रखता है, जब वह अंदर से महसूस हो। आपको अपनी परेशानी को छिपाने या नकारने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय आप मुश्किलों के बीच किसी एक ऐसे अनुभव को याद कर सकते हैं, जिसने आपको सहारा या अपनापन दिया हो।
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आभार का आसान तरीका क्या है?
इसके लिए किसी लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। कुछ मिनट शांत बैठें और किसी ऐसे अनुभव को याद करें, जिसमें आपको किसी ने समझा, संभाला या आपकी मदद की। अपने मन में तीन बातें दोहरा सकते हैं-वह परिस्थिति क्या थी, आपको किस तरह का सहयोग मिला और उस मदद से क्या बदला। इसके बाद उस अनुभव से जुड़े सुकून और अपनापन को महसूस करने की कोशिश करें। इसे रोज करना जरूरी नहीं है। हफ्ते में कुछ बार भी कुछ मिनट इसके लिए निकालना एक आसान शुरुआत हो सकती है।
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शरीर को सुकून मिलने पर क्या होता है?
जब तनाव थोड़ा कम होता है, तो शरीर ज्यादा शांत अवस्था में आ सकता है। सांस सामान्य हो सकती है, मांसपेशियों में तनाव कम महसूस हो सकता है और मन कुछ हल्का लग सकता है। यही वजह है कि तनाव को संभालने वाली आदतें पाचन से जुड़ी परेशानियों को संभालने में भी मदद कर सकती हैं। हालांकि, आभार को किसी बीमारी का इलाज या चमत्कारी उपाय नहीं मानना चाहिए। यह तनाव प्रबंधन और बेहतर जीवनशैली का एक हिस्सा हो सकता है।
