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मिशन, विजन और एजेंडा: लाल किले से PM मोदी ने बताया क्या है देश को आगे ले जाने का फॉर्मूला

तकनीक, प्रौद्योगिकी में दुर्लभ खनिज तत्वों और विकास में ईंधन की भूमिका का उल्लेख करते हुए पीएम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ईंधन की खोज पर है। समुद्र में ईंधन की खोज के लिए सरकार 'समुद्र मंथन' योजना पर काम कर रही है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। तस्वीर-PIB
Written by: Alok Rao
Updated Aug 15, 2026, 13:26 IST
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PM Modi Viksit Bharat Vision: लाल किले की प्राचीर से अपने 13वें संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विकसित भारत के लिए एक विजन, मिशन और रोडमैप रखा। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बीते 12 सालों में देश में हुई तरक्की एवं भविष्य की चुनौतियों का जिक्र तो किया ही, 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने 'सप्त धारा' सात क्षेत्रों का उल्लेख किया जिनमें भारत को काम करने की जरूरत है। युद्ध एवं वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान पर जोर दिया और कहा कि भारत अब दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकता, उसे खुद अपने दम पर आगे बढ़ना होगा। तकनीक, प्रौद्योगिकी में दुर्लभ खनिज तत्वों और विकास में ईंधन की भूमिका का उल्लेख करते हुए पीएम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ईंधन की खोज पर है। समुद्र में ईंधन की खोज के लिए सरकार 'समुद्र मंथन' योजना पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 'सुदर्शन चक्र' रक्षा प्रणाली के बारे में भी बताया।

युवाओं पर फोकस

प्रधानमंत्री के भाषण में की गई नई घोषणाओं का एक बड़ा हिस्सा युवाओं पर केंद्रित रहा। उन्होंने युवाओं को विकसित भारत परियोजना का सबसे बड़ा लाभार्थी और उसका प्रमुख चालक बताया। उन्होंने कहा, 'जब मैं विकसित भारत की बात कर रहा हूं और देश को तेज गति से आगे ले जाने की बात कर रहा हूं, तो इसका सबसे अधिक लाभ किसे मिलेगा? युवाओं को।' स्टार्टअप इंडिया के तहत 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप और 1 लाख करोड़ रुपये के इनोवेशन फंड का उल्लेख करते हुए मोदी ने युवाओं से कहा कि वे अपने सपने लेकर सरकार के पास आएं, संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, देशभर में मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, ताकि निजी कोचिंग पर निर्भर मध्यमवर्गीय परिवारों का आर्थिक बोझ कम हो। सरकार 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के बीच प्रतिभा खोज अभियान भी चलाएगी, ताकि 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत को मजबूत दावेदार बनाया जा सके।

आत्मनिर्भरता के लिए ऊर्जा सुरक्षा

प्रधानमंत्री का दूसरा बड़ा संदेश ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर था। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता अब केवल आर्थिक नारा नहीं है, बल्कि ऐसी दुनिया की जरूरत है जहां महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुंच को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मोदी ने कहा कि दुनिया पेट्रोल, डीजल, उर्वरक, दवाइयों, तकनीक और चिप्स जैसे संसाधनों को 'हथियार' बना रही है। उन्होंने युद्धों और वैश्विक व्यवधानों का हवाला देते हुए कहा कि यहां तक कि भू-भाग का भी इस्तेमाल रणनीतिक दबाव के लिए किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों से सीधे जोड़ा, खासकर सेमीकंडक्टर निर्माण और AI डेटा सेंटर के विस्तार के संदर्भ में। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा समय की मांग है और 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक ले जाने का लक्ष्य रखा। अगले दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर बनाए जाने की भी घोषणा की गई।

narendra modi

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पीएम ने उन क्षेत्रों में तेल की खोज बढ़ाने की बात कही, जिन्हें पहले ‘नो-गो जोन’ माना जाता था। साथ ही बताया कि 2014 से पहले लगभग 2 GW की सौर ऊर्जा क्षमता अब बढ़कर 160 GW हो गई है। इसमें राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट था। कोविड महामारी, यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए व्यवधानों का उल्लेख करते हुए मोदी ने आत्मनिर्भरता पर सरकार के जोर को सही ठहराया। उन्होंने वैश्वीकरण पर पहले के भरोसे की तुलना वर्तमान स्थिति से की, जहां देश तेजी से अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। संदेश साफ था—भारत आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए उसे तेल, उर्वरक, दवाइयों, चिप्स और तकनीक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता का जोखिम नहीं उठाना चाहिए।

विकास की नई पहचान ‘स्पीड’

प्रधानमंत्री के भाषण में अगर कोई शब्द बार-बार आया तो वह था 'स्पीड' यानी गति। मोदी ने 2014 से पहले के दौर को 'हम करेंगे, कुछ होगा' वाली कार्यशैली से जोड़ा और इसके मुकाबले अपनी सरकार की कार्यशैली को तेज डिलीवरी वाली संस्कृति के रूप में पेश किया। उन्होंने नल से जल कनेक्शन, गैस कनेक्शन, शौचालय और आवास जैसी योजनाओं में तेजी का उदाहरण दिया। उन्होंने रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे कोच, मोबाइल फोन, पेटेंट और डिजिटल लेनदेन में बढ़ोतरी को भी देश की बदलती गति का प्रमाण बताया। यह केवल सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश करने की कोशिश नहीं थी। मोदी सरकार लंबे समय से ‘डिलीवरी’ और 'अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार' के एजेंडे पर जोर देती रही है। अब प्रधानमंत्री गति को भी अपनी सरकार के कामकाज की प्रमुख पहचान के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति के लिए हमारी कार्यसंस्कृति, सोच और काम करने की गति में बदलाव जरूरी है और सरकार, समाज तथा उद्योग—सभी क्षेत्रों में सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाना होगा।

वैश्विक बाजार पर नजर

मोदी ने आत्मनिर्भरता को आर्थिक अलगाव के रूप में पेश नहीं किया। इसके उलट उन्होंने भारत के लिए आक्रामक निर्यात रणनीति की बात की।

करीब 40 देशों के साथ जिन मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर बातचीत या समझौते हो रहे हैं, उनका उल्लेख करते हुए उन्होंने MSMEs से वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहुंचना होगा, लेकिन इसके लिए गुणवत्ता, लागत और पैमाने के मामले में दुनिया के मानकों को पीछे छोड़ना होगा। उन्होंने इसे 'सप्त धारा' के माध्यम से समझाया—निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक एवं नवाचार, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, हरित अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर। मोदी ने संपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन विकसित करने, बड़े पैमाने पर खाद्य निर्यात, मेड इन इंडिया 6G, मजबूत रक्षा निर्यात, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार तथा भारत की सांस्कृतिक और रचनात्मक ताकत के बेहतर इस्तेमाल का आह्वान किया। मोदी ने सवाल उठाया कि 50 भारतीय कंपनियां Fortune 500 में क्यों नहीं हो सकतीं और भारतीय बैंक, फार्मा कंपनियां तथा प्रोफेशनल फर्म वैश्विक स्तर पर अग्रणी क्यों नहीं बन सकतीं।

राष्ट्रीय सुरक्षा

राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर मोदी ने माओवादी हिंसा में कमी के बावजूद सतर्कता बरतने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भारत ने बंदूकों से माओवादियों को हराया है, लेकिन 'दिमागी नक्सल' यानी नक्सली मानसिकता रखने वाले लोग अब भी संस्थानों में मौजूद हैं और नीतियों को प्रभावित करते हैं। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा को आत्मनिर्भरता के व्यापक एजेंडे से जोड़ते हुए उन्होंने भारत को दुनिया का प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता बनाने, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियां विकसित करने तथा हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक में नेतृत्व हासिल करने पर जोर दिया।

शक्ति की 'सप्तधारा'

पीएम मोदी ने 'शक्ति की सप्तधारा’ के तहत पहली शक्ति को 'विनिर्माण शक्ति’ बताते हुए कहा कि भारत को 'कंपोनेंट’ एवं ’डिजाइन’ से लेकर तैयार उत्पादों तक पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करनी होगी तथा भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला केंद्र के रूप में उभरना होगा। उन्होंने कहा कि दूसरी शक्ति कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण है। किसानों के लिए दुनिया के बाजार खुलने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से भारत को बड़ा बाजार मिल रहा है और अब खेत से निर्यात बाजार तक पहुंचने पर जोर देना होगा।

PM Modi

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उन्होंने प्रौद्योगिकी और नवाचार को तीसरी शक्ति बताया और कहा कि आज का दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर का है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को नवाचार का वैश्विक केंद्र बनना होगा। सप्तधारा की चौथी शक्ति 'गतिशक्ति’ को बताते हुए मोदी ने निर्बाध और तेज गति वाले संपर्क पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरों को हाई-स्पीड रेल के जरिए जोड़ा जाना चाहिए और बंदरगाह आधारित विकास पर भी ध्यान देना होगा।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा

पीएम ने रक्षा शक्ति को सप्तधारा की पांचवीं शक्ति बताया और कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना अब भारत और दुनिया दोनों की जरूरत बन गया है। मोदी का कहना था कि जब दुनिया अपने-अपने हितों पर ध्यान दे रही है, तब भारत केवल दुनिया के लिए बाजार बनकर नहीं रह सकता। मोदी ने कहा कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा और अगली पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकी विकसित करके वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने 'हरित और नीली अर्थव्यवस्था’ छठी शक्ति बताते हुए कहा कि भारत को हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहिए तथा दुनिया की चुनौतियों के समाधान उपलब्ध कराने जारी रखने चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, नीली अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं, जो भारत के विकास के लिए नए रास्ते खोल सकती हैं। भारत की 'सॉफ्ट पावर’ को सप्तधारा की सातवीं शक्ति बताते हुए मोदी ने कहा कि योग ने पूरी दुनिया को भारत से जोड़कर रखा है। उन्होंने कहा कि योग दुनिया के लिए ऊर्जा बनता जा रहा है और भारत के लिए विश्वास का बड़ा आधार बन रहा है।

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