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इनहेलर का उपयोग करना क्यों जरूरी है? डॉक्टर से जानिए सही इनहेलर का प्रयोग कैसे करें

  • Written by: प्रणव मिश्र
  • Updated May 10, 2023, 05:50 PM IST

How to Use Inhaler: डॉक्टर अस्थमा की बीमारी में इनहेलर के इस्तेमाल की सलाह देते हैं, लेकिन लोगों में यह भी गलत धारणा है कि इनहेलर के ज्यादा इस्तेमाल से इसकी आदत पड़ सकती है और यह हानिकारक भी हो सकता है। सही इनहेलर तकनीक दवा की प्रभावकारिता बढ़ा सकती है, खुराक और साइड इफेक्ट दोनों को कम कर सकती है। आइये इनहेलर के बारे में एक्सपर्ट से विस्तार से जानते हैं-

Asthma Treatment in Hindi: दमा के नियंत्रण में इन्हेलेशन थेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन इस इलाज के बारे में फैली भ्रांतियों के कारण दमा के रोगी डॉक्टर द्वारा परामर्शित इन्हेलेशन थेरेपी का पालन करने से कतराते हैं। जीएएन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार दमा पीड़ित 9 प्रतिशत से भी कम लोगों को ICS (इन्हेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स) का इलाज मिल पाता है, जो दमा के नियंत्रण के लिए बहुत जरूरी होता है ।

इनहेलर का उपयोग करना क्यों जरूरी है? - Why is it important to use Inhalers?

मुंबई की चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. प्रणाली पाटिल ने टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से बातचीत में बताया कि इन्हेलेशन थेरेपी सांस की पुरानी बीमारियों जैसे दमा के नियंत्रण के लिए एक बहुत प्रभावशाली इलाज है। यह बिल्कुल सही जगह सही खुराक में दवाई पहुंचाता है, और लंबे समय तक आराम देता है। इन्हेलेशन के उपकरण दवाई को सीधे सांस की नली और फेफड़ों में पहुंचाते हैं, जिस कारण इसकी खुराक कम लेनी पड़ती है और खाई जाने वाली दवाईयों के मुकाबले इसके साईड इफेक्ट भी कम होते हैं।

साथ ही इनहेलर में तुरंत आराम देने वाली दवाई होती है, जिसकी वजह से जरूरत पड़ने पर फौरन आराम मिल जाता है। दमा रोगियों के लिए यह इलाज बहुत ही जरूरी होता है क्योंकि दमा का दौरा काफी गंभीर हो सकता है और दौरा पड़ने की स्थिति में इनहेलर साथ रखना बहुत आसान होता है, और यह काफी कारगर भी होता है ।

सही इनहेलर का प्रयोग करें ? - Use the Right Inhaler?

सही इनहेलर के उपयोग और इसे सही तरीके से प्रयोग करने से आपको दवाई की उचित मात्रा मिलती है, जो लक्षणों से आराम देती है, स्थिति बिगड़ने नहीं देती और दमा के दौरे से तुरंत आराम प्रदान करती है। इनहेलर दीर्घकालिक इलाज के विकल्प के रूप में भी दिया जा सकता है, जिसमें इसका उपयोग नियमित तौर से एक छाती रोग विशेषज्ञ के निर्देशन में करना होता है। इसे इलाज योग्य गंभीर बीमारी, जैसे निमोनिया के लिए भी दिया जा सकता है। दमा के लक्षण नियंत्रित करने के लिए अनेक तरह के अस्थमा इनहेलर बाजार में उपलब्ध हैं। इसका परामर्श छाती रोग विशेषज्ञों द्वारा लक्षणों और रोग की गंभीरता के आधार पर दिया जाता है।

सबसे आम तरह के इनहेलर कौन-कौन से हैं ? - What are the most common types of inhalers?

प्रेशराईज़्ड मीटर्ड डोज़ इनहेलर (Pressurised Metered dose Inhalers (pMDIs): यह सबसे आम तौर से इस्तेमाल होने वाला इनहेलर है, जिसमें एक प्रेशराईज़्ड कनस्तर होता है। इस कनस्तर में एयरोसॉल प्रोपेलेट्स से मिश्रित दवाई होती है, जो एक बटन दबाकर स्प्रे की जाती है। इनहेलर के साथ एक स्पेसर का उपयोग करने पर पूरी खुराक लेने की प्रक्रिया आसान हो जाती है, जो खासकर बच्चों और वृद्धों के लिए बहुत उपयोगी है। दवाई निकलने के बाद स्पेसर इसे इनहेलर और मुंह के बीच में एक ट्यूब में रखता है, ताकि दवाई पूरी तरह से मुंह में ही पहुंचे।

ड्राई पाउडर इनहेलर (Dry Powder Inhaler (DPI): दवाई को बाहर निकालने के लिए प्रोपेलेंट का उपयोग करने की बजाय, ड्राई पाउडर इनहेलर (डीपीआई) दवाई को ड्राई पाउडर के रूप में छोड़ते हैं, जो रोगी द्वारा गहरी साँस लेने पर तेजी से सांस के साथ अंदर चले जाते हैं। जरूरी खुराक के आधार पर डीपीआई बड़ी क्षमता की मल्टी-डोज़ डिवाईसेज़ या सिंगल-डोज़ डिवाईसेज़ के रूप में आ सकते हैं, जिनमें हर बार एक नया कैप्सूल भरना होता है।

ब्रेथ एक्चुएटेड इनहेलर (Breath Actuated Inhaler (BAI): ब्रेथ-एक्चुएटेड मीटर्ड-डोज़ इनहेलर कॉम्पैक्ट और पोर्टेबल होते हैं और पारंपरिक प्रेशराईज़्ड मीटर्ड-डोज़ इनहेलर में साँस और दवाई छोड़े जाने में तालमेल की समस्या को दूर करते हुए कई खुराक प्रदान करते हैं। यह दवाई गहरी साँस लेने पर निकलती है, इसलिए यह अस्पतालों में और मरीज द्वारा स्वयं इस्तेमाल करने के लिए आसान है। लेकिन ये इनहेलर बच्चों और उन वृद्धों के लिए ठीक नहीं होते, जो इसे एक्टिवेट करने के लिए ज्यादा गहरी साँस नहीं ले पाते।

तकनीक जरूरी क्यों है? - Why is Technology Important?

इनहेलर के प्रभावशाली होने के लिए सही उपयोग जरूरी है। तकनीक हर डिवाईस के लिए अलग होती है, इसलिए मरीज को अपने डॉक्टर के मार्गदर्शन में सही तकनीक सीखना चाहिए। इनहेलर का सही उपयोग न कर पाने से बीमारी का पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो पाता है और इमरजेंसी रूम में बार-बार जाने और अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा, इनहेलर का सही तरीके से उपयोग न कर पाने पर दवाई फेफड़ों और सांस की नली में नहीं पहुंच पाती, जिससे इलाज सफल होने की संभावना कम हो जाती है।

इसके अलावा, डिवाईसेज़ और बची हुई खुराक के ट्रैक के बीच किसी भी तरह की शंका के लिए यह बहुत जरूरी है कि कंट्रोलर और रिलीवर इनहेलर पर लेबल लगा लिया जाए। हर हफ्ते इनहेलर को साफ किया जाना भी जरूरी है, ताकि इसमें कचरा जमा न हो पाए क्योंकि इससे फेफड़ों की स्थिति बिगड़ सकती है, और इलाज का प्रभाव कम हो सकता है। जब डोज़ काउंटर हरे से लाल में बदल जाए, तो इसका मतलब है कि खुराक कम बची है। ऐसा होने पर एक नया इनहेलर खरीद लें। इन उपायों का पालन करके इनहेलर का उपयोग बहुत आसानी से किया जा सकता है, और दीर्घकाल में दमा को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।

अस्वीकरण की टिप्पणीः यह जानकारी केवल आम जागरुकता के लिए है। हम किसी भी तरह से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष या सांकेतिक रूप में किसी भी उत्पाद के उपयोग को बढ़ावा या समर्थन नहीं देते या दवाईयों की सिफारिश नहीं करते, न ही ये परामर्श किसी भी रोग के लिए चिकित्सा विशेषज्ञ के परामर्श या उपचार/इलाज का विकल्प हैं। कोई भी दवाई/इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर/रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर से संपर्क करें। इनहेलर का उपयोग केवल छाती रोग विशेषज्ञ के परामर्श से करें।

प्रणव मिश्र
प्रणव मिश्रauthor

मीडिया में पिछले 5 वर्षों से कार्यरत हैं। इस दौरान इन्होंने मुख्य रूप से टीवी प्रोग्राम के लिए रिसर्च, रिपोर्टिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए काम किया है। इससे पहले जनसत्ता, लोकसभा टीवी/संसद टीवी, पेबेल मीडिया नेटवर्क, टाइम 8, डीडी न्यूज़ के लिए काम कर चुके हैं। इस समय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पेशल करेस्पोंडेंट के पद पर कार्यरत हैं।

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