Flu Se Fight: घर में एक सदस्य को बुखार हुआ। अगले दिन बच्चे को खांसी शुरू हो गई और फिर किसी दूसरे सदस्य ने बदन दर्द की शिकायत कर दी। फ्लू के मौसम में संक्रमण इसी तरह एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच सकता है और एक बाद एक लोग बीमार होते जाते हैं। ऐसे समय में बीमारी के साथ कई दूसरी परेशानियां भी सामने आती हैं। किसे अलग कमरे में रखा जाए? मरीजों की देखभाल कौन करे? क्या सभी एक ही दवा ले सकते हैं? अगर घर में केवल एक बाथरूम है तो क्या किया जाए?
अब हर घर में मरीजों के लिए अलग कमरा और बाथरूम होना संभव नहीं है। लेकिन सही प्लानिंग, मास्क, ताजी हवा का फ्लो और दवाओं का अलग रिकॉर्ड रखकर स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
सबसे पहले बीमार और स्वस्थ लोगों को अलग करें
एक साथ जब घर के कई लोग बीमार हो जाएं तो सबसे पहले घर के सदस्यों को दो ग्रुप में बांट लें। पहले ग्रुप में वे लोग रहें जिन्हें बुखार, खांसी, गले में दर्द, नाक बहना या बदन दर्द जैसे लक्षण हैं। दूसरे ग्रुप में ऐसे लोग रहें जिनमें अभी कोई लक्षण नहीं है।
अब कोशिश करें कि बीमार और स्वस्थ लोग एक ही कमरे में न सोएं। घर में दो कमरे हैं तो एक कमरा मरीजों के लिए तय कर सकते हैं। स्वस्थ सदस्य दूसरे कमरे में रहें।
डॉ. आर. आर. दत्ता (पारस हेल्थ, गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसिन विभाग के एचओडी) कहते हैं कि मरीज वाले कमरे को एकदम बंद ना करें। कमरे की खिड़की खुली रखें, ताकि ताजी हवा आती रहे। केवल एसी चलाकर कमरे को पूरी तरह बंद रखना ठीक नहीं है। अगर एग्जॉस्ट फैन है तो उसे भी चलाया जा सकता है।
क्या फ्लू के सभी मरीज एक कमरे में रह सकते हैं
अगर घर में जगह कम है और दो या तीन लोगों में लगभग एक ही समय पर एक जैसे लक्षण शुरू हुए हैं तो उन्हें एक कमरे में रखा जा सकता है। फिर भी उनके बिस्तर अलग रखें और जितनी संभव हो उतनी दूरी बनाएं।
यह जरूरी नहीं कि घर में बुखार से पीड़ित सभी लोगों को एक ही संक्रमण हुआ हो। डॉ. मानस चटर्जी (वरिष्ठ सलाहकार चिकित्सक, कैलाश अस्पताल, नोएडा) का कहना है कि एक ही घर में रहने वाले लोगों को अलग अलग इंफेक्शन भी हो सकती है जैसे कि फ्लू, एच1एन1, कोविड-19, डेंगू और चिकनगुनिया आदि। इनके शुरुआती लक्षण कुछ हद तक एक जैसे हो सकते हैं लेकिन कुछ दिन बाद ये डिफरेंट भी हो सकते हैं।
डॉ. मानस चटर्जी की सलाह है कि अगर किसी एक सदस्य को बहुत तेज बुखार, रैश, लगातार उल्टी, सांस फूलना या असामान्य कमजोरी हो रही है तो उसे बाकी मरीजों के साथ न रखें। डॉक्टर से संपर्क करें और जरूरत होने पर जांच कराएं।
हर मरीज की दवा अलग रखें
घर में कई लोग बीमार हों तो दवाओं को लेकर गलती होने का खतरा बढ़ जाता है। किसी एक व्यक्ति की दवा दूसरे को न दें। लक्षण एक जैसे होने पर भी दवा और उसकी मात्रा अलग हो सकती है।
डॉ. मानस चटर्जी का कहना है कि उम्र, वजन, एलर्जी, गर्भावस्था, किडनी-लिवर की समस्या और पहले से चल रही दवाओं के आधार पर इलाज तय होता है। बच्चों की दवा खासतौर पर उनके वजन के अनुसार दी जाती है।
इसलिए हर मरीज की दवाओं का अलग पैकेट बनाएं और उस पर उसका नाम लिख दें। इसके साथ एक छोटा चार्ट भी बना सकते हैं।
| क्या लिखें | इससे क्या फायदा होगा |
|---|---|
| मरीज का नाम | दवा बदलने की गलती नहीं होगी |
| तापमान | बुखार का पैटर्न पता चलेगा |
| दवा का नाम और समय | डबल डोज से बचाव होगा |
| पानी और भोजन | डिहाइड्रेशन का पता चलेगा |
| पेशाब की स्थिति | शरीर में पानी की कमी समझ आएगी |
| नए लक्षण | हालत बिगड़ने का जल्दी पता चलेगा |
दवा देने के बाद समय के सामने निशान लगा दें। केवल याददाश्त पर भरोसा न करें, खासकर जब घर में एक से अधिक लोग मरीजों की देखभाल कर रहे हों।
एंटीबायोटिक खुद से शुरू न करें
डॉ. आर. आर. दत्ता बताते हैं कि फ्लू दरअसल वायरस से होने वाला संक्रमण है और ऐसे में एंटीबायोटिक वायरल फ्लू पर काम नहीं करती। इसलिए जरूरी है कि घर में पहले से रखी एंटीबायोटिक या किसी पुराने पर्चे की दवा खुद से शुरू न करें।
डॉक्टर कुछ मरीजों को फ्लू की एंटीवायरल दवा दे सकते हैं। यह दवा आमतौर पर लक्षण शुरू होने के पहले 48 घंटों के अंदर ज्यादा असरदार मानी जाती है। गंभीर लक्षण या हाई रिस्क मरीज होने पर डॉक्टर बाद में भी इसे शुरू कर सकते हैं।
इन लोगों को फ्लू के लक्षण शुरू होते ही डॉक्टर से बात करनी चाहिए:
- 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग
- गर्भवती महिलाएं
- छोटे बच्चे
- अस्थमा या सांस की बीमारी के मरीज
- डायबिटीज और हृदय रोग के मरीज
- कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
एक और बात का ध्यान रखें। सर्दी-जुकाम की कई कॉम्बिनेशन दवाओं में पहले से पैरासिटामोल हो सकती है। उनके साथ अलग से पैरासिटामोल लेने पर डोज ज्यादा हो सकती है। दवा की स्ट्रिप पर लिखी जानकारी पढ़ें और डॉक्टर की सलाह मानें।
एक स्वस्थ सदस्य को बनाएं केयरगिवर
डॉ. आर. आर. दत्ता का कहना है कि घर का केवल एक स्वस्थ व्यक्ति मरीजों की मुख्य देखभाल करे तो संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सकता है। बाकी सदस्यों को मरीजों के कमरे में बार-बार आने से बचना चाहिए।
केयरगिवर ऐसा व्यक्ति हो जिसे गंभीर फ्लू होने का खतरा कम हो। गर्भवती महिला, बुजुर्ग या किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को यह जिम्मेदारी न दें।
मरीज के पास जाते समय अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क पहनें। मरीज भी किसी स्वस्थ सदस्य से बात करते समय मास्क लगाए। कमरे से बाहर आने और मरीज के बर्तन, कपड़े या इस्तेमाल किए गए टिश्यू छूने के बाद साबुन से हाथ धोएं।
डॉ. मानस चटर्जी की सलाह है कि हर समय दस्ताने पहनना जरूरी नहीं है। सही तरीके से हाथ धोना और गंदे हाथों से आंख, नाक या मुंह न छूना अधिक जरूरी है।
मरीज का कौन-सा सामान अलग रखें
हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कक मरीज की पानी की बोतल, गिलास, तौलिया, तकिया, रूमाल और टूथब्रश अलग रखें। मोबाइल, रिमोट और थर्मामीटर शेयर करने से बचें। अगर एक ही थर्मामीटर इस्तेमाल करना पड़े तो हर बार उसे अच्छी तरह साफ करें।
हालांकि मरीज के बर्तन सामान्य साबुन और पानी से धोए जा सकते हैं। अलग बर्तन खरीदने या उन्हें फेंकने की जरूरत नहीं है। कपड़े और चादरें भी डिटर्जेंट से सामान्य तरीके से धोई जा सकती हैं। बस कपड़ों को धोने से पहले जोर से न झटकें।
इसी तरह जब घर के संक्रमण फैला हो तो दरवाजे के हैंडल, नल, फ्लश, स्विच, मोबाइल और रिमोट जैसी बार-बार छुई जाने वाली चीजों को नियमित रूप से साफ करें।
एक ही बाथरूम हो तो क्या करें
एक बाथरूम होने पर स्वस्थ सदस्य उसका इस्तेमाल पहले और बीमार सदस्य बाद में कर सकते हैं। हां बस ये ध्यान रखें कि मरीज के इस्तेमाल के बाद नल, फ्लश, कुंडी और दरवाजे का हैंडल जरूर साफ कर दें।
इसके अलावा, बाथरूम की खिड़की खुली रखें या एग्जॉस्ट फैन चलाएं। मरीज का तौलिया, टूथब्रश और साबुन अलग जगह पर रखें। परिवार के सभी सदस्यों के टूथब्रश एक ही खुले मग में न रखें।
फ्लू में खाने-पीने का ध्यान कैसे रखें
फ्लू में कमजोरी आ सकती है और भूख कम हो सकती है। इसलिए मरीज को जबरदस्ती भारी खाना न खिलाएं। खिचड़ी, दलिया, दाल, सूप और घर का हल्का खाना कम मात्रा में दिया जा सकता है।
डॉ. मानस चटर्जी बताते हैं कि फ्लू के मरीज को पानी, ओआरएस और दूसरे तरल थोड़ी-थोड़ी देर में देते रहें। हालांकि डायबिटीज, किडनी या हृदय रोग वाले मरीज को नारियल पानी, जूस या बहुत अधिक तरल देने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें।
शरीर में पानी की कमी के इन संकेतों पर नजर रखें:
- मुंह सूखना
- पेशाब कम होना
- पेशाब का रंग बहुत गहरा होना
- उठते समय चक्कर आना
- बच्चे के रोने पर आंसू न आना
- बहुत ज्यादा सुस्ती
फ्लू में कितने दिन आइसोलेशन जरूरी है
डॉ. मानस चटर्जी का कहना है कि फ्लू का वायरस लक्षण आने से करीब एक दिन पहले फैलना शुरू हो सकता है। बीमारी शुरू होने के बाद आमतौर पर पांच से सात दिनों तक संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। पहले तीन दिनों में मरीज से संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा हो सकता है।
छोटे बच्चे और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग लंबे समय तक संक्रमण फैला सकते हैं। इसलिए इनके मामले में डॉक्टर की सलाह के अनुसार सावधानी जारी रखें।
मरीज सामान्य कामों में तब लौट सकता है जब कम से कम 24 घंटे से:
- बिना बुखार की दवा लिए बुखार न आया हो।
- खांसी, बदन दर्द और दूसरे लक्षण पहले से बेहतर हो रहे हों।
इसके बाद भी अगले पांच दिनों तक मास्क पहनना, ताजी हवा आने देना और बुजुर्गों से दूरी रखना बेहतर है। केवल पैरासिटामोल खाने के बाद बुखार उतर जाने का मतलब यह नहीं है कि आइसोलेशन खत्म कर दिया जाए।
बुजुर्ग और बच्चों को संक्रमण से कैसे बचाएं
घर में कोई बुजुर्ग, गर्भवती महिला, छोटा बच्चा या गंभीर बीमारी से जूझ रहा व्यक्ति अभी स्वस्थ है तो उसे मरीजों से सबसे दूर रखें। उसका खाना, पानी और रोजमर्रा का सामान अलग संभालें।
अगर घर में कोई बेड पर रहने वाला मरीज है या उसे ऑक्सीजन, फीडिंग ट्यूब अथवा नर्सिंग केयर की जरूरत है तो फ्लू से बीमार व्यक्ति को उसकी देखभाल नहीं करनी चाहिए। कोई दूसरा केयरगिवर उपलब्ध न हो तो मास्क, हाथों की सफाई और कमरे की हवा पर विशेष ध्यान दें।
किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
घर में कई लोग बीमार हों तो गंभीर लक्षण भी सामान्य फ्लू का हिस्सा लग सकते हैं। इसलिए हर मरीज की हालत अलग से देखें।
- वयस्कों में खतरे के संकेत
- सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना
- सीने या पेट में लगातार दर्द
- बहुत ज्यादा चक्कर, भ्रम या बेहोशी
- मरीज को जगाने में कठिनाई
- पेशाब बहुत कम होना
- लगातार उल्टी होना
- बहुत ज्यादा कमजोरी या लड़खड़ाहट
- होंठ या चेहरा नीला पड़ना
- ठीक होने के बाद बुखार या खांसी दोबारा बढ़ना
- पहले से मौजूद बीमारी का अचानक बिगड़ना
- बच्चों में खतरे के संकेत
- बहुत तेज या मुश्किल से सांस लेना
- सांस लेते समय पसलियां अंदर जाना
- बच्चा पानी या दूध न पी पा रहा हो
- आठ घंटे तक पेशाब न होना
- मुंह सूखना या रोते समय आंसू न आना
- बच्चा जागने पर भी सामान्य प्रतिक्रिया न देना
- दौरा पड़ना
- होंठ या चेहरा नीला पड़ना
- तीन महीने से छोटे बच्चे को कोई भी बुखार होना
इनमें से कोई भी संकेत नजर आए तो घर पर इंतजार न करें। डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से तुरंत संपर्क करें।
सही प्लानिंग से आसान होगा फ्लू मैनेजमेंट
एक ही घर में कई लोगों का बीमार होना पूरे परिवार के लिए बेशक थकाने वाला हो सकता है। ऐसे समय में घबराने की जगह कामों को व्यवस्थित करें। बीमार और स्वस्थ लोगों के कमरे अलग करें। एक केयरगिवर तय करें। हर मरीज की दवाओं का अलग रिकॉर्ड रखें और घर में ताजी हवा आने दें।
सबसे जरूरी बात यह है कि हर मरीज की हालत अलग-अलग देखी जाए। किसी एक सदस्य को सामान्य फ्लू है तो यह जरूरी नहीं कि दूसरे की हालत भी उतनी ही हल्की हो। बच्चों, बुजुर्गों और पुरानी बीमारी वाले लोगों के लक्षणों को लेकर ज्यादा सावधान रहें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी दवा, जांच या इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
