सर्दियों का ये मौसम अपने साथ कई तरह की समस्याएं भी लेकर आता है। पिछले 3-4 दिन में तापमान में काफी गिरावट देखने को मिली है। जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई पड़ता है। सामान्य खांसी-जुकाम सर्दियों में होने वाली आम समस्याएं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में पड़ने वाली ज्यादा ठंड ब्रेन स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरे का भी कारण बन जाती है। इस मौसम में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में अस्पतालों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इन मरीजों में 40 साल से 58 साल की आयु के मरीज ज्यादातर देखने को मिल रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर सर्दियों में क्यों बढ़ जाते हैं ब्रेन स्ट्रोक के मरीज?
ब्रेन स्ट्रोक और ठंड का संबंध
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो सर्दियों में जब तापमान काफी ज्यादा गिर जाता है, तो इससे आपका ब्लड प्रेशर काफी गिर जाता है। यही कारण है कि तापमान कम होने पर हमारी नसें जम जाती हैं और खून का फ्लो धीमा हो जाता है। जब शरीर में बहने वाला खून दिमाग तक नहीं पहुंच पाता है, तो ऐसे में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा पैदा हो जाता है। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा कम तापमान में बाहर नहीं रहना चाहिए।
क्या होता है ब्रेन स्ट्रोक?
ब्रेन स्ट्रोक एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के दिमाग में खून की सप्लाई प्रभावित हो जाती है। सामान्य तौर पर ब्रेन स्ट्रोक को दो तरह से देखा जाता है। ये दोनों ही स्थितियां हमारे लिए जानलेवा साबित होती है।
1. जब दिमाग में मौजूद नसों में रुकावट आ जाती है, तो इसे इस्केमिक स्ट्रोक कहा जाता है।
2. जब दिमाग में मौजूद नसें ब्लड की सप्लाई के दबाव के कारण फट जाती हैं। तो इसे हेमरेजिक स्ट्रोक कहा जाता है।
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण - Symptoms of Brain Stroke in Hindi
- बोलते समय परेशानी महसूस हो यानी आवाज साफ न निकलना और जीभ का लड़खड़ाना ब्रेन स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है।
- यदि आपके दिमाग को किसी बात को समझने में ज्यादा दिक्कत होती है, तो यह ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
- हाथ-पैरों में सुन्नपन की समस्या दिखाई दे रही है, तो यह ब्रेन स्ट्रोक का शुरूआती संकेत हो सकता है।
- तेज सिर दर्द और चक्कर आना जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो यह ब्रेन स्ट्रोक का शुरूआती संकेत हो सकता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
