Hypertension in Pregnancy: मां बनना हर एक महिला के लिए सुखद भरा अनुभव होता है। इस दौरान महिलाओं को कई तरह के उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ता है। साथ ही उन्हें इस अवस्था में अपना विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह के टेस्ट और चेकअप कराने पड़ते हैं। इन चेकअप में ब्लड प्रेशर की निगरानी शामिल है। क्या आप जानते हैं आखिर प्रेग्नेंसी के दौरान बार-बार ब्लड प्रेशर क्यों देखा जाता है? आखिर हाई ब्लड प्रेशर से बच्चों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है? अगर नहीं, तो आप हम आपको इस लेख में प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर से होने वाली परेशानियों के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-
क्यों की जाती है प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर की जांच?
प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे दोनों को स्वस्थ रखने के लिए ब्लड प्रेशर की जांच की जाती है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के दौरान लो या फिर मध्यम हाई ब्लड प्रेशर के अधिकांश मामाले में मां और बच्चे पर किसी तरह का खतरा नहीं होता है, लेकिन अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी हो जाए तो उन्हें कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में-
शिशु के शरीर पर पड़ता है असर
प्रेग्नेंसी के दौरान अगर महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी हो जाए, तो इसकी वजह से शिशु का वजन काफी कम हो सकता है। इसके अलावा हाइट में सामान्य से छोटा शिशु जन्म ले सकता है। इसका कारण हाई ब्लड प्रेशर की वजह से शिशु तक आवश्यक पोषण और ऑक्सीजन का प्रवाह न हो पाना हो सकता है। इसके अलावा बच्चे को एनीमिया, किडनी की परेशानियां जैसी जटिलाओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
प्री-एक्लेमप्सिया
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का ब्लड प्रेशर चेक करना बहुत ही जरूरी है। अगर गर्भवस्था में महिलाओं का ब्लड प्रेशर काफी ज्यादा हाई रहा, तो प्री-एक्लेमप्सिया नामक स्वास्थ्य स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यह काफी गंभीर स्थिति मानी जाती है।
प्रीमैच्योर
अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाए, तो बच्चे का जन्म प्रीमैच्योर हो सकता है। इसकी वजह से बच्चे का विकास दर भी रूक सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में अपने ब्लड प्रेशर की निगरानी जरूर रखें।
(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
