अक्सर जब शरीर में अचानक दर्द होता है तो हम उसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर पैर में अचानक तेज दर्द, सूजन, रंग बदलना या पैर ठंडा पड़ना शुरू हो जाए तो इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें। प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पलानीअप्पन मणिकम जो यूट्यूब पर Dr. Pal के नाम से फेमस हैं उन्होंने एक हालिया बातचीत में वैस्कुलर विशेषज्ञ डॉ. राजा कोपाला से खुलकर इस टॉपिक पर बातचीत की है।
क्या होता है लेग अटैक?
हम अक्सर हार्ट अटैक का नाम सुनते ही समझते हैं कि दिल की नस में ब्लॉकेज हो गया है। लेकिन शरीर की दूसरी नसों में भी खून का रास्ता रुक सकता है। अगर पैर की किसी बड़ी नस में अचानक खून की सप्लाई कम हो जाए या पूरी तरह रुक जाए, तो पैर के हिस्सों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऐसे में पैर में अचानक बहुत तेज दर्द हो सकता है। पैर सूज सकता है, उसका रंग नीला, बैंगनी या काला पड़ सकता है और पैर सामान्य से ज्यादा ठंडा महसूस हो सकता है। कई बार पैर सुन्न पड़ने लगता है या उसमें कमजोरी महसूस होती है। ये लक्षण सामान्य थकान या दर्द समझकर टालने वाली बात नहीं हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर या अस्पताल पहुंचना जरूरी है।
अगर पैर में खून की सप्लाई लंबे समय तक बंद रही तो वहां के टिश्यू यानी शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है। स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर पैर में गैंग्रीन हो सकता है और कुछ गंभीर मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ सकती है। इसलिए पैर में अचानक तेज दर्द, रंग बदलने या ठंडा पड़ने जैसे लक्षण दिखें तो इंतजार करने के बजाय तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
डायबिटीज वालों को क्यों रहना चाहिए ज्यादा सावधान?
डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, इसका असर पैरों की नसों और खून की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। अगर लंबे समय तक शुगर कंट्रोल में न रहे तो पैरों की नसों में ब्लॉकेज या ब्लड फ्लो कम होने की समस्या हो सकती है। डायबिटीज में एक और दिक्कत होती है कि पैरों की नसें धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती हैं। इसकी वजह से पैर में चोट, कट या छाला होने पर कई बार दर्द का ठीक से पता ही नहीं चलता। यानी चोट लगी भी है, लेकिन मरीज को उसका एहसास नहीं होता।
अब अगर पैरों में खून की सप्लाई भी ठीक नहीं है, तो ऐसी चोट या घाव जल्दी भर नहीं पाता। धीरे-धीरे उसमें इंफेक्शन हो सकता है और मामला गंभीर हो सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों पर खास ध्यान देना चाहिए और रोजाना देखना चाहिए कि कहीं कट, छाला, सूजन, लाल निशान या कोई घाव तो नहीं है।
स्मोकिंग पैरों की नसों के लिए भी खतरनाक
सिगरेट पीने का नुकसान सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। इसका असर शरीर की नसों और ब्लड सर्कुलेशन पर भी पड़ता है। स्मोकिंग की वजह से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं और समय के साथ उनकी अंदरूनी परत को नुकसान पहुंच सकता है। धूम्रपान करने वालों में नसों में प्लाक जमा होने यानी एथेरोस्क्लेरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है। इससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों में खून की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और पैरों में दर्द, कमजोरी या चलने में परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज भी है और वह स्मोकिंग करता है, तो खतरा और बढ़ सकता है। दोनों ही चीजें मिलकर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए स्मोकिंग छोड़ना खास तौर पर जरूरी है।
लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना भी बन सकता है परेशानी की वजह
आजकल कई लोगों का काम ऐसा है कि उन्हें घंटों कुर्सी पर बैठे रहना पड़ता है। दूसरी तरफ हेयरड्रेसर, सिक्योरिटी गार्ड, दुकानदार या कुछ दूसरे काम करने वाले लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं। दोनों ही स्थितियों में अगर पैरों की ज्यादा मूवमेंट नहीं हो रही है, तो ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है।
हमारी पिंडलियों की मांसपेशियां खून को पैरों से वापस दिल की तरफ पहुंचाने में मदद करती हैं। इसे आसान भाषा में काफ मसल पंप कहा जाता है। जब हम चलते हैं तो पिंडलियों की मांसपेशियां सिकुड़ती और ढीली होती रहती हैं, जिससे खून ऊपर की तरफ जाने में मदद मिलती है।
लेकिन जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही जगह बैठा या खड़ा रहता है और पैरों को ज्यादा नहीं हिलाता, तो यह प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। इससे पैरों में भारीपन, सूजन और नसों से जुड़ी दूसरी परेशानियां हो सकती हैं।
पैरों में उभरने लगें नसें तो हो सकती हैं वैरिकोज वेन्स
जब पैरों की नसें खून को ठीक से ऊपर की तरफ वापस नहीं भेज पातीं, तो नसों में खून जमा होने लगता है। धीरे-धीरे ये नसें फूलकर त्वचा के ऊपर साफ दिखाई देने लगती हैं। इन्हें वैरिकोज वेन्स कहा जाता है। इसमें पैरों में भारीपन, दर्द, सूजन या खुजली जैसी शिकायत हो सकती है। लंबे समय तक खड़े रहने पर परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है। हर वैरिकोज वेन में इलाज की जरूरत नहीं होती, लेकिन अगर पैरों में लगातार दर्द या सूजन रहे, त्वचा का रंग बदलने लगे या कोई घाव बनने लगे तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
पैर में अचानक दर्द और सूजन हो तो सावधान
अगर एक पैर में अचानक दर्द या सूजन शुरू हो जाए तो इसे सामान्य थकान समझकर छोड़ना ठीक नहीं है। कुछ मामलों में यह नस में खून का थक्का बनने यानी डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर जरूरत के मुताबिक डॉप्लर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच करा सकते हैं। इससे पैरों की नसों में ब्लड फ्लो और संभावित ब्लड क्लॉट की जानकारी मिल सकती है। अगर पैर में दर्द या सूजन के साथ अचानक सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो मामला गंभीर हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
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लंबी फ्लाइट में ब्लड क्लॉट का खतरा क्यों बढ़ सकता है?
लंबी दूरी की फ्लाइट में कई घंटे लगातार बैठे रहने से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो सकता है। जिन लोगों में पहले से ब्लड क्लॉट का खतरा ज्यादा है, उन्हें लंबी यात्रा के दौरान खास सावधानी बरतनी चाहिए। यात्रा के दौरान समय-समय पर सीट से उठकर थोड़ा चलना, पैरों और टखनों को हिलाते रहना और पर्याप्त पानी पीते रहना मददगार हो सकता है। शराब से डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है, इसलिए लंबी यात्रा में इसका सेवन करने से बचना बेहतर है।
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पैर में दर्द या सूजन को हर बार सिर्फ थकान मान लेना सही नहीं है। खासकर डायबिटीज, स्मोकिंग, मोटापा, लंबे समय तक बैठे या खड़े रहने की आदत या पहले से नसों से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। अगर पैर में अचानक तेज दर्द, सूजन, रंग में बदलाव या ठंडापन महसूस हो तो खुद से इलाज करने या इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। समय पर समस्या पकड़ में आ जाए तो कई गंभीर जटिलताओं से बचने का मौका मिल सकता है।
