Savita Punia: भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने इतिहास रच दिया है। वह भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने यह खास मुकाम जापान में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में हासिल किया। हॉकी इंडिया ने इस महान उपलब्धि पर सविता की जमकर सराहना की। हॉकी इंडिया ने कहा कि यह सविता के करीब दो दशकों के अनुशासन, मेहनत और बेहतरीन नेतृत्व का नतीजा है। इस शानदार योगदान को सम्मान देने के लिए हॉकी इंडिया ने उन्हें 10 लाख रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा भी की है।
वंदना कटारिया को छोड़ा पीछे
सविता ने भारत की पूर्व स्ट्राइकर वंदना कटारिया के 320 सीनियर इंटरनेशनल मैच खेलने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने एशियन गेम्स में पूल बी में इंडोनेशिया के खिलाफ मैच के दौरान 321वां मैच खेलकर यह रिकॉर्ड अपने नाम किया। हॉकी इंडिया ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "321 कैप। एक असाधारण सफर। द वॉल आज सबसे ऊंची खड़ी है।" ओपन प्ले में शॉट रोकने की काबिलियत और पेनल्टी शूटआउट में बिना घबराए खेलने के कारण 36 साल की सविता को हॉकी की दुनिया में 'द वॉल ऑफ इंडिया' कहा जाता है। उन्होंने 2009 में अपना सीनियर इंटरनेशनल डेब्यू किया था।
नीदरलैंड के खिलाफ खेला था 300वां मैच
सविता ने फरवरी 2025 में एफआईएच हॉकी प्रो लीग में नीदरलैंड के खिलाफ अपना 300वां इंटरनेशनल मैच खेला था। वह वंदना के बाद 300 मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय महिला और पीआर श्रीजेश के बाद ऐसा करने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनी थीं। उन्होंने 20 सितंबर, 2026 को एशियन गेम्स 2026 के ओपनिंग मैच में उज्बेकिस्तान के खिलाफ भारत की 19-0 की जीत के दौरान वंदना के 320 मैचों के ऑलटाइम रिकॉर्ड की बराबरी की थी और सोमवार को उसे तोड़ दिया।
तीन ओलंपिक में लिया हिस्सा
अपने शानदार करियर में सविता ने लगातार बड़े टूर्नामेंट खेले हैं। वह तीन ओलंपिक, दो एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच प्रो लीग जैसे कई अहम टूर्नामेंटों का हिस्सा रही हैं। एक युवा गोलकीपर के रूप में शुरूआत करने वाली सविता समय के साथ भारतीय टीम की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने लंबे समय तक टीम की कप्तानी भी की। जिस वंदना कटारिया का रिकॉर्ड सविता ने तोड़ा है, उन्होंने भी 2009 में ही सविता के साथ डेब्यू किया था। वंदना ने भारत के लिए 320 मैचों में 158 गोल किए और अप्रैल 2025 में संन्यास ले लिया। टोक्यो ओलंपिक में उनकी ऐतिहासिक हैट्रिक को कोई नहीं भूल सकता, जिसके लिए उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।
