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आयुर्वेद के अनुसार अखरोट खाने के क्या हैं फायदे, रोज कितने खाना चाहिए, जानिए सेवन का सही तरीका

Akhrot Benefits In Ayurveda: सर्दियों में अखरोट का सेवन तो खूब किया जाता है। बता दें कि आयुर्वेद में अखरोट को सेहत का खजाना माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो दिमाग को तेज करने से लेकर दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने तक, नियमित अखरोट खाने के कई गजब फायदे हैं। तो चलिए आज एक्सपर्ट से जानते हैं अखरोट रोज खाने का सही तरीका क्या है और कितनी मात्रा फायदेमंद मानी जाती है।

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अखरोट खाने के क्या हैं फायदे

Akhrot Benefits In Ayurveda: हम में से ज्यादातर लोग अखरोट को बस दिमाग तेज करने वाला ड्राई फ्रूट मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद में अखरोट यानी अखरोट को इससे कहीं ज्यादा खास माना गया है। आयुर्वेदिक डॉक्टर और हेल्थ इंफ्लुएंसर चैताली राठौर के अनुसार अखरोट त्वचा की रंगत निखारने से लेकर कमजोरी, थकान, नींद, दांतों की मजबूती और फर्टिलिटी तक में मदद करता है। सही मात्रा और सही तरीके से लिया जाए तो यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। इस लेख में हम आयुर्वेद के अनुसार अखरोट खाने के फायदे, रोज कितने अखरोट खाना सही है और इसका सही उपयोग क्या है, आसान और रोजमर्रा की भाषा में समझेंगे।

त्वचा की रंगत निखारने में कैसे मदद करता है अखरोट

अगर त्वचा बेजान और फीकी लगने लगी है तो आयुर्वेद में अखरोट का एक आसान उपाय बताया गया है। 1 या 2 अखरोट को गाय के दूध के साथ घिसकर बारीक पेस्ट बना लें और चेहरे पर लगाएं। आयुर्वेद के अनुसार यह उपाय त्वचा की रंगत सुधारने और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करता है। नियमित उपयोग से स्किन सॉफ्ट और हेल्दी दिखने लगती है।

दांत और मसूड़ों को मजबूत बनाने में अखरोट

आयुर्वेद में अखरोट के पेड़ की छाल का भी उपयोग बताया गया है। इसकी सूखी छाल को पीसकर दंत मंजन की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इससे दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं और ओरल हेल्थ बेहतर रहती है। पुराने समय में दांतों की मजबूती के लिए ऐसे प्राकृतिक उपाय काफी प्रचलित थे।

थकान, सुस्ती और कमजोरी में अखरोट का दूध

अगर शरीर में हर समय थकान, सुस्ती या कमजोरी महसूस होती है तो अखरोट का मेडिकेटेड दूध फायदेमंद माना जाता है। 3 से 4 अखरोट का पेस्ट या पाउडर बनाकर गाय के दूध में पकाकर लिया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह उपाय मांसपेशियों को ताकत देता है, शारीरिक क्षमता बढ़ाता है और नींद की समस्या में भी मदद करता है।

दाद और जलन की समस्या में आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में अखरोट की कच्ची छाल और पत्तियों से बना काढ़ा दाद और जलन जैसी समस्याओं में उपयोगी माना गया है। डॉक्टर की सलाह से इसे दिन में दो बार लिया जाता है। साथ ही, ताजी पत्तियों को प्रभावित जगह पर लगाने से जलन और परेशानी धीरे-धीरे कम हो सकती है।

फर्टिलिटी और स्पर्म काउंट बढ़ाने में अखरोट

आयुर्वेद के अनुसार अखरोट फर्टिलिटी और स्पर्म क्वालिटी सुधारने में मदद करता है। भीगे हुए अखरोट को खजूर के साथ लेने की सलाह दी जाती है। पित्त प्रकृति वाले लोग इसे गुनगुने गाय के दूध के साथ ले सकते हैं। सही मात्रा में सेवन से स्पर्म की गुणवत्ता और ताकत बढ़ाने में सहायता मिलती है।

रोज कितने अखरोट खाना है और सही तरीका क्या है

आयुर्वेद के अनुसार रोज 1 से 3 अखरोट पर्याप्त माने जाते हैं। इन्हें भिगोकर खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। किसी भी आयुर्वेदिक उपाय को लंबे समय तक अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना हमेशा बेहतर रहता है।

अखरोट आयुर्वेद का एक ऐसा प्राकृतिक सुपरफूड है, जो सही तरीके और सही मात्रा में लिया जाए तो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। छोटे-छोटे आयुर्वेदिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर आप सेहत में बड़ा फर्क महसूस कर सकते हैं।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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