Type 2 Diabetes and Liver Disease: भारत में डायबिटीज अब सिर्फ शुगर की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसी चुपचाप बढ़ने वाली समस्या बनती जा रही है, जो शरीर के कई अहम अंगों को प्रभावित कर रही है। अब तक इसे दिल और किडनी की बीमारियों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन हाल ही में सामने आई एक बड़ी स्टडी ने खुलासा किया है कि डायबिटीज का असर लीवर पर भी तेजी से पड़ रहा है। इसमें भी चिंताजनक बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है। इसलिए इसकी समय-समय पर जांच कराते रहना जरूरी है।
क्या कहते हैं रिपोर्ट के आंकड़े
प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Regional Health - Southeast Asia में प्रकाशित DiaFib-Liver Study के मुताबिक, भारत में टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हर चार में से एक व्यक्ति के लीवर को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इस अध्ययन में देशभर के 27 अस्पतालों और क्लीनिकों से जुड़े 9,202 वयस्क मरीजों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट बताती है कि लगभग हर सात में से एक मरीज की स्थिति एडवांस स्टेज तक पहुंच चुकी है, जबकि हर 20 में से एक में लिवर सिरोसिस जैसे गंभीर संकेत पाए गए हैं।
घटने लगता है लिवर साइज
इस स्टडी की एक अहम खोज यह भी है कि लीवर का खतरा सिर्फ मोटे लोगों तक सीमित नहीं है। सामान्य वजन वाले लोगों में भी लीवर की गंभीर स्कारिंग देखी गई। कई मामलों में लीवर में फैट कम था, लेकिन अंदरूनी नुकसान ज्यादा था। इस कंडीशन को बर्न्ट-आउट लीवर की स्थिति कहा जाता है। यानी जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, वैसे-वैसे लीवर का साइज सिकुड़ता जाता है और उसकी कार्यक्षमता घटती जाती है।
तेजी से बढ़ी मरीजों की संख्या
वैश्विक स्तर पर भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में दुनिया भर में 50 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं और 2045 तक यह संख्या 78 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। भारत इस संकट का बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं और बड़ी संख्या प्री-डायबिटिक अवस्था में है।
