Thyroid Tips: थायरॉइड में क्या खाना चाहिए? क्या गोभी और ब्रोकली छोड़नी पड़ती है? वजन बढ़ने पर डाइट कितनी कम करें? डॉ. हंसा योगेंद्र ने अपने एक वीडियो में हाइपोथायरॉइड और हाइपरथायरॉइड की अलग-अलग जरूरतों पर बात की है। उन्होंने समझाया कि खानपान और योग चुनते समय अपनी स्थिति को समझना क्यों जरूरी है।
थायरॉइड की रिपोर्ट में गड़बड़ी दिखते ही अक्सर सबसे पहले खाने की थाली बदल जाती है। कोई चावल बंद कर देता है। कोई गोभी से दूरी बना लेता है। वजन बढ़ रहा हो तो नाश्ता छोड़ने और रात का खाना बहुत कम करने की कोशिश शुरू हो जाती है। लेकिन क्या हर व्यक्ति के लिए यही रास्ता सही है?
डॉ. हंसा योगेंद्र ने अपने वीडियो में थायरॉइड से जुड़ी ऐसी ही उलझनों पर बात की है। उनका जोर शरीर की जरूरत समझकर खानपान और दिनचर्या अपनाने पर है। थायरॉइड धीमा काम कर रहा हो और जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो, तो दोनों स्थितियों की सलाह एक जैसी नहीं हो सकती।
हाइपोथायरॉइड में वजन बढ़े तो क्या करें
हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती। इससे थकान, कब्ज, ठंड ज्यादा लगने और वजन बढ़ने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। डॉ. हंसा योगेंद्र ने बताया कि इस स्थिति में बहुत कम खाना या बेहद सख्त डाइट अपनाना समाधान नहीं है।
सोचिए, पहले से शरीर में सुस्ती है। उस पर भोजन भी इतना कम कर दिया कि दिनभर काम करने की ताकत नहीं बची। ऐसे में वजन घटाने की कोशिश रोजमर्रा की दिनचर्या को और मुश्किल बना सकती है।
इसलिए केवल यह न देखें कि कितना खा रहे हैं। यह भी देखें कि खाने में क्या है। दाल, दही, पनीर जैसे प्रोटीन स्रोत, सब्जियां और उचित मात्रा में साबुत अनाज भोजन का हिस्सा बनाएं। हाइपोथायरॉइड का इलाज और डॉक्टर की बताई दवा भी जरूरी हैं। केवल डाइट बदलने से हार्मोन की कमी पूरी नहीं होती।
आयोडीन जरूरी है, लेकिन ज्यादा लेना क्यों सही नहीं
डॉ. हंसा योगेंद्र ने थायरॉइड हार्मोन बनने में आयोडीन की भूमिका समझाई है। हालांकि, जरूरी होने का मतलब यह नहीं कि इसकी मात्रा जितनी बढ़ाएंगे, उतना फायदा मिलेगा। घर में इस्तेमाल होने वाला आयोडीनयुक्त नमक इसका एक स्रोत है। आयोडीन के लिए नमक ज्यादा खाने की जरूरत नहीं। बिना डॉक्टर की सलाह आयोडीन की गोलियां या दूसरे सप्लीमेंट शुरू करना भी उचित नहीं है। आयोडीन की कमी और अधिकता, दोनों थायरॉइड की परेशानी से जुड़ी हो सकती हैं।
सेलेनियम के लिए क्या खाएं
डॉ. हंसा योगेंद्र ने सेलेनियम देने वाले खाद्य पदार्थों का भी जिक्र किया है। इनमें मेवे, सूरजमुखी के बीज, साबुत अनाज, दालें और मशरूम शामिल हैं। इन्हें खाने में शामिल करने के लिए अलग से कोई मुश्किल डाइट बनाने की जरूरत नहीं। कभी दाल बदल लें। कभी सब्जी में मशरूम रखें। थोड़े बीज भोजन में जोड़ सकते हैं। मकसद खाने में विविधता रखना है।
सेलेनियम थायरॉइड हार्मोन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। लेकिन किसी एक खाद्य पदार्थ या सप्लीमेंट को इलाज समझना सही नहीं। इसकी ज्यादा मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है और हर थायरॉइड मरीज को सेलेनियम सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती।
क्या थायरॉइड में गोभी और ब्रोकली छोड़ देनी चाहिए
थायरॉइड की परेशानी में यह सवाल खूब पूछा जाता है। डॉ. हंसा योगेंद्र ने बताया कि अधिकतर लोगों को पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकली जैसी सब्जियां पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। इन सब्जियों में कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं, जो खास परिस्थितियों में आयोडीन के इस्तेमाल को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन पर्याप्त आयोडीन लेने वाले व्यक्ति की थाली में सामान्य मात्रा में इनका होना अक्सर चिंता की वजह नहीं होता।
रोज बहुत ज्यादा कच्ची गोभी खाना या उसका जूस पीना और भोजन में थोड़ी पकी हुई गोभी लेना अलग बातें हैं। इसलिए सुनी-सुनाई सलाह पर पौष्टिक सब्जियों को थाली से हटाने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार निर्णय लें।
हाइपोथायरॉइड में योग और अनुलोम-विलोम कैसे करें
डॉ. हंसा योगेंद्र ने योग के साथ दिनभर नियमित रूप से चलने-फिरने की अहमियत बताई है। सुबह कुछ देर अभ्यास करने के बाद बाकी पूरा दिन बैठे रहना पर्याप्त गतिविधि नहीं है। काम के बीच उठें। थोड़ा चलें। शरीर की क्षमता के अनुसार हल्की स्ट्रेचिंग करें।
अनुलोम-विलोम को नियमित अभ्यास में शामिल किया जा सकता है। सांस सहज रखें। जोर लगाकर सांस खींचने या लंबे समय तक रोकने की कोशिश न करें। तेज और सक्रिय करने वाले प्राणायाम का चुनाव अपनी सेहत और प्रशिक्षक की सलाह के अनुसार करें।
योग को सहायक अभ्यास की तरह देखें। किसी आसन या प्राणायाम से थायरॉइड ठीक होने और दवा बंद करने का दावा भरोसेमंद नहीं माना जा सकता।
वजन ज्यादा घटे तो भोजन और चाय-कॉफी पर ध्यान दें
हाइपरथायरॉइड में काफी वजन घटने पर डॉ. हंसा योगेंद्र ने पर्याप्त कैलोरी और प्रोटीन लेने की जरूरत बताई है। भोजन में दाल, दही, पनीर या अपनी पसंद के दूसरे प्रोटीन स्रोत रखें। जरूरत के अनुसार डाइटीशियन से मात्रा तय कराएं। कैल्शियम और विटामिन डी पर भी ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि अनियंत्रित हाइपरथायरॉइड हड्डियों को प्रभावित कर सकता है।
