Autistic pride day साल के जून माह की 18 तारीख को मनाया जाता है। जिसे मनाने का कारण ऑटिज्म से पीड़ित लोगों को किसी भी तरह के भेदभाव से बचाना है। कुछ ऐसे रोग होते हैं जो बच्चे जन्म के साथ ही लेकर पैदा होते हैं। उनमें से ही एक रोग है ऑटिज्म, जिसे समझना काफी मुश्किल काम है। लेकिन आज हम आपको बच्चों में दिखने वाले कुछ लक्षण बताने जा रहे हैं। जो ऑटिज्म के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसके साथ ही आपको ये भी जानना चाहिए कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों का कैसे ख्याल रखना चाहिए।
क्या है ऑटिज्म? (What is Autism?)
ऑटिज्म एक दिमागी डिसऑर्डर है, जो किसी व्यक्ति के व्यवहार और और शरीर की बनावट को भी प्रभावित कर सकता है। ऑटिज्म के लक्षण शुरुआत से ही देखने को मिल जाते हैं, लेकिन कुछ बच्चों में यह काफी देर से नजर आते हैं। आइए जानते हैं ऑटिज्म के कुछ लक्षण जो अक्सर बच्चों में जन्म के कुछ महीने बाद ही दिखाई देने लगते हैं।ऑटिज्म के लक्षण (Symptoms of Autism)
- अपना नाम सुनने के बाद भी कोई रिएक्ट न करना।
- दूसरे बच्चों के साथ मेलजोल न बढ़ाना, हमेशा अकेले रहना।
- बोलने में देरी होना, या जीभ को उठाने में कठिनाई।
- बिना किसी बात का मतलब समझे,एक ही बात को बार-बार दोहराना।
- हमेशा अकेले और चुपचाप घंटों तक बैठे रहना।
- शरीर के अंगों का ठीक से विकास न होना।
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे का ख्याल कैसे रखें
ऐसे बच्चे की दिनचर्या को आप फिक्स करने की कोशिश करें। जिसमें उसके खाने, खेलने और सोने का समय शामिल हो।ऐसे बच्चों को किसी बात को समझाने के लिए शब्दों की अपेक्षा चित्रों का प्रयोग करें।
ऐसे बच्चों को बोलना सिखाने के लिए आपको हल्के-फुल्के शब्दों का अभ्यास कराना चाहिए।
इन बच्चों को बहुत देर तक अकेला न रहने दें, इसकी जगह उनके सामाजिक संपर्क को बढ़ाएं।
