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इस लिमिट से कम हुआ स्पर्म काउंट तो बच्चा पैदा करना होगा मुश्किल,दुनिया भर में बजी खतरे की घंटी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 17, 2022, 12:58 PM IST

Sperm count in Male: साल 1973 से 2018 के बीच औसतन हर साल 1.2 फीसदी स्पर्म काउंट में गिरावट आ रही थी। लेकिन अगर इसी डाटा को साल 2000 के बाद से देखा जाय तो स्पर्म काउंट में सालाना 2.6 फीसदी की दर से गिरावट आ रही है। जिसका सीधा असर प्रजनन क्षमता पर पड़ रहा है।

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पुरूषों पर चौकाने वाला खुलासा

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • साथ ही कम स्पर्म काउंट की वजह से गंभीर बीमारी होने का खतरा भी है।
  • दुनिया भर के पुरूषों के स्पर्म काउंट में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।
  • 53 देशों के 57 हजार पुरूषों पर रिसर्च किया गया।

Sperm count in Male: भले ही दुनिया की आबादी 800 करोड़ पहुंच गई है। लेकिन एक नई रिसर्च ने दुनिया भर में वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। ऑक्सफोर्ड अकेडिमक में छपे रिसर्च के अनुसार दुनिया भर में पुरूषों के स्पर्म काउंट में तेजी से गिरावट आ रही है। जिसका असर आने वाले दिन मनुष्य के प्रजनन दर में हो सकता है। यानी पुरूषों में बच्चे पैदा करने की क्षमता कम हो रही है। रिसर्च के अनुसार, पुरूषो में स्पर्म काउंट प्रति मिली लीटर 104 से गिरकर 49 पर आ गया है। यानी 50 फीसदी से ज्यादा स्पर्म काउंट में गिरावट आई है।

इस तरह गिर रहा है स्पर्म काउंट

रिसर्च पर यूरो न्यूज से बात करते है हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि साल 1973 से 2018 के बीच औसतन हर साल 1.2 फीसदी स्पर्म काउंट में गिरावट आ रही थी। लेकिन अगर इसी डाटा को साल 2000 के बाद से देखा जाय तो स्पर्म काउंट में सालाना 2.6 फीसदी की दर से गिरावट आ रही है। कमी की वजह क्या है, इसकी ठोस वजह तो रिसर्च में सामने नहीं आई है। लेकिन ऐसे अनुमान है कि लाइफस्टाइल, प्रदूषण और केमिकल के इस्तेमाल का असर हुआ है। साथ ही कम स्पर्म काउंट की वजह से गंभीर बीमारी होने, जैसे टेस्टिकुलर कैंसर आदि का जोखिम भी बढ़ता है। रिसर्च में दुनिया भर के 53 देशों के 57 हजार पुरूषों के स्पर्म की जांच की गई है।

इस लिमिट से नीचे पर गर्भधारण पर पड़ता है असर

यूरो न्यूज के अनुसार आम तौर पर अगर प्रति मिली लीटर स्पर्म काउंट 40-50 मिलियन के स्तर पर आ जाता है, तो यह खतरे की घंटी है, क्योकि इसका असर बच्चे पैदा करने की क्षमता पर पड़ सकता है। और मौजूदा रिसर्च के अनुसार लैटिन अमेरिकी देशों से लेकर यूरोप, एशिया के देशों में पुरूषों के स्पर्म काउंट में कमी आई है। ऐसे में अगर , पुरूषों में प्रति मिली लीटर 40-50 मिलियन स्पर्म काउंट से नीचे आ जाता है, तो उसका सीधा असर प्रजनन क्षमता पर पड़ेगा।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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