नई दिल्ली. भारत में दादी, नानी और बुजुर्ग द्वारा बच्चों की आंखों में काजल लगाने का रिवाज है। मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार काजल लगाने से बच्चों को नजर नहीं लगती और आंखें भी बड़ी बड़ी दिखाई देती है। अब बात आती है शिशु के आंखों के सेफ्टी की। क्या ये काजल बेबीज के आंखों के लिए सही है? इससे शिशु के स्किन और आंखों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? आइए काजल के चक्कर में हो रहे नुकसान के बारे में जान लेते हैं।
इन्फेक्शन का रिस्क
पैरेंट्स अपनी उंगली से बच्चों को काजल लगाते हैं। इससे हाथों की बैक्टीरिया भी शिशु के आंखों में जा सकते हैं। इसके अलावा नहाने के समय भी काजल, मुंह के जरिए अंदर जा सकता है। दरअसल यह काजल लीड का बना होता है जो शिशु के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है।
वाटरी आईज
बच्चे बेहद नाजुक होते हैं। कई बार काजल लगाने के बाद उनकी आंखों से आंसू आने लग जाते हैं। इसका सीधा मतलब एलर्जी से है। कई दफा आंखों के किनारे काजल इकट्ठे हो जाते हैं। जिससे आंखों से पानी निकलने लगता है। ऐसे में उन्हें कॉटन की मदद से तुरंत पोछ देना जरूरी होता है।
खुजली की समस्या
काजल में 50 परसेंट से ज्यादा लेड की मात्रा होती है जो बच्चों में इंफेक्शन को पैदा कर सकता है। जिससे आंखों में खुजली और रेडनेस जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
त्वचा पर बुरा प्रभाव
बच्चे बेहद केयर लेस होते हैं। ऐसे में कब उनकी फिंगर्स उनके आंखों पर चली जाए कोई ठिकाना नहीं होता। फिर इनके हाथों से इन्फेक्शन कई जगह फैल सकता है। चेहरे पर दाने और रैशेज जैसी समस्या हो सकती है। छोटे बच्चों को लुक देने के लिए उनके पैरेंट्स, कई बार जरूरत से ज्यादा काजल लगा देते हैं। डॉक्टर का मत इसके उलट है। डॉक्टर्स के मुताबिक, शिशु के लिए काजल नुकसानदेह है।
