Pulmonary Embolism: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर सांस फूलने, सीने में दर्द या पैरों में सूजन जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यही लक्षण एक गंभीर और जानलेवा बीमारी का संकेत हो सकते हैं, जिसे पल्मोनरी एंबोलिज्म (Pulmonary Embolism-PE) कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें तुरंत इलाज न मिलने पर स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। इतना ही नहीं समय रहते इलाज न मिलने से यह स्थिति जानलेवा तक हो सकती है। आइए जानते हैं इसके बारे में...
क्या होता है Pulmonary Embolism?
Pulmonary Embolism उस कंडीशन को कहा जाता है जब शरीर के किसी हिस्से, खासतौर पर पैरों की नसों में बना रक्त का थक्का (Blood Clot), टूटकर फेफड़ों की धमनियों तक पहुंच जाता है। यह थक्का फेफड़ों में रक्त प्रवाह को रोक देता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है।
ज्यादातर मामलों में यह समस्या डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) से जुड़ी होती है, जिसमें पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। अगर यह थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो जान का जोखिम पैदा हो जाता है।
पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लक्षण? - Pulmonary Embolism Symptoms
अचानक सांस फूलना
अगर बिना ज्यादा मेहनत किए अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो इसे हल्के में न लें। यह पल्मोनरी एम्बोलिज्म का सबसे आम संकेत माना जाता है।सीने में तेज दर्द
पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने पर फेफड़ों में ब्लॉकेज होने पर सीने में चुभन या तेज दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द गहरी सांस लेने, खांसने या हिलने-डुलने पर और बढ़ सकता है।खांसी के साथ खून आना
पल्मोनरी एम्बोलिज्म से पीड़ित कुछ मरीजों में सूखी खांसी के साथ खून मिला बलगम भी निकल सकता है। यदि ऐसी स्थिति दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।दिल की धड़कन तेज होना
अगर आपका अचानक दिल बहुत तेजी से धड़कने लगे या घबराहट महसूस हो, तो यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है। जो पल्मोनरी एम्बोलिज्म का एक बड़ा संकेत है।पैरों में सूजन और दर्द
एक पैर, खासकर पिंडली में दर्द, गर्माहट या सूजन DVT का संकेत हो सकता है, जो आगे चलकर पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसे खतरे का कारण बन सकता है।किन लोगों में ज्यादा खतरा होता है?
लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोग, मोटापा, धूम्रपान, गर्भावस्था, हाल ही में हुई सर्जरी, कैंसर और हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल पल्मोनरी एम्बोलिज्म के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके अलावा ज्यादा लंबी यात्राएं करने वाले लोगों में भी ब्लड क्लॉट बनने की संभावना बढ़ जाती है।
