Forex Reserve: देश का विदेशी मुद्रा भंडार सात अगस्त को समाप्त सप्ताह में 14.14 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इसके एक सप्ताह पहले विदेशी मुद्रा भंडार 10.512 अरब डॉलर की बढ़त के साथ 692.87 अरब डॉलर रहा था। इस साल 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.49 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि पश्चिम एशिया में टकराव शुरू होने के बाद कई हफ्तों तक इसमें गिरावट दर्ज की गई। संकट के दौरान रुपये पर दबाव बनने से रिजर्व बैंक को डॉलर बेचकर विदेशी मुद्रा बाजार में दखल देना पड़ा।
आरबीआई के आंकड़ों से मिली जानकारी
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वालीं विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 9.95 अरब डॉलर बढ़कर 574.62 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर के संदर्भ में इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है। पिछले महीने सरकार और आरबीआई ने देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए एफसीएनआर (बी) समेत कई उपायों की घोषणा की थी। इन प्रयासों से अब तक करीब 40 अरब डॉलर प्राप्त हो चुके हैं।
स्वर्ण भंडार में भी उछाल
इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 3.99 अरब डॉलर बढ़कर 108.74 अरब डॉलर हो गया। विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 7.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.74 अरब डॉलर पर पहुंच गए। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में देश का आरक्षित भंडार भी 11.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.89 अरब डॉलर हो गया।
विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने के फायदे
विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की आर्थिक सुरक्षा ढाल की तरह काम करता है। भारत के पास पर्याप्त फॉरेक्स रिजर्व होने से कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी जैसे जरूरी आयात के भुगतान में मदद मिलती है और वैश्विक संकट के समय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता है। रिजर्व बढ़ने से रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने में भी मदद मिलती है, जिससे आयातित महंगाई पर दबाव कम रहता है। मजबूत रिजर्व से देश की वैश्विक साख बढ़ती है, विदेशी निवेश को भरोसा मिलता है और आर्थिक संकट के दौरान बाहरी मदद पर निर्भरता घटती है।
