हेल्थ

पुरुष ही नहीं महिलाओं में भी बांझपन का खतरा बढ़ा रहा लैपटॉप! डॉक्टर से जानें कैसे खराब हो प्रजनन क्षमता

लैपटॉप आज हमारे दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। काम के चलते लोग लैपटॉप का इस्तेमाल आज बहुत ज्यादा होता जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये लैपटॉप आपकी फर्टिलिटी पर काफी बुरा असर डाल रहा है। जी हां आज हम आपको लैपटॉप के इस्तेमाल के कारण बढ़ने वाली इंफर्टिलिटी के बारे में बताने जा रहे हैं।

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leptop increase infertility

Fertility Health : आजकल टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके अधिक इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। खासतौर पर काम के चलते लैपटॉप का ज्याादा इस्तेमाल आपकी फर्टिलिटी के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। बहुत से लोग लैपटॉप का इस्तेमाल गोद में रखकर लंबे समय तक करते हैं। ऐसा करना पुरुषों और महिलाओं दोनों की फर्टिलिटी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। आपकी सेहत से जुड़े इस महत्वपूर्ण बिंदू को लेकर हमने बात की CIFAR, Gurugram के IVF Expert Dr. Puneet Rana Arora से...

लैपटॉप का शुक्राणुओं पर असर

Dr. Puneet Rana Arora के अनुसार, लैपटॉप से निकलने वाली हीट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (EMR) हमारी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। दरअसल लैपटॉप से उत्पन्न होने वाली गर्मी पुरुषों के अंडकोष के तापमान को बढ़ा देती है। जिससे शुक्राणु के उत्पादन और गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो गोद में रखकर लैपटॉप का उपयोग करने से अंडकोष का तापमान लगभग 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। जो आपकी फर्टिलिटी पर बुरा असर डालती है।

लैपटॉप का अंडाणुओं पर असर

Dr. Puneet Rana Arora के अनुसार, महिलाओं में लैपटॉप का रेडिएशन गर्भाशय और अंडाशय के सामान्य कार्य में बाधा उत्पन्न कर सकता है। लगातार एक्सपोजर से हार्मोन असंतुलन, मासिक धर्म की अनियमितता और ओवुलेशन संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जो आगे चलकर गर्भधारण में कठिनाई पैदा कर सकती हैं।

कैसे करें बचाव?

Dr. Puneet Rana Arora की सलाह है कि लैपटॉप का इस्तेमाल सीधे गोद में रखकर करने से बचें। इसकी जगह आप उसका उपयोग किसी टेबल या लैपटॉप स्टैंड पर करें। इसके साथ ही हर 1-2 घंटे के बाद 10-15 मिनट का ब्रेक जरूर लें और शरीर को आराम दें। जागरूकता और सही आदतें अपनाकर न केवल प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि इससे रीढ़, आंखों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से निजात पाई जा सकती है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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