हेल्थ

दिमागी क्षमता को प्रभावित कर सकता है शरीर का बढ़ा हुआ वजन, हाल ही में हुए शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

वैश्विक स्तर पर मोटापे की दर में काफी तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। जिसके पीछे खानपान से लेकर लाइफस्टाइल तक कई चीजें जिम्मेदार हैं। हाल ही में हुए एक अध्ययन में पता चला है कि अधिक वजन होने से चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है।

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obesity and mental health

वैश्विक स्तर पर मोटापे की दर में काफी तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। जिसके पीछे खानपान से लेकर लाइफस्टाइल तक कई चीजें जिम्मेदार हैं। हाल ही में पशुओं पर किए गए अध्ययन से पता चला कि मोटापा और खराब मानसिक स्वास्थ्य ये दोनों ही स्थितियां आपसी अंतःक्रिया से जुड़ी हो सकती हैं। चूहों पर किए गए इस शोध में आहार-प्रेरित मोटापे को चिंता जैसे लक्षणों, मस्तिष्क संकेतन में परिवर्तन तथा आंत के सूक्ष्म जीवों में अंतर से जोड़ा गया है। जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

कहां हुआ शोध?

अमेरिका के जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर और पोषण विभाग की अध्यक्ष डेजीरी वांडर्स ने कहा, "हमारे निष्कर्षों से पता चलता है कि मोटापा चिंता जैसे व्यवहार को जन्म दे सकता है, जो संभवतः मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और आंत के स्वास्थ्य में परिवर्तन के कारण हो सकता है।"

मोटापे के अन्य खतरों जैसे टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोग के अलावा, अध्ययन में मस्तिष्क स्वास्थ्य पर इसके संभावित प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें एक माउस मॉडल का उपयोग किया गया। जो मनुष्यों में देखी जाने वाली मोटापे से संबंधित कई समस्याओं को विकसित करता है।

चूहों पर किया गया शोध

टीम ने छह सप्ताह के चूहों को कम वसा वाले आहार (16) और 21 सप्ताह के लिए उच्च वसा वाले आहार (16) पर रखा। जैसा कि पूर्वानुमान लगाया गया था, उच्च वसायुक्त आहार लेने वाले चूहों का वजन काफी अधिक था तथा कम वसायुक्त आहार लेने वाले चूहों की तुलना में उनके शरीर में वसा भी काफी अधिक थी। व्यवहार संबंधी परीक्षणों में, शोधकर्ताओं ने पाया कि मोटे चूहों ने दुबले चूहों की तुलना में अधिक चिंताजनक व्यवहार प्रदर्शित किया, जैसे कि ठिठक जाना (खतरे की आशंका के प्रति चूहों द्वारा प्रदर्शित सुरक्षात्मक व्यवहार)। शोध में शामिल चूहों के मेटाबॉलिज्म के सिस्टम में भी अलग-अलग परिवर्तन देखने को मिले। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने मोटे चूहों की तुलना में दुबले चूहों में आंत के बैक्टीरिया की संरचना में स्पष्ट अंतर देखा।

वांडर्स ने कहा, "इन निष्कर्षों का सार्वजनिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत निर्णयों दोनों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। अध्ययन मानसिक स्वास्थ्य पर मोटापे के संभावित प्रभाव को उजागर करता है, विशेष रूप से चिंता के संदर्भ में। आहार, मस्तिष्क स्वास्थ्य और आंत माइक्रोबायोटा के बीच संबंधों को समझकर, यह शोध सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को निर्देशित करने में मदद कर सकता है जो विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में मोटापे की रोकथाम और प्रारंभिक हस्तक्षेप पर ध्यान केंद्रित करते हैं।"

इन निष्कर्षों को फ्लोरिडा के ऑरलैंडो में चल रहे अमेरिकन सोसायटी फॉर न्यूट्रिशन की प्रमुख वार्षिक बैठक, न्यूट्रिशन 2025 में प्रस्तुत किया जाएगा।

इनपुट - भाषा

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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