Mindful Eating in Children: आजकल ज्यादातर घरों में बच्चों को खाना खिलाने के लिए मोबाइल या टीवी का सहारा लिया जाता है। इससे बच्चे तो खाना खा लेते हैं, लेकिन उनका ध्यान खाने पर नहीं, बल्कि स्क्रीन पर रहता है। धीरे-धीरे यह आदत उनकी सेहत पर भी असर डाल सकती है। ऐसे में बच्चों को माइंडफुल ईटिंग, यानी ध्यान लगाकर खाना खाने की आदत सिखाना बहुत जरूरी है। असिस्टेंट प्रोफेसर और रजिस्टर्ड डायटीशियन डॉ. अंकिता सिंह कहती हैं कि अगर शुरुआत से ही कुछ आसान आदतें अपनाई जाएं, तो बच्चे बिना मोबाइल के भी आराम से और सही तरीके से खाना खाना सीख सकते हैं।
बच्चों को समझाएं कि खाना खाते समय ध्यान क्यों जरूरी है
डॉ. अंकिता सिंह के अनुसार, बच्चों को प्यार से समझाएं कि खाना खाते समय सिर्फ खाने पर ध्यान देना चाहिए। जब बच्चा मोबाइल देखते हुए खाता है, तो उसे यह भी महसूस नहीं होता कि उसने कितना खा लिया है। इसलिए खाने के समय टीवी और मोबाइल बंद रखें और बच्चे को आराम से बैठकर भोजन करने दें।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: IBS का शिकार पुरुष नहीं, महिलाएं ज्यादा क्यों बनती हैं, जानिए इसके पीछे की असली वजह
परिवार के साथ बैठकर खाएं खाना
बच्चे अपने घर वालों को देखकर ही सीखते हैं। अगर पूरा परिवार एक साथ बैठकर बिना मोबाइल के खाना खाएगा, तो बच्चा भी यही आदत अपनाएगा। साथ बैठकर खाना खाने से बच्चों का ध्यान खाने पर रहता है और परिवार के साथ समय बिताने का मौका भी मिलता है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: दिल और दिमाग ही नहीं, लंबी उम्र के लिए मजबूत जांघें भी हैं जरूरी, 90% लोग हैं अनजान
हर दिन दें संतुलित और घर का बना खाना
डॉ. अंकिता सिंह कहती हैं कि बच्चों की थाली में दाल, अनाज, सब्जी और सलाद जरूर होना चाहिए। नाश्ते में बेसन का चीला, इडली-सांभर या पनीर और सब्जियों वाला पराठा अच्छे विकल्प हैं। ऐसा खाना बच्चों को जरूरी पोषण देने के साथ उन्हें लंबे समय तक एक्टिव भी रखता है।
दोपहर के खाने को बनाएं स्वादिष्ट और आसान
अक्सर दोपहर में बच्चों की भूख कम होती है। ऐसे में वेजिटेबल खिचड़ी, वेजिटेबल बिरयानी, कढ़ी-चावल या राजमा-चावल जैसे वन-पॉट मील दिए जा सकते हैं। ये खाने में स्वादिष्ट होते हैं और बच्चों के लिए पौष्टिक भी।
छोटी-छोटी भूख में दें मौसमी फल
बार-बार चिप्स या पैकेट वाले स्नैक्स देने की बजाय बच्चों को मौसमी फल खिलाएं। तरबूज, आम, चीकू और लीची जैसे फल उनके लिए अच्छे विकल्प हैं। अगर बच्चा फल नहीं खाना चाहता, तो इन्हीं फलों की स्मूदी बनाकर भी दी जा सकती है।
यह भी रखें ध्यान
डॉ. अंकिता सिंह का कहना है कि बच्चों में माइंडफुल इटिंग की आदत धीरे-धीरे बनती है। अगर माता-पिता खुद अच्छी मिसाल पेश करें, खाने के समय स्क्रीन से दूरी रखें और घर का संतुलित भोजन दें, तो बच्चा भी बिना किसी दबाव के अच्छी खाने की आदतें सीख जाता है। यही छोटी-छोटी आदतें आगे चलकर उसकी अच्छी सेहत की मजबूत नींव बनती हैं।
