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IBS का शिकार पुरुष नहीं, महिलाएं ज्यादा क्यों बनती हैं, जानिए इसके पीछे की असली वजह

IBS In Women: क्या आपने कभी सोचा है कि IBS यानी इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा क्यों पाया जाता है? जानिए आखिर इसके पीछे की वजह क्या है।

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महिलाओं में क्यों बढ़ रहे IBS के मामले

IBS In Women: अगर आपको अक्सर पेट में दर्द, गैस, पेट फूलना, कब्ज या बार-बार टॉयलेट जाने की समस्या रहती है, तो इसे सिर्फ खराब खाना या कमजोर पाचन समझकर नजरअंदाज न करें। कई बार ये IBS यानी इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का संकेत हो सकता है। यह ऐसी समस्या है जिसमें आंतें ठीक से काम नहीं कर पातीं और पेट से जुड़ी दिक्कतें बार-बार होने लगती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह परेशानी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। ऐसा सिर्फ एक वजह से नहीं, बल्कि शरीर में होने वाले कुछ प्राकृतिक बदलावों और तनाव जैसी चीजों के कारण भी हो सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर महिलाओं में IBS का खतरा ज्यादा क्यों रहता है।

महिलाओं में क्यों ज्यादा होती है यह परेशानी

डॉक्टरों के मुताबिक महिलाओं के शरीर में समय-समय पर होने वाले हार्मोनल बदलाव पेट की सेहत को भी प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि महिलाओं की आंतें कई बार ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। इससे पेट दर्द, गैस, कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं जल्दी होने लगती हैं।

पीरियड्स के समय बढ़ सकते हैं लक्षण

कई महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में पेट से जुड़ी परेशानियां ज्यादा महसूस होती हैं। कुछ महिलाओं में गर्भावस्था या मेनोपॉज के दौरान भी यह समस्या बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन दिनों शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनका असर पाचन पर भी पड़ता है।

तनाव का भी पड़ता है सीधा असर

हमारा दिमाग और पेट एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। जब कोई व्यक्ति ज्यादा तनाव, चिंता या मानसिक दबाव में रहता है, तो उसका असर पेट पर भी दिखाई देता है। यही वजह है कि तनाव बढ़ने पर IBS के लक्षण भी ज्यादा परेशान कर सकते हैं।

आंतों का संतुलन बिगड़ना भी हो सकता है कारण

हमारी आंतों में कुछ अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो खाना पचाने में मदद करते हैं। अगर इनका संतुलन बिगड़ जाए, तो पाचन संबंधी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाओं में यह बदलाव IBS की संभावना को बढ़ा सकता है।

समय रहते इलाज कराना है सबसे जरूरी

अगर पेट दर्द, कब्ज, दस्त या पेट फूलने जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से बीमारी की पहचान हो सकती है और सही इलाज शुरू किया जा सकता है। साथ ही संतुलित खानपान, तनाव कम करना, अच्छी नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि से भी IBS के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए बार-बार होने वाली पेट की परेशानी को हल्के में लेने की गलती न करें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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