नई दिल्ली : शरीर में खून उतना ही आवश्यक होता है, जितना की सांसे होती हैं। तथा खून की कमी होने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है। जब आपकी बॉडी में रेड ब्लड सेल्स तथा हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, इसी को एनीमिया भी कहते हैं। ऐसे में आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं मौजूद नहीं होती हैं, जो शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन का प्रवाह करें।
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला ऐसा ही एक प्रोटीन होता है। जिसकी मदद से ऑक्सीजन आपके फेफड़ों और अन्य अंगों तक पहुंचती है। हालांकि जब ऐसा नहीं होता तब आपको थकान, चक्कर आना आदि महसूस हो सकता है। ऐसा होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
- पहला जब आपके शरीर से खून का बहुत रिसाव हो जाए।
- दूसरा जब शरीर में किसी कारणवश लाल रक्त कोशिकाएं बनना ही कम हो जाएं।
- तीसरा जब आपके शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के पैदा होने के स्तर से ज्यादा उनके खत्म होने का स्तर है।
एनीमिया के प्रकार
शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया कई प्रकार का हो सकता है, जैसे आयरन डिफिशिएंसी एनीमिया, सिकल सेल एनीमिया आदि। हालांकि आयरन डिफिशिएंसी बहुत आम है, ऐसा तब होता है जब शरीर में हीमोग्लोबिन का उत्पादन करने के लिए पर्याप्त मात्रा में आयरन नहीं होता है।
ऐसा खासतौर से महिलाओं में हो सकता है, जब उनके पीरियड्स चल रहे होते हैं। मासिक चक्र के दौरान हैवी ब्लीडिंग होने के कारण शरीर में खून की कमी हो जाती है, जिससे आप एनीमिया का शिकार हो सकते हैं। साथ ही ऐसा गर्भावस्था में हो सकता है, विटामिन बी 12 युक्त कम आहार लेने पर हो सकता है या फिर ऐसा आपकी पुरानी हेल्थ हिस्ट्री तथा जेनेटिक्स के कारण भी होता है।
एनीमिया का पीरियड्स से क्या संबंध है?
महिलाएं जब मासिक चक्र से गुजरती हैं, तो उनके शरीर से बहुत भारी मात्रा खून का रिसाव होता है। जिस वजह से इन दिनों में खून की कमी हो जाती है, खासतौर से उन महिलाओं को जिनका फ्लो बहुत ज्यादा होता है। इस वजह से शरीर में आयरन की कमी की शिकायत होती है, जिसके परिणामस्वरूप हीमोग्लोबिन की पैदावार भी गिर जाती है। साथ ही यह समझना जरूरी है कि शरीर में जितनी तेजी से इन रक्त कोशिकाओं का गिराव होता है, उस गति से ये ग्रो नहीं करते हैं। जो गंभीर एनीमिया होने की संभावना तथा खतरे की रिस्क बढ़ा देता है।
डिसक्लेमर: लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्यों के लिए हैं और इसे प्रोफेशनल चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने या अपने आहार में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें।
