अक्सर लोग छींक को सर्दी या जुकाम की शुरुआत मान लेते हैं, लेकिन अगर छींक लगातार आए तो यह एलर्जी का संकेत हो सकता है। सर्दियों में हवा सूखी होने, प्रदूषण बढ़ने और नाक में नमी कम होने की वजह से नाक में इरिटेशन होती है, जिससे छींक रुकती नहीं। समय रहते ध्यान न देने पर सिर दर्द, साइनस और सांस लेने में दिक्कत की समस्या बढ़ सकती है।
सर्दियों में छींकों की असली वजह
सर्द हवा जब सीधे नाक से टकराती है, तो नाक के भीतर सूखापन और जलन पैदा होती है। यही जलन लगातार छींक के रूप में दिखाई देती है। वातावरण में मौजूद धूल, धुआं, परागकण और प्रदूषण भी नाक की झिल्लियों को प्रभावित करते हैं और एलर्जी को बढ़ावा देते हैं।
कैसे पहचाने कि छींक एलर्जी की है
एलर्जी से जुड़ी छींक के साथ नाक में खुजली, आंखों में पानी, गला सूखना और रात में सांस लेने में दिक्कत दिखाई देती है। कई बार कफ सीने में जम जाता है और साइनस बनना शुरू हो जाता है, जिससे नींद भी प्रभावित होती है।
ठंडी हवा और प्रदूषण की भूमिका
सर्द मौसम में नमी की कमी, धुआं और प्रदूषित कण नाक में जाकर इरिटेशन बढ़ा देते हैं। लगातार संपर्क से छींक और एलर्जी की दिक्कत लंबे समय तक बनी रह सकती है, इसलिए बचाव जरूरी है।
रात में क्यों बढ़ जाती है छींक
रात को तापमान घटता है, हवा और ठंडी होती है और नाक के अंदर सूखापन बढ़ जाता है। ऐसे में सांस लेने में परेशानी, कफ बढ़ना और छींक रुक-रुक कर आने लगती है, जिससे नींद तक खराब हो जाती है।
ऐसे पाएं राहत और बचाव का तरीका
नाक को कपड़े से ढककर रखें ताकि ठंडी हवा सीधे अंदर न जाए। ठंडा पानी और ठंडी चीजों से दूरी रखें। सुबह-शाम भाप लेने से नाक में नमी लौटती है और जलन कम होती है। रात को तिल का तेल या अणु तेल नाक में लगाने से भी आराम मिलता है। हल्दी वाला दूध शरीर को गर्म रखता है और संक्रमण से बचाव करता है।
Inputs: IANS
