बीते कुछ महीने पहले भारत सरकार ने देश में बिकने वाली कुछ दवाओं पर बैन लगाया था, जिसमें बुखार और दर्द के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाली कई तरह की दवाएं शामिल थीं। लेकिन प्रतिबंध के बाद भी आपको आज भी यह दवाइयां धड़ल्ले से बाजार में बिकती हुई दिखाई दे जाती हैं। इसमें शामिल पेरासिटामोल एक ऐसी दवा है जिसका इस्तेमाल भरपूर मात्रा में किया जाता है। केमिस्ट की दुकान पर जाकर लोग इसे सीधे नाम से खरीद लेते हैं। हालांकि किसी भी दवा का इस्तेमाल बिना डॉक्टर के परामर्श के करना सेहत के लिए ठीक नहीं है लेकिन भारत में बिना डॉक्टर के पर्चे के आप आसानी से दवाइयां खरीद सकते हैं। लोगों की इस तरह की आदत को देखते हुए ही बाजार में नकली दवाओं का धंधा भी खूब तेजी से पनप रहा है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने हाल ही में 50 से ज्यादा ऐसी दवाओं के नाम सार्वजनिक किए हैं, जो बाजार में नकली रूप में देखने को मिल रही हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
बाजार में मिलने वाली हर चौथी दवा है नकली
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें सामान्य पैरासिटामोल सहित कुल 53 ऐसी दवाओं को NSQ का लेवल दिया है। जिसका साफ अर्थ है कि ये सभी दवाएं अपने क्वालिटी पैरामीटर पर खरी नहीं उतर पाई हैं। इस रिपोर्ट से पहले बाजार में मिलने वाली दवाओं को लेकर किए गए इस शोध में पता चला है कि लगभग 25% दवाएं पूरी तरह नकली हैं, जिन्हें फर्जी कंपनियां अलग-अलग नामों से बाजार में उतार रही हैं।
लिस्ट में शामिल हैं ये दवाएं
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) कि रिपोर्ट में शामिल सभी दवाओं में आम बुखार की दवा पैरासिटामोल से लेकर पेनकिलर, एंटीफंगल, विटामिन और बीपी-शुगर की दवाइयां शामिल हैं।
कैसे करें नकली दवा की पहचान?
नकली दवा देखने में बिल्कुल असली के जैसी लगती है, इसलिए इसे पहचान पाना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन हम आपको कुछ आसान स्टेप्स बताने जा रहे है, जो आपकी इस समस्या को आसानी से हल कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आप दवा खरीदते समय उसके लेवल को अच्छे से पढ़ लें। इसके साथ ही आजकल दवाओं के रैपर पर बारकोड मौजूद होता है, जिससे उसके बारे में सभी तरह की जानकारी निकाली जा सकती है।
