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नींद पूरी होने के बाद भी रहती है थकान? ये हो सकती है वजह, न करें नजरअंदाज, डॉक्टर ने बताया

भरपूर नींद के बाद भी अगर शरीर में लगातार थकान रहती है, तो इसे हमेशा तनाव न समझें। विटामिन B12 कमी व बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन भी इसकी एक वजह हो सकती है। कुछ खास लक्षणों के साथ जांच कराना जरूरी हो सकता है।

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नींद पूरी होने के बाद भी रहती है थकान ये हो सकती है वजह

सुबह उठने के बाद भी शरीर भारी लगे, काम शुरू करने का मन न करे और दिनभर ऊर्जा कम महसूस हो तो अक्सर इसका कारण कम नींद, तनाव या व्यस्त दिनचर्या को माना जाता है। लेकिन इसकी कुछ और वजहें भी हो सकती हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी भी लगातार थकान की वजह बन सकती है। इनमें विटामिन B12 भी शामिल है।

यह विटामिन शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं बनाने, नसों को ठीक तरह से काम करने और डीएनए बनाने जैसी जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर कमजोरी, थकान, चक्कर, ध्यान लगाने में परेशानी या दिमाग धुंधला-सा महसूस होने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। कुछ लोगों में हाथ-पैर में झनझनाहट या सुन्नपन, संतुलन बिगड़ना, मुंह में छाले या जीभ का चिकना और सूजा हुआ होना भी दिखाई दे सकता है।

सिर्फ थकान नहीं लो B12 का लक्षण

हालांकि, लगातार थकान को देखकर सीधे यह मान लेना ठीक नहीं कि शरीर में B12 कम है। डॉ. के. सेशी किरण, सीनियर कंसल्टेंट जनरल फिजिशियन, यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के अनुसार थकान के पीछे कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। B12 की कमी खास तौर पर तब ध्यान देने वाली बात हो सकती है, जब थकान के साथ खून की कमी या नसों से जुड़े लक्षण भी मौजूद हों।

होमोसिस्टीन का B12 से संबंध

होमोसिस्टीन शरीर में पाया जाने वाला एक अमीनो एसिड है। इसे शरीर सामान्य रूप से इस्तेमाल और नियंत्रित करने के लिए विटामिन B12, फोलेट और विटामिन B6 की मदद लेता है। इन पोषक तत्वों की कमी होने पर होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ सकता है।

हालांकि, केवल होमोसिस्टीन बढ़ा हुआ आने से यह साबित नहीं होता कि इसकी वजह B12 की कमी ही है। किडनी की बीमारी, थायरॉयड से जुड़ी परेशानी, कुछ दवाएं और धूम्रपान जैसे कई दूसरे कारण भी इसके स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।

कब करानी चाहिए जांच?

अगर थकान लंबे समय से बनी हुई है, खासकर उसके साथ हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी या संतुलन से जुड़ी परेशानी भी है, तो डॉक्टर कुछ रक्त जांच की सलाह दे सकते हैं।

इनमें विटामिन B12 और फोलेट का स्तर, कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) और जरूरत के अनुसार होमोसिस्टीन या मिथाइलमैलोनिक एसिड की जांच शामिल हो सकती है। स्थिति के अनुसार किडनी और थायरॉयड की जांच भी कराई जा सकती है।

इलाज सिर्फ सप्लीमेंट लेने तक सीमित नहीं

अगर B12 की कमी सामने आती है, तो इलाज उसकी वजह और गंभीरता के अनुसार किया जाता है। कुछ लोगों को B12 की गोली दी जा सकती है, जबकि कुछ स्थितियों में इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए केवल थकान महसूस होने पर खुद से B12 लेना या सिर्फ एक रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू करना सही तरीका नहीं है। लगातार थकान को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी वजह समझना ज्यादा जरूरी है।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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