Knee Pain, घुटनों में दर्द : 30 या 40 की उम्र में सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द हो, बार-बार सूजन आए या पैर मोड़ने में परेशानी होने लगे, तो इसे केवल थकान समझकर टालना ठीक नहीं है। घुटनों में होने वाला नुकसान कई बार धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और इसके संकेत काफी देर से नजर आते हैं।
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फरीदाबाद के अमृता अस्पताल की कंसल्टेंट और असिस्टेंट प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, डॉ. अनन्या शर्मा के अनुसार, कम उम्र के मरीजों में लगातार घुटने का दर्द, बार-बार सूजन और सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि असली चिंता उम्र नहीं, बल्कि जोड़ का सामान्य उम्र से तेज खराब होना है।
घुटने का कार्टिलेज क्यों जरूरी
घुटने में मौजूद कार्टिलेज हड्डियों के बीच एक तरह की चिकनी सुरक्षा परत की तरह काम करता है। इससे जॉइंट्स आसानी से घूमते हैं और चलते समय झटके भी कम महसूस होते हैं। समस्या तब शुरू होती है जब यह परत गंभीर रूप से डैमेज हो जाए। एक बार ज्यादा नुकसान होने के बाद शरीर की इसे पहले जैसी स्थिति में वापस लाने की क्षमता सीमित होती है। इसलिए शुरुआत में ही घुटनों की परेशानी पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
पुरानी चोट न भूलें
अगर आपको कम उम्र में घुटने में गंभीर चोट लगी थी, तो दर्द खत्म होने के बाद उसे पूरी तरह भूल जाना हमेशा सही नहीं होता। मेनिस्कस या एसीएल जैसी चोट के बाद सही ट्रिटमेंट न होने पर घुटने की स्थिरता और चलने का तरीका प्रभावित हो सकता है। 2025 की 131 रिपोर्ट्स में ये दर्ज किया गया है कि, पहले हुई घुटने की चोट और आगे चलकर घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस के रूप में बदली हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर घायल व्यक्ति को गठिया होगा, लेकिन पुरानी चोट को नजरअंदाज करना जोखिम बढ़ा सकता है।
दौड़ने से घुटने खराब होते हैं?
कई लोगों को लगता है कि, दौड़ने से घुटने खराब होते हैं। हालांकि ये बात पूरी तरह सही नहीं है कि दौड़ना अपने आप घुटनों को खराब कर देता है। दिक्कत तब बढ़ सकती है जब पहले से चोटिल या कमजोर घुटने पर लगातार जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता रहे। अधिक वजन, कमजोर मांसपेशियां, गलत फिजिकल पॉश्चर और चोट के बाद अधूरा रिपेयर इस समस्या को बढ़ा सकते हैं।
इन संकेतों को न टालें
घुटने में बार-बार सूजन, चलते समय दर्द, जोड़ का अटकना, पैर का जवाब देना या सामान्य कामों में परेशानी हो रही है, तो जांच कराना समझदारी है। कम उम्र होना इस बात की गारंटी नहीं है कि घुटने में कोई समस्या नहीं हो सकती।
घुटने में परेशानी का मतलब यह नहीं कि आगे चलकर Knee Replacement जरूरी ही होगा। समस्या की शुरुआत में सही जांच, वजन को स्वस्थ सीमा में रखना, जांघ और पैर की मांसपेशियों को मजबूत करना, फिजियोथेरेपी और चोट के बाद उचित रिपेयर काफी मदद कर सकते हैं।
