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दिन में BP रहता है सामान्य, फिर भी रात में ब्लड प्रेशर नापना है जरूरी, कार्डियोलॉजिस्ट की चेतावनी

डॉक्टर आलोक चोपड़ा कहते हैं कि जब हम सोते हैं तो शरीर आराम की स्थिति में होता है। इस दौरान सामान्य तौर पर ब्लड प्रेशर दिन के मुकाबले कम होना चाहिए।

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हृदय रोग विशेषज्ञ से जानें कि क्यों जरूरी है रात में भी ब्लड प्रेशर मापना (Photo: iStock)

ब्लड प्रेशर यानी बीपी की जांच करते समय ज्यादातर लोग दिन में मिली रीडिंग पर ही ध्यान देते हैं। अगर रीडिंग सामान्य आती है तो लगता है कि सब ठीक है। हालांकि शरीर की कहानी रात में कुछ अलग हो सकती है। सोते समय ब्लड प्रेशर का कम होना शरीर की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। अगर रात में BP पर्याप्त कम नहीं होता, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा ने हाल ही में इस ओर ध्यान दिलाया है। उनके मुताबिक रात की BP रीडिंग भी दिल की सेहत को समझने में अहम भूमिका निभाती है।

रात में BP कम होना क्यों जरूरी है?

जब हम सोते हैं तो शरीर आराम की स्थिति में होता है। इस दौरान सामान्य तौर पर ब्लड प्रेशर दिन के मुकाबले कम होना चाहिए। डॉ. चोपड़ा के मुताबिक रात में BP में कम से कम करीब 10 प्रतिशत की गिरावट सामान्य मानी जाती है। यानी अगर दिन में आपका BP किसी स्तर पर है, तो नींद के दौरान उसमें कुछ कमी आना शरीर के सामान्य सर्केडियन रिदम का हिस्सा है।

दिन का BP सामान्य, फिर भी रात में बढ़ सकता है

यही वह बात है जिसे कई लोग मिस कर देते हैं। दिन में BP सामान्य होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि रात में भी वह सामान्य रहे। कुछ लोगों में रात के समय BP अपेक्षित रूप से कम नहीं होता। इसे रात का हाई BP या नॉन-डिपिंग पैटर्न कहा जा सकता है। ऐसे मामलों में दिन की सामान्य रीडिंग देखकर पूरी तरह निश्चिंत होना सही नहीं है।

लगातार ऐसा होना क्यों चिंता की बात है?

रात में BP के सामान्य तरीके से कम न होने का संबंध दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं के ज्यादा जोखिम से देखा गया है। रिपोर्ट में दिए गए शोध के मुताबिक रात के समय बढ़ा हुआ BP और दिन की तुलना में अपेक्षित गिरावट न होना खराब कार्डियोवैस्कुलर नतीजों और हार्ट फेलियर के जोखिम से जुड़ा पाया गया है। इसलिए रात की BP रीडिंग को भी स्वास्थ्य की तस्वीर का हिस्सा समझना चाहिए।

नींद भी दे सकती है संकेत

अगर किसी व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती है या उसकी नींद ठीक नहीं रहती, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नींद से जुड़ी परेशानियां रात के BP पर असर डाल सकती हैं। इसके अलावा जीवनशैली और कुछ स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी रात के समय BP बढ़ने की वजह बन सकती हैं। इसलिए केवल एक BP रीडिंग के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे पैटर्न को देखना ज्यादा जरूरी है।

BP की निगरानी सिर्फ दिन तक सीमित न रखें

ब्लड प्रेशर की समस्या में सबसे जरूरी बात नियमित निगरानी और लगातार प्रबंधन है। अगर दिन में BP सामान्य रहता है, लेकिन डॉक्टर को रात के BP को लेकर संदेह है, तो वह जरूरत के मुताबिक अलग तरह की निगरानी की सलाह दे सकते हैं। रात में BP किस तरह बदलता है, यह जानना कुछ लोगों के लिए दिन की एक रीडिंग से ज्यादा जानकारी दे सकता है।

कब डॉक्टर से बात करनी चाहिए?

अगर BP की रीडिंग लगातार सामान्य से ऊपर आ रही है, नींद में बार-बार परेशानी होती है या पहले से हाई BP की समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खासकर अपनी दवा की मात्रा या समय खुद से बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। BP का इलाज व्यक्ति की स्थिति और उसकी रीडिंग के पूरे पैटर्न को देखकर तय किया जाता है।

रात का BP भी है सेहत का आईना

ब्लड प्रेशर को समझने के लिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं कि दिन में रीडिंग कितनी आई। यह भी देखना जरूरी है कि सोते समय शरीर का BP किस तरह बदल रहा है। सामान्य स्थिति में रात में BP कुछ कम होता है। अगर यह गिरावट लगातार नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करना समझदारी है। सही जांच और सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करना सबसे बेहतर तरीका है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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