Eating Paan Benefits According To Ayurveda Paan Recipe In Hindi: क्या आपको भी खाने के बाद मीठा खाने की तलब होती है? अक्सर लोग इसे शांत करने के लिए मिठाई, चॉकलेट या मीठे ड्रिंक ले लेते हैं, जो कई बार सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में इसका एक पारंपरिक और हेल्दी विकल्प बताया गया है, वह है पान चबाना। इंस्टाग्राम हेल्थ इंफ्लुएंसर और आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. चैतली राठौर (BAMS Ayurveda) के मुताबिक, खाने के बाद तांबूल सेवन यानी आयुर्वेदिक पान चबाना न सिर्फ आपकी मीठे की क्रेविंग को कम करता है, बल्कि यह कई तरह के शारीरिक फायदों के लिए भी जाना जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार पान खाने के फायदे - Benefits Of Eating Paan Ayurveda In Hindi
मीठे की तलब मिटाए
खाने के बाद कुछ मीठा खाने का मन करे, तो आप आयुर्वेदिक पान ट्राय कर सकते हैं। इसमें गुलकंद, खजूर और सौंफ डाली जाती है जो मिठास भी देती है और पाचन भी सुधारती है। डॉ. चैतली कहती हैं कि ये हेल्दी तरीका है मीठे की क्रेविंग को शांत करने का, वो भी बिना किसी नुकसान के।
पाचन तंत्र को दे आराम
पान में मौजूद लौंग, इलायची, जायफल और सुपारी जैसी चीजें पेट के लिए फायदेमंद होती हैं। ये लार ग्रंथियों को एक्टिव करती हैं जिससे पाचन एंजाइम बेहतर काम करते हैं। इससे गैस, एसिडिटी या कब्ज जैसी दिक्कतें कम होती हैं।
दिल को दे मजबूती
आयुर्वेद के अनुसार, पान का सही सेवन दिल के लिए भी अच्छा होता है। इसमें डाले गए मसाले जैसे जायफल और कंकोल हार्ट टॉनिक की तरह काम करते हैं। डॉ. चैतली बताती हैं कि ये हाई ब्लड प्रेशर और दिल की कमजोरी में भी मदद कर सकते हैं।
मुंह की बदबू से राहत
अगर आपको बार-बार मुंह की बदबू की परेशानी होती है, तो आयुर्वेदिक पान इसका नेचुरल इलाज है। इसमें डाले गए कपूर, लौंग और सौंफ माउथ फ्रेशनर का काम करते हैं। साथ ही यह सांस की नली से कफ निकालने में भी मदद करता है।
वजन घटाने में भी मददगार
डॉ. चैतली के अनुसार, पान का सेवन वात और कफ दोष को संतुलित करता है। यही दो दोष मेटाबॉलिज्म और फैट बर्निंग से जुड़े होते हैं। इसलिए यह वजन कंट्रोल में भी सहायक हो सकता है, अगर इसे रोज़ खाने के बाद सही मात्रा में लिया जाए।
कब न खाएं पान?
अगर किसी को जख्म भरने में परेशानी है, खून बहने की समस्या है या आंखों में जलन रहती है, तो उन्हें पान से बचना चाहिए। साथ ही ज़हर जैसी किसी स्थिति में भी इसका सेवन न करें।
कैसे बनाएं आयुर्वेदिक पान घर पर - How To Make Paan Ayurveda At Home In Hindi
ताजे पान के पत्ते लें। इसमें थोड़ा जायफल पाउडर, कपूर, लौंग, इलायची, सुपारी और कंकोल मिलाएं। एक चम्मच गुलकंद, 1-2 खजूर और थोड़ी सौंफ डालें। इसे सुबह या रात को खाने के बाद चबाएं।
अब मीठे की क्रेविंग को हेल्दी तरीके से शांत करना है, तो बाजार के पान की जगह घर का बना आयुर्वेदिक पान चुनें। तंबाकू या कैमिकल्स से दूर, सिर्फ शुद्ध और सेहतमंद स्वाद के साथ।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
