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दिल्ली पुलिस EOW ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट; कहा- IHFL लोन और समीर गहलोत से जुड़ी कंपनियों में नहीं मिला सीधा लिंक

मामले में 15 दिसंबर 2025 को प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ कॉरपोरेट उधारकर्ता समूहों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से कर्ज लिया और कथित तौर पर कर्ज की रकम का एक हिस्सा उस उद्देश्य से अलग इस्तेमाल किया, जिसके लिए उसे मंजूर किया गया था।

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सांकेतिक तस्वीर।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने IHFL लोन और समीर गहलोत से जुड़ी कंपनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि अब तक की जांच में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL) से दिए गए कर्ज और कंपनी के पूर्व प्रमोटर समीर गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं में किए गए निवेश के बीच कोई सीधा वित्तीय संबंध नहीं मिला है। EOW ने यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में दाखिल की है। यह मामला सिटिजन्स व्हिसलब्लोअर फोरम की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। रिपोर्ट अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, EOW रवि कुमार सिंह की ओर से दाखिल की गई है।

इस मामले में 15 दिसंबर 2025 को प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ कॉरपोरेट उधारकर्ता समूहों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से कर्ज लिया और कथित तौर पर कर्ज की रकम का एक हिस्सा उस उद्देश्य से अलग इस्तेमाल किया, जिसके लिए उसे मंजूर किया गया था। आरोपों में यह भी कहा गया था कि कुछ रकम ऐसी संस्थाओं में निवेश की गई, जिनका लाभकारी स्वामित्व या नियंत्रण समीर गहलोत से जुड़ा था।

FIR में समीर गहलोत के अलावा DLF, Vatika, Chordia, Americorp और Reliance ADAG समेत पांच कॉरपोरेट उधारकर्ता समूहों और अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था।

EOW ने किन दस्तावेजों की जांच की?

EOW के मुताबिक, जांच के दौरान सम्मान कैपिटल से प्राप्त लोन रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, फंड फ्लो की जानकारी, कर्ज चुकाने से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। इसके अलावा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और राष्ट्रीय आवास बैंक से प्राप्त दस्तावेजों को भी जांच में शामिल किया गया।

एजेंसी ने पांचों कॉरपोरेट समूहों से जुड़े कुल 197 लोन अकाउंट की भी जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, इन खातों में कुल 8,267.86 करोड़ रुपये के लोन मंजूर और वितरित किए गए थे, जबकि इनसे 11,073.77 करोड़ रुपये की सकल वसूली हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी 197 लोन अकाउंट बंद हो चुके हैं।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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