क्या बार-बार आपका मुंह सूखता है? क्या आपको बार-बार प्यास लगती है? अगर जवाब हां है तो सावधान हो जाएं। अकसर लोग इसे मौसम, कम पानी पीने या थकान का असर मानकर नजरंदाज कर देते हैं, लेकिन यह आदत कई बार किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। आयुर्वेद में इस स्थिति को “मुख शोष” कहा गया है और इसे शरीर के आंतरिक असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है।
मुंह सूखने के नुकसान
आयुर्वेद के अनुसार, मुंह का सूखना वात और पित्त दोष के असंतुलन, पाचन अग्नि की कमजोरी और रस धातु की कमी का संकेत हो सकता है। लार केवल मुंह को गीला रखने का काम नहीं करती, बल्कि भोजन के पाचन, दांतों की सुरक्षा और संक्रमण से बचाव में भी अहम भूमिका निभाती है। जब लार कम बनने लगती है, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है।
वात दोष बढ़ने से शरीर में रूखापन आता है, पित्त दोष बढ़ने से जलन होती है और अग्नि दोष के कारण पाचन कमजोर पड़ जाता है। चरक संहिता में बताया गया है कि रस धातु के क्षीण होने से थकान, कब्ज, मुंह की बदबू, आवाज का बैठना और बार-बार संक्रमण की समस्या हो सकती है। इसके सामान्य लक्षणों में होंठ और जीभ का सूखना, स्वाद में कमी, बार-बार पानी पीने की इच्छा और बोलते समय गले में खराश शामिल हैं।
क्यों सूखता है मुंह
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी मानता है कि मुंह सूखने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे शरीर में पानी की कमी, ज्यादा चाय-कॉफी या शराब का सेवन, तंबाकू, तनाव, नींद की कमी और कुछ दवाओं का लंबे समय तक उपयोग। रात में मुंह सूखना डायबिटीज या स्लीप एप्निया का संकेत भी हो सकता है।
मुंह सूखने का उपचार
आयुर्वेद इस समस्या के लिए सरल और प्राकृतिक उपाय सुझाता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच देसी घी लेने से रस धातु को पोषण मिलता है। मुलेठी चूर्ण को शहद के साथ चूसने से लार का स्राव बढ़ता है। तेल कुल्ला यानी 5–7 मिनट तक मुंह में तेल घुमाने से लार ग्रंथियां सक्रिय होती हैं। आंवला रस, सौंफ-धनिया का पानी और नारियल पानी भी लाभकारी माने जाते हैं।
आयुर्वेदाचार्यों का कहना है कि मुंह के सूखने को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही समय पर ध्यान देकर और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आराम न मिले, तो विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
