हेल्थ

क्या पहाड़ों में रहने से घटता है ब्लड शुगर का खतरा, ऊंचाई और डायबिटीज का क्या है कनेक्शन, नई स्टडी ने खोले राज

Hight Altitude Living And Diabetes Risk: क्या ऊंचाई पर रहना डायबिटीज के खतरे को कम कर सकता है? हाल ही में एक नई स्टडी में सामने आया है कि कम ऑक्सीजन की स्थिति में रेड ब्लड सेल्स ज्यादा ग्लूकोज सोखते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल घट सकता है। वैज्ञानिकों ने एक नई दवा भी बनाई है, जिसने चूहों में डायबिटीज को उलट दिया। जानिए ऊंचाई, ऑक्सीजन और ब्लड शुगर के बीच क्या है असली संबंध।

Image

ऊंचाई पर रहना और डायबिटीज का कनेक्शन

Hight Altitude Living And Diabetes Risk: क्या सच में पहाड़ों में रहने से डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों के मन में था। अब अमेरिका में हुई एक नई रिसर्च ने इस पर रोशनी डाली है। शोध में पाया गया कि कम ऑक्सीजन वाले इलाकों में शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं यानी रेड ब्लड सेल्स अलग तरह से काम करने लगती हैं। वे खून से ज्यादा ग्लूकोज सोख लेती हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है। यह स्टडी सिर्फ एक थ्योरी नहीं, बल्कि चूहों पर किए गए प्रयोगों पर आधारित है। खास बात यह है कि इसी प्रक्रिया को कॉपी करने वाली एक दवा ने डायबिटीज में चौंकाने वाले नतीजे दिए हैं।

किस रिसर्च में आई जानकारी

यह स्टडी अमेरिका के ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट (Gladstone Institutes) के वैज्ञानिकों ने की, जिसमें ईशा जैन की अहम भूमिका रही। वह यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को में प्रोफेसर भी हैं। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल सेल मेटाबॉलिज्म (Cell Metabolism) में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च टीम कई सालों से ‘हाइपॉक्सिया’ यानी खून में कम ऑक्सीजन के असर पर काम कर रही थी।

ऊंचाई पर कम क्यों दिखती है डायबिटीज?

कई रिसर्च में यह पाया गया है कि जो लोग पहाड़ी इलाकों में रहते हैं, जहां हवा पतली और ऑक्सीजन कम होती है, उनमें समुद्र तट के पास रहने वालों की तुलना में डायबिटीज के मामले कम होते हैं। पहले यह सिर्फ एक ऑब्जर्वेशन था, लेकिन वजह साफ नहीं थी। अब वैज्ञानिकों ने समझाया है कि कम ऑक्सीजन शरीर के ग्लूकोज इस्तेमाल करने के तरीके को बदल देती है।

रेड ब्लड सेल्स का नया रोल

आमतौर पर हम रेड ब्लड सेल्स को सिर्फ ऑक्सीजन पहुंचाने वाला मानते हैं। लेकिन सेल मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित हुई नई स्टडी बताती है कि ये कोशिकाएं ब्लड शुगर कंट्रोल में भी बड़ी भूमिका निभाती हैं।

कम ऑक्सीजन की स्थिति में ये लाल रक्त कोशिकाएं स्पंज की तरह खून से ज्यादा ग्लूकोज खींच लेती हैं। इससे शरीर को पतली हवा में एडजस्ट करने में मदद मिलती है और साथ ही ब्लड शुगर लेवल भी कम होता है।

चूहों पर रिसर्च में क्या सामने आया?

ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने जब चूहों को कम ऑक्सीजन वाले माहौल में रखा, तो उनका ब्लड शुगर तेजी से गिर गया। जब उन्हें ग्लूकोज दिया गया, तो वह खून से जल्दी गायब हो गया।

जांच में पाया गया कि मसल्स, ब्रेन या लिवर ज्यादा शुगर इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। असल में रेड ब्लड सेल्स ही “ग्लूकोज सिंक” की तरह काम कर रहे थे। कम ऑक्सीजन में इनकी संख्या भी बढ़ गई और हर कोशिका सामान्य से ज्यादा ग्लूकोज लेने लगी।

शरीर के अंदर क्या बदलाव होता है?

कम ऑक्सीजन मिलने पर रेड ब्लड सेल्स ग्लूकोज से एक खास मॉलिक्यूल बनाते हैं, जो टिश्यू तक ऑक्सीजन छोड़ने में मदद करता है। यानी शरीर एक तरह से खुद को सर्वाइव करने के लिए री-प्रोग्राम कर लेता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ ऑक्सीजन का खेल नहीं है, बल्कि पूरा मेटाबॉलिज्म इससे जुड़ा है। यही वजह है कि ऊंचाई पर रहने से ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर हो सकता है।

डायबिटीज इलाज में नई उम्मीद

रिसर्च के आधार पर वैज्ञानिकों ने ‘HypoxyStat’ नाम की दवा तैयार की, जो शरीर में कम ऑक्सीजन जैसा असर पैदा करती है। चूहों में इस दवा ने हाई ब्लड शुगर को सामान्य कर दिया और मौजूदा इलाज से बेहतर परिणाम दिए।

सबसे खास बात यह रही कि कम ऑक्सीजन के फायदे सामान्य माहौल में लौटने के बाद भी कई हफ्तों तक बने रहे। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह खोज डायबिटीज के इलाज का नजरिया बदल सकती है।

फिलहाल यह रिसर्च शुरुआती चरण में है और इंसानों पर और अध्ययन की जरूरत है। लेकिन इतना तय है कि ऊंचाई, ऑक्सीजन और ब्लड शुगर के बीच का यह कनेक्शन मेडिकल साइंस के लिए एक नई दिशा खोल रहा है।

नोट: यह लेख अमेरिका के ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा की गई स्टडी पर आधारित है, जो सेल मेटाबॉलिज्म (Cell Metabolism) जर्नल में प्रकाशित हुई है। स्टडी का रेफ्रेंस - https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1550413126000185?via%3Dihub

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

और पढ़ें
End of Article